Share
उत्‍तराखण्‍ड प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कार्यभार संभाला

उत्‍तराखण्‍ड प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कार्यभार संभाला

#१०० दिन उत्‍तराखण्‍ड सरकार के#१०० दिन उत्‍तराखण्‍ड विकास के#उत्‍तराखण्‍ड मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने राज्य के विकास के लिए नई नींव रखने का काम शुरू किया #त्रिवेन्द्र के कुशल नेतृत्व में इतिहास रचती उत्तराखण्ड सरकार #जनता के विश्वास पर खरा उतरती त्रिवेन्द्र सरकार #सीधा है भला इन्सान हैः आम जन ने यह मानाः मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के बारे में आम जन की धारणा # उत्‍तराखण्‍ड के मुख्‍यमंत्री के रूप में त्रिवेन्‍द्र रावत ने पूरे प्रदेश के आम जन का विश्‍वास जीतने में सफल साबित हो रहे हैं# जनता को उन पर विश्‍वास हुआ है – यह सबसे बडी उपलब्‍धता है-

उत्‍तराखण्‍ड सरकार के 100 दिन पूर्ण होने पर हिमालयायूके की विशेष प्रस्‍तुति

१८ मार्च, २०१७ को उत्‍तराखण्‍ड प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कार्यभार संभाला। राज्य गठन के बाद विधान सभा चुनाव में पहली बार किसी पार्टी को इतना प्रचंड बहुमत मिला है। प्रचंड बहुमत मिलने पर सरकार से जनता की अपेक्षाएं अधिक बढ जाती है। ऐसे में जनता की अपेक्षाओं और राज्य के विकास के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करना वर्तमान सरकार की प्राथमिकता बन जाती है। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र के नेतृत्व में वर्तमान राज्य सरकार २५ जून, २०१७ को १०० दिन पूरे कर रही है। इन १०० दिन में यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य सरकार की प्राथमिकता क्या है और वह किस दिशा में आगे बढ रही है।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत एक सरल एवं सहज व्यक्तित्व के मुख्यमंत्री है। प्रदेश की कमान संभालते ही अपनी प्राथमिकता स्पष्ट करते हुए श्री त्रिवेन्द्र ने अधिकारियों को स्पश्ट निर्देश दिये है कि सडक, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में है। किसी भी प्रदेश के विकास में वहां के आधारभूत अवस्थापना सुविधाओं का अहम योगदान होता है। राज्य गठन के बाद से यह पहला मौका है, जब किसी सरकार ने अवस्थापना सुविधाओं के विकास पर फोकस किया है। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने सबसे पहले इसी दिशा में अपने कदम बढाये। उनके इस प्रयास में केन्द्र सरकार का भी पूरा सहयोग मिला। जिसका परिणाम यह रहा कि राज्य के महत्वपूर्ण स्थलों को रेल सेवा से जोडने की योजना पर कार्य शुरू हो गया है। पहले ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेलवे लाइन की घोषणा हुई थी, लेकिन सरकार के प्रयासों से अब यह परियोजना बद्रीनाथधाम व सोनप्रयाग तक स्वीकृत हो चुकी है। इसके साथ ही मुज्जफरनगर-देवबंद के मध्य भी रेल लाइन शीघ्र पूरी होने वाली है। इन सब प्रयासों को यदि देखा जाय तो आने वाले समय में दिल्ली से जोशीमठ तक सीधी रेल सेवा प्रदेशवासियों के साथ ही देश-विदेश से आने वाले तीर्थ यात्रियों को मिल सकेंगी। यह रेल परियोजना उत्तराखण्ड के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। केन्द्र सरकार ने स्थानीय युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देने एवं उनकी आजीविका के साधनों को बढाने के लिये कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय का क्षेत्रीय कार्यालय भी देहरादून में खोलने का निर्णय लिया है। यह प्रथम अवसर होगा जब इस मंत्रालय का क्षेत्रीय कार्यालय दिल्ली से बाहर खोला जायेगा।

