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अब सड़क पर दौड़ेंगी रोडवेज की इलेक्ट्रिक स्कूल बसें

अब सड़क पर दौड़ेंगी रोडवेज की इलेक्ट्रिक स्कूल बसें

देहरादून : निजी स्कूली वाहन आपरेटरों की मनमानी खत्म करने के लिए सरकार अब शहर और कस्बों में रोडवेज की इलेक्ट्रिक स्कूल बसें शुरू करने की तैयारी कर रही। बुधवार को मुख्य सचिव उत्पल कुमार ने दून में इसका प्रयोग करने व परिणाम के आधार पर राज्य के अन्य इलाकों में भी इनके संचालन की बात कही। रोडवेज मासिक पास के आधार पर इन बसों का संचालन करेगा।

देहरादून शहर में स्कूली वाहन को लेकर सरकार की गुजरे तीन दिनों में जो किरकिरी हुई है सरकार अब उससे सबक लेना चाह रही। परिवहन विभाग ने स्कूली वाहनों को लेकर दिए गए हाईकोर्ट के आदेश पर जब तय नियमों का पालन कराना चाहा तो वैन और आटो संचालक उखड़ गए। विरोध में आटो संचालकों ने सोमवार और मंगलवार को स्कूली बच्चों का परिवहन बंद रखा व निजी वैन संचालकों ने बुधवार से सेवाओं को बाधित कर दिया। इससे हजारों बच्चों व उनके अभिभावकों को परेशानी हो रही।

हालांकि, एक रोज पहले सरकार ने स्कूली आटो का हल तो निकाल लिया, मगर वैन संचालक अड़े हुए हैं। चूंकि, हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराना है और बच्चों को परिवहन की सुविधा भी उपलब्ध करानी है, लिहाजा सरकार इसका स्थाई हल निकालने के मूड में है।

इसी क्रम में बुधवार को परिवहन निगम की निदेशक मंडल की बैठक में सरकार ने निगम को इलेक्ट्रिक स्कूल बसें शुरू करने के आदेश दिए। दून-मसूरी मार्ग पर आरंभ में जो 25 इलेक्ट्रिक सिटी बसों को चलाई जाएंगी, वह शहर के अलग-अलग हिस्सों से होकर गुजरेंगी। ऐसे में मासिक पास के आधार पर बच्चे इन बसों में भी सफर कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त शहर में जो दूसरी नई सिटी बसें उतारी जाएंगी, उनमें भी यह पास मान्य होगा। इन बसों के अलावा भी स्कूलों के लिए अलग से बसें चलेंगी, जो केवल स्कूल बस के तौर पर ही दौड़ेंगी। ये स्कूल बसें एक निर्धारित स्कूल के लिए नहीं होंगी, बल्कि एक मार्ग पर जितने भी स्कूल होंगे, वहां के बच्चे इसमें परिवहन कर सकेंगे।

खत्म होगी मनमानी वसूली, स्कूलों को भी मिलेगी सीख

रोडवेज इलेक्ट्रिक स्कूल बसें चलने से न सिर्फ निजी स्कूल वाहन आपरेटरों की ओर से हो रही मनमाने किराए की वसूली खत्म होगी, बल्कि स्कूलों को भी सीख मिलेगी। अभी जिन स्कूलों की बसें चल रही हैं, वे इसके किराए की एवज में अभिभावकों से मोटी रकम वसूलते हैं। इसी तरह से निजी संचालक भी अभिभावकों की मजबूरी का फायदा उठाकर पंद्रह सौ से ढाई हजार तक मासिक किराया लेते हैं। रोडवेज बसों का मासिक किराया इससे एकदम आधा होगा। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो रोडवेज बसों में स्कूली बच्चों को 500 से एक हजार रुपये तक मासिक पास की सुविधा मिलेगी। यही नहीं, अनुभवी चालक और परिचालक होने से सुरक्षा संबंधी आशंका भी नहीं रहेगी।

