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इस योगासन का करें रोजाना नहीं होगा कभी भी सिरदर्द

इस योगासन का करें रोजाना नहीं होगा कभी भी सिरदर्द

सिरदर्द एक ऐसी समस्या है, जिसका हर व्यक्ति ने कभी न कभी सामना अवश्य किया है। कुछ लोगों को यह समस्या लगातार बनी रहती है तो कभी−कभी काम के तनाव के चलते हल्के सिरदर्द की शिकायत होती है। आमतौर पर, सिरदर्द होने पर लोग दवाइयों का सेवन करते हैं लेकिन अगर कुछ योगासनों का अभ्यास किया जाए तो सिरदर्द की समस्या होगी ही नहीं और जिन्हें यह समस्या है, उन्हें भी काफी हद तक राहत मिलेगी। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में−
विपरीतकर्णीआसन

विपरीतकर्णीआसन शरीर को मजबूत व लचीला बनाने का काम करता है। इसके अतिरिक्त मस्तिष्क में रक्त प्रचुर मात्रा में जाने से उसके सभी विकार दूर होते हैं। यह आसन सिरदर्द व चक्कर आने जैसी समस्या को भी दूर करता है। इस आसन का अभ्यास करने के लिए दीवार का सहारा भी लिया जा सकता है। इसके लिए दीवार के नजदीक पीठ के बल लेट जाएं। अब पैरों को दीवार से लगाकर सीधा करें। अब दीवार के सहारे अपने पैरों को ऊपर उठाएं। यह धीरे−धीरे करें। अब अपने कूल्हों को ऊपर की तरफ उठाएं। शरीर को अपने हाथों से सहारा दें। अपनी गर्दन, कंधे और चेहरे को स्थिर रखें। इस अवस्था में 5 मिनट तक गहरी सांस लें और फिर सांस छोड़ें। धीरे−धीरे इस अवस्था से बाहर आएं।

अधोमुखश्वासन
यह आसन सिर्फ कमरदर्द, हाथ, पैर व गर्दन की मांसपेशियों के लिए अच्छे नहीं माने जाते। बल्कि इस आसन के अभ्यास के दौरान शरीर उल्टे वी के समान दिखाई देता है और उल्टा होने के कारण सिर की तरफ रक्त व ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर तरीके से होता है, जिससे सिरदर्द से राहत मिलती है। इस आसन का अभ्यास करने के लिए पेट के बल लेटें। इसके बाद अपने हाथों व पैरों को जमीन से लगाते हुए त्रिभुज की भांति शरीर की आकृति बनाते हुए कमर को उपर उठाएं। इस पॉश्चर में कुछ देर रूकें और गहरी सांस लें। इसके बाद सामान्य अवस्था में लौट आएं।

उत्तानासन
उत्तानासन नर्वस सिस्टम में रक्त की आपूर्ति को बढ़ाकर दिमाग को शांत करता है। साथ ही यह कोशिकाओं में ऑक्सीजन प्रवाह को बेहतर बनाता है। यह सिरदर्द को दूर करने के लिए एक बेहतरीन आसन माना गया है। इसका अभ्यास करने के लिए पहले सीधे खड़े हो जाएं। अब सांस छोड़ते हुए कूल्हों की तरफ से मुड़ते हुए नीचे झुके। ध्यान रहे कि आपके घुटने न मुड़ें तथा पैर एक−दूसरे के समानांतर हों। अब अपनी छाती को पैरों के बीच में करें तथा कूल्हे की हडि्डयों में खिंचाव को महसूस करें तथा हाथों से अपने पंजों को छुएं। आपका सिर अब फर्श तक पहुंच जाएगा। अब कुछ देर तक इसी अवस्था में रहें। अब सांस लेते हुए हाथों को अपने कूल्हें पर रखें तथा धीरे−धीरे सामान्य अवस्था में लौट आएं।

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