: : बेदाग छवि वाले एक तेजतर्रार नेता; जनता के बीच में उनकी छवि सीधे, भले इंसान

चन्‍द्रशेखर जोशी मुख्‍य सम्‍पादक –

हिमालय गौरव उत्‍तराखण्‍ड- डिजीटल मीडिया तथा दैनिक समाचार पत्र की विशेष प्रस्‍तुति

राष्ट्रीय स्वयं संघ की पृष्ठभूमि वाले उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत बेदाग छवि वाले एक तेजतर्रार नेता के रूप में जाने जाते हैं जबकि जनता के बीच में उनकी छवि सीधे, भले इंसान के रूप में जानी जाती है। पृथक उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान भी उन्होंने सक्रिय रुप से हिस्सा लिया जिसके चलते रावत को कई बार जेल भी जाना पड़ा। मूल रुप से पौडी गढवाल के खैरासैंण गाँव के निवासी रावत ने वर्ष 2002 में उत्तराखंड के पहले विधानसभा चुनावों में देहरादून जिले की डोइवाला सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। त्रिवेन्द्र सिंह रावत भारतीय गणराज्य के उत्तराखंड राज्य के राजनेता तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक हैं।17 मार्च 2017 को उत्तराखंड के मुख्य मंत्री नियुक्त हुए रावत के पिता का नाम प्रताप सिंह और माता का नाम बोद्धा देवी है। रावत का विवाह सुनीता से हुआ। सुनीता रावत शिक्षि‍का हैं और देहरादून में नियुक्‍त हैं।