मारपीट में चालक बर्खास्त, दो अधिकारियों को चार्जशीट

रोडवेज के हरिद्वार डिपो में करीब पंद्रह दिन पहले कार्मिकों में हुई मारपीट मामले में प्रबंधन ने चालक को बर्खास्त कर दिया है। इसके अलावा स्टेशन प्रभारी व वरिष्ठ प्रशासनिक लिपिक को चार्जशीट देते हुए लिपिक का तबादला टनकपुर कर दिया गया है।

रोडवेज मुख्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक तकरीबन पंद्रह दिन पहले हरिद्वार डिपो के बाहर दो पक्षों में विवाद हो रहा था। इस बीच विशेष श्रेणी चालक रजनीश कुमार व वरिष्ठ प्रशासनिक लिपिक अनिल त्यागी वहां पहुंचे। विवाद सुलझाते हुए ये दोनों आपस में भिड़ गए व इनमें जमकर मारपीट हुई। जिससे स्टेशन पर हंगामा हो गया और यात्रियों को परेशान होना पड़ा। दोनों पक्षों ने हरिद्वार एजीएम कार्यालय में एक-दूसरे के विरुद्ध शिकायत दी थी। इस पर एजीएम ने चालक रजनीश को बर्खास्त कर दिया।

इसे एक तरफा कार्रवाई बताकर उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने वहां आंदोलन किया और बाद में मुख्यालय ने चालक की बर्खास्तगी के आदेश वापस ले उसे मुख्यालय अटैच कर दिया। मामले में यूनियन की मांग पर प्रबंध निदेशक बृजेश कुमार संत ने मुख्यालय स्तर पर जांच का आदेश दिया। एजीएम संजय गुप्ता को इस प्रकरण की जांच सौंपी गई। एजीएम गुप्ता की जांच में दोनों पक्षों को दोषी पाया गया और कार्रवाई की संस्तुति की गई। जिस पर बुधवार को प्रबंधक निदेशक संत ने दोषी विशेष श्रेणी चालक रजनीश की बर्खास्तगी के आदेश दिए। इसके अलावा प्रशासनिक लिपिक अनिल त्यागी और घटना के समय स्टेशन प्रभारी रहे राम कुमार शर्मा पर भी कार्रवाई करते हुए इन्हें चार्जशीट करने का आदेश दिया। इसके साथ अनिल त्यागी का तबादला हरिद्वार डिपो से टनकपुर कर दिया गया।

रोडवेज का जर्जर बस बेड़ा हटेगा

अभी तक उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में डर-डरकर सफर कर वाले लोगों की चिंता दूर होने वाली है। सूबे में 243 जर्जर बसों का संचालन कर रहे रोडवेज प्रबंधन ने इन बसों को नीलाम करने की मंजूरी दे दी है। साथ ही पूरे प्रदेश के लिए 560 नई बसों की खरीद की जाएगी। इनमें 250 बसों को अनुबंध पर लगाया जाएगा। माना जा रहा कि इससे रोडवेज का बस बेड़ा भी बढ़ेगा व आर्थिक घाटा भी दूर होगा।

