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उत्तराखंड में गठित होंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट, सीएम ने दिए निर्देश

उत्तराखंड में गठित होंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट, सीएम ने दिए निर्देश

हाल में पौड़ी जिले में सिरफिरे युवक द्वारा एक छात्रा को जलाकर मार डालने की घटना के बाद प्रदेश में महिला एवं बाल उत्पीड़न की घटनाओं पर अंकुश लगाने के मद्देनजर सरकार सक्रिय हो गई है। ऐसे मामलों को जल्द निस्तारित करने के उद्देश्य से सरकार ने राज्य में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का निश्चय किया है, ताकि शीघ्र न्याय सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस सिलसिले में प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू करने के लिए सचिव गृह एवं न्याय को निर्देश दे दिए हैं।

महिला एवं बाल उत्पीड़न के बढ़ते मामलों से उत्तराखंड भी अछूता नहीं है और इनमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है। आंकड़े खुद इसकी गवाही दे रहे हैं। वर्ष 2016 में राज्य में महिला उत्पीड़न के 1795 मामले दर्ज हुए थे, 2017 में यह संख्या 2045 पहुंच गई। इस वर्ष अब तक यह आंकड़ा

इसी प्रकार बाल उत्पीड़न के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं। उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग के आंकड़े देखें तो इस वर्ष अब तक पोक्सो एक्ट में 15 मामले दर्ज हो चुके हैं। पिछले वर्ष यह संख्या सात थी। राज्य में महिला एवं बाल उत्पीड़न के बढ़ते मामलों ने सरकार की पेशानी पर बल डाल दिया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि देवभूमि में इस प्रकार की घटनाएं हो रही हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों के जल्द निस्तारण के लिए सरकार ने राज्य में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का निर्णय लिया है।

इस संबंध में सचिव गृह व न्याय को निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि संसद ने बच्चों के प्रति यौन अपराध के संलिप्त अपराधियों के लिए फांसी की सजा का प्रावधान किया है। नए वर्ष में इस प्रकार के मामलों में शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित की जाएंगी।

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