इनकी दो पुत्रि‍यां हैं। 1983: श्रीनगर गढ़वाल विश्वविद्यालय से परास्नातक की उपाधि। 1984: पत्रकारिता में डिप्लोमा ; 1979:रावत का राजनीतिक सफर प्रारम्भ हुआ और इसी वर्ष त्रिवेंद्र राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। 1981: में संघ के प्रचारक के रूप में काम करने का उन्‍होंने संकल्प लिया। 1985: में देहरादून महानगर के प्रचारक बने। 1993: में वह भाजपा के क्षेत्रीय संगठन मंत्री। 1997 : भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री; 2002 : भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री; 2002 विधानसभा चुनाव में डोईवाला विधानसभा से विजयी हुए ; 2007:डोईवाला विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से उत्तराखंड विधान सभा के लिए भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए।भारतीय जनता पार्टी के मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बने। 2017 :डोईवाला विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से उत्तराखंड विधान सभा के लिए भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में विजयी हुए; 17 मार्च 2017 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री नियुक्त हुए ; त्रिवेन्द्र सिंह रावत डोइवाला सीट की नुमाइंदगी करते हैं. इस वक्‍त वह पार्टी की झारखंड यूनिट के प्रभारी रहे. उनकी कार्यक्षमता से प्रभावित होकर अक्टूबर, 2014 में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें झारखंड का प्रदेश प्रभारी बनाया और उन्होंने इस पद पर अपनी उपयोगिता साबित करते हुए उसी साल राज्य में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को पराजित कर भाजपा की सरकार बनवाने में अहम भूमिका निभाई। झारखंड में प्रभारी रहने के दौरान त्रिवेंद्र सिंह रावत की भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से बढ़ी नजदीकियां और झारखंड चुनावों में पार्टी को मिली सफलता उन्हें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचाने में अहम साबित हुईं। वह पहली बार 2002 में डोइवाला सीट से एमएलए बने. तब से वहां से तीन बार चुने जा चुके हैं. वह 2007-12 के दौरान राज्‍य के कृषि मंत्री भी रहे. प्रदेश में बनी नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ विपक्षी दल के तौर पर भाजपा द्वारा किए गए आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों में भी रावत ने बढ़ चढ़ कर अपनी भागीदारी निभाई। देहरादून-हरिद्वार और देहरादून-ऋषिकेश के बीच डोइवाला बैरिकेडिंग से गुजरने वाले वाहनों से अवैध चुंगी वसूले जाने का भी त्रिवेंद्र सिंह रावत ने खुलकर विरोध किया और अपने समर्थकों के साथ वहां धावा बोलते हुए बैरिकैडिंग को उखाड़ फेंका। रावत की इस मुहिम को भारी जनसमर्थन के साथ अपार सराहना भी मिली।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने एक और अहम कदम उठाया है, जिसके तहत लोक निर्माण, पेयजल, जल संस्थान, सिंचाई, ग्रामीण अभियंत्रण जैसे विभागों को उनके नियमित बजट के अतिरिक्त २५० करोड रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसके पीछे सरकार की मंशा है कि बजट के अभाव में छोटे-छोटे कार्य बाधित होते है, उन्हें पूरा किया जा सके। लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिये गये है कि २५० करोड के अतिरिक्त बजट से पुल एवं संफ मार्ग आदि का निर्माण किया जायेगा, जबकि जल संस्थान व पेयजल विभाग को निर्देश दिये गये है कि पौडी, पिथौरागढ, अल्मोडा, देहरादून, नैनीताल जैसे जनपदों में बडे-बडे बहुद्देशीय जलाशय बनाये जाय। इससे क्षेत्रों में पेयजल व सिंचाई की समस्या का समाधान हो सकेगा।
राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं को अपनी शीर्ष प्राथमिकता में रखा है, जिसके लिए राज्य गठन के बाद पहली बार ऐसा निर्णय लिया गया, जिसमें मैदानी क्षेत्रों में वर्षों से तैनात डॉक्टरों को पहाडों पर भेजा गया है। इसके साथ ही सरकार द्वारा शीघ्र ही २०० डॉक्टरों के पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। इसके लिए चिकित्सा चयन बोर्ड के माध्यम से कार्य किया जा रहा है।
वर्तमान राज्य सरकार ने एक और अहम निर्णय लिया है जिसके अनुसार सीमंात एवं लघु किसानों को २ प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जायेगा। इससे किसानों के आजीविका में वृद्धि होगी, जिसके लिए राज्य सरकार द्वारा पूरा सहयोग दिया जायेगा। सरकार का लक्ष्य है कि इस योजना से १ लाख किसानों को स्वरोजगार से जोडा जा सके। इसके तहत फ्लोरीकल्चर, प्रोसेसिंग, बागवानी, फल-फूल सब्जी उत्पादन एवं विपणन आदि कार्य किये जा सकेंगे। मुख्यमंत्री श्री रावत ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिये है कि २०२१ तक सबको आवास उपलब्ध होना चाहिए। साथ ही वर्ष २०१७ तक प्रत्येक गांव, २०१८ तक हर तोक तथा २०१९ तक हर घर को बिजली से जोडा जाय। राज्य सरकार द्वारा यह भी लक्ष्य रखा गया है कि जो बी.पी.एल. परिवार उज्जवला योजना से लाभान्वित नही हो पाये है, उन परिवारों को गैस कनैक्शन उपलब्ध कराये जायेंगे। वर्श २०२२ तक हर बेघर को घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

केन्द्र सरकार द्वारा राज्य में पॉवर सेक्टर के विकास के लिए एडीबी से मिलने वाले ८१९.२० करोड रूपये के ऋण के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इससे राज्य में नई ट्रांसमिशन लाईन के साथ ही नए सब स्टेशन स्थापित होंगे। साथ ही पुराने सब स्टेषनों की क्षमता में वृद्धि होगी। यह धनराशि ऊर्जा विकास के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगी। राज्य को मिलने वाली इस धनराशि से समयबद्ध रूप से १७३.५ मेगावाट की जल विद्युत परियोजनाएं पूरी होगी। देहरादून, हल्द्वानी एवं हरिद्वार को जल्द नई रिंग रोड मिलेगी, इस दिशा में कार्य शुरू कर दिया गया है। गढवाल एवं कुमाऊं की कनैक्टिविटी के लिए कंडी मार्ग को खोलने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य किया जा रहा है। इसके लिए केन्द्र सरकार के स्तर पर प्रभावी पहल की जा रही है। भारत सरकार से २२ सडकों को राष्ट्रीय हाईवे बनाने के लिए भी सहमति मिल चुकी है। इससे राज्य की सडकों के निर्माण और मरम्मत कार्य में सहायता मिलेगी।