परिवहन निगम की 243 बसें गत एक जुलाई को अपनी आयु सीमा की मियाद पूरी कर चुकी हैं, फिर भी इन्हें सड़कों पर दौड़ाया जा रहा। इतना ही नहीं इस दिसंबर तक कुल 378 बसें कंडम की श्रेणी में आ जाएंगी। बीते दिनों उत्तरकाशी चंबा मार्ग में दुर्घटनाग्रस्त हुई हरिद्वार डिपो की साधारण बस भी दिसंबर तक कंडम होने वाली बस की सूची में शामिल थी। परिवहन निगम के नियमानुसार कोई भी बस पर्वतीय मार्ग पर अधिकतम छह साल या छह लाख किमी तक चल सकती है। इसी तरह मैदानी मार्ग पर यह शर्त छह साल या आठ लाख किमी है। इसके बाद बस की नीलामी की जानी चाहिए, पर यहां ऐसा नहीं हो रहा। निगम के पास वर्तमान में 1407 बसों का बेड़ा है। इनमें 1183 बसें निगम की अपनी हैं जबकि बाकी अनुबंधित हैं। इसके अलावा 124 जेएनएनयूआरएम की हैं। बेड़े की करीब 900 बसें ऑनरोड रहती हैं, जबकि बाकी विभिन्न कारणों से वर्कशॉप में खड़ी रहती हैं। कंडम बसें सड़क पर दौड़ने की वजह से ये बसें या तो बीच रास्ते में खड़ी हो जाती हैं या हादसे का शिकार बन जाती हैं। ऐसे कई पिछले उदाहरण हैं जब बसों के स्टेयरिंग निकल गए या फिर ब्रेक फेल हो गए। पिथौरागढ़ में 20 जून 2016 को हुआ हादसा इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। आयु सीमा पूरी कर चुकी बस हादसे का शिकार बनी और चालक समेत 14 यात्री काल के गाल में समा गए थे।

अशोक चौधरी (प्रदेश महामंत्री उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन) का कहना है कि कंडम बसों को किसी सूरत में मार्ग पर नहीं भेजना चाहिए। इस बसों को तो बीमा क्लेम तक नहीं मिलता। यही ये हादसे का शिकार हो जाएं तो जिम्मेदारी कौन लेगा। हमारे आंदोलन के दौरान पिछले दिनों नई बसें लेने पर सहमति बनी थी। अब इसकी मंजूरी मिलने पर सरकार व निगम प्रबंधन को यूनियन धन्यवाद देती है।

मारपीट में चालक बर्खास्त, दो अधिकारियों को चार्जशीट

रोडवेज के हरिद्वार डिपो में करीब पंद्रह दिन पहले कार्मिकों में हुई मारपीट मामले में प्रबंधन ने चालक को बर्खास्त कर दिया है। इसके अलावा स्टेशन प्रभारी व वरिष्ठ प्रशासनिक लिपिक को चार्जशीट देते हुए लिपिक का तबादला टनकपुर कर दिया गया है।

रोडवेज मुख्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक तकरीबन पंद्रह दिन पहले हरिद्वार डिपो के बाहर दो पक्षों में विवाद हो रहा था। इस बीच विशेष श्रेणी चालक रजनीश कुमार व वरिष्ठ प्रशासनिक लिपिक अनिल त्यागी वहां पहुंचे। विवाद सुलझाते हुए ये दोनों आपस में भिड़ गए व इनमें जमकर मारपीट हुई। जिससे स्टेशन पर हंगामा हो गया और यात्रियों को परेशान होना पड़ा। दोनों पक्षों ने हरिद्वार एजीएम कार्यालय में एक-दूसरे के विरुद्ध शिकायत दी थी। इस पर एजीएम ने चालक रजनीश को बर्खास्त कर दिया। इसे एक तरफा कार्रवाई बताकर उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने वहां आंदोलन किया और बाद में मुख्यालय ने चालक की बर्खास्तगी के आदेश वापस ले उसे मुख्यालय अटैच कर दिया। मामले में यूनियन की मांग पर प्रबंध निदेशक बृजेश कुमार संत ने मुख्यालय स्तर पर जांच का आदेश दिया। एजीएम संजय गुप्ता को इस प्रकरण की जांच सौंपी गई। एजीएम गुप्ता की जांच में दोनों पक्षों को दोषी पाया गया और कार्रवाई की संस्तुति की गई। जिस पर बुधवार को प्रबंधक निदेशक संत ने दोषी विशेष श्रेणी चालक रजनीश की बर्खास्तगी के आदेश दिए। इसके अलावा प्रशासनिक लिपिक अनिल त्यागी और घटना के समय स्टेशन प्रभारी रहे राम कुमार शर्मा पर भी कार्रवाई करते हुए इन्हें चार्जशीट करने का आदेश दिया। इसके साथ अनिल त्यागी का तबादला हरिद्वार डिपो से टनकपुर कर दिया गया।

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