राज्यहित में सरकार ने एक और अहम निर्णय लिया, जिसके तहत ५ करोड रुपये धनराशि तक के कार्य राज्य के मूल निवासियों को ही दिये जायेंगे। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने रोजगार के अधिक से अधिक अवसर सृजित करने के उद्देश्य से सभी विभागों को निर्देश दिये है कि विभागवार रिक्त पदों की रिपोर्ट सरकार को भेजी जाय। वर्तमान में लगभग पटवारी के ११०० रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही अन्य विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया भी षीघ्र षुरू कर ली जायेगी। उच्च शिक्षा में शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए उच्च शिक्षा चयन आयोग का गठन किया गया है। पशुपालन विभाग में १०० पदों पर भर्ती प्रक्रिया जायेगी, जिसमें पशुधन प्रसार अधिकारी एवं पशु चिकित्सक के पद शामिल है। भर्ती प्रक्रियाओं में पूर्णतः पारदर्शिता रखी जायेगी।

राज्य सरकार की स्पश्ट सोच है कि प्रदेष में भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नही किया जायेगा। इसका उदाहरण एन.एच.७४ मुआवजा प्रकरण सबके सामने है। श्री त्रिवेन्द्र ने करप्शन पर जीरो टालरेंस के सिद्धांत का कडाई से पालन करते हुए इस केस को सी.बी.आई. को भेजा और जब तक सी.बी.आई. ने इस केस को ले नही लिया, तब तक एस.आई.टी. अपना काम कर रही है। अब तक एस.आई.टी. की जांच में २०० से अधिक फाईल मिल चुकी है, ६ अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है, जबकि २ को गिरफ्तार किया गया है। राज्य सरकार ने इस दिशा में आगे बढते हुए एक और कदम उठाया, जिसमें विवादास्पद यूपी निर्माण निगम को राज्य में निर्माण कार्य हेतु प्रतिबंधित कर दिया गया है। अब केवल राज्य सरकार की अपनी निर्माण एजेंसियां ही कार्य करेगी।

राज्य गठन के बाद से उत्तर प्रदेष और उत्तराखण्ड सरकार के मध्य लंबित परिसंपत्तियों के प्रकरण पर कोई ठोस कार्यवाही नही हुई। लेकिन मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कार्यभार संभालते ही सबसे पहले इस प्रकरण पर राज्य के नौकरशाहों के साथ विचार-विमर्श कर निर्देश दिये कि इस प्रकरण का समाधान शीघ्र किया जाय। मुख्यमंत्री स्वयं इस मामले पर निगरानी रख रहे है। इसका परिणाम यह रहा है कि उत्तर प्रदेष सरकार व उत्तराखण्ड सरकार के मध्य एक सकारात्मक वार्ता आगे बढी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि परिसंपत्तियों के लंबित मामले का समाधान षीघ्र होगा।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने अपनी दूरगामी सोच और सार्थक प्रयासों से राज्य के विकास के लिए नई नींव रखने का काम शुरू किया है। इसमें केन्द्र सरकार की योजनाओं का लाभ राज्यवासियों को मिल सके, इसके लिए हर संभव कार्य शुरू किये गये है। केन्द्र और राज्य सरकार के बेहतर तालमेल से यह सब संभव हो रहा है। केन्द्र के सहयोग से राज्य में तीन महत्वपूर्ण संस्थानों की स्थापना होने जा रही है, जिनमें NIFT, Central Institute of Plastics Engineering & Technology (CIPET) and Hospitality University प्रमुख है। इसके साथ ही राज्य में एक आई.टी. पार्क की भी स्थापना केन्द्र सरकार के सहयोग से की जा रही है। केन्द्र सरकार ने देहरादून को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिये भी चुन लिया है।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र के कुशल नेतृत्व में वर्तमान सरकार आगे बढ रही है। आशा की जानी चाहिए कि जनता के विश्वास पर खरा उतरते हुए त्रिवेन्द्र सरकार विकास के नये आयाम स्थापित करेगी। उत्तराखण्ड को विकास के पथ पर अग्रसर करेगी। राज्य की मूलभूत समस्याओं का समाधान होगा और राज्य देश के अग्रणी राज्यों में शुमार होगा।

 

 

 

 

Leave a Comment