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एक करोड़ नौकरियों के पीएम मोदी के वादे का क्या हुआ?

एक करोड़ नौकरियों के पीएम मोदी के वादे का क्या हुआ?

साल 2013 में चुनाव प्रचार अभियान के दौरान नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उनकी पार्टी अगर सत्ता में आती है तो एक करोड़ नौकरियों के अवसर पैदा करेगी.

इसके एक साल बाद ही उनकी पार्टी दिल्ली की सत्ता पर भारी बहुमत से काबिज़ हो गई.

इसी साल जनवरी में भारत के आर्थिक सर्वे ने संकेत दिया था कि चीजें कुछ ठीक नहीं चल रही हैं और रोज़गार वृद्धि में सुस्ती है.

नई सरकार के आंकड़े दिखाते हैं कि बेरोज़गारी की दर 2013-14 में 4.9 प्रतिशत से बढ़कर 5 प्रतिशत हो गई है. लेकिन ये तस्वीर वास्तव में और भी चिंताजनक हो सकती है.

हाल ही में अर्थशास्त्री विनोज अब्राहम की एक स्टडी जारी की गई है, जिसमें लेबर ब्यूरो द्वारा इकट्ठा किए गए नौकरी के आंकड़ों को इस्तेमाल किया गया है.

अध्ययन में कहा गया है कि 2012 और 2016 के बीच भारत में रोज़गार वृद्धि में बेतहाशा कमी आई है. इस अध्ययन के अनुसार, सबसे चिंताजनक बात है कि 2013-14 और 2015-16 के बीच देश में मौजूदा रोज़गार में भी भारी कमी आई है. आज़ाद भारत में शायद पहली बार ऐसा हो रहा है. कृषि क्षेत्र में, जहां भारत की आधी आबादी रोजी रोज़गार के लिए इसी पर निर्भर है और बहुत सारे लोग ज़मीन के छोटे छोटे हिस्सों पर फसल उगा रहे हैं, नौकरियां ख़त्म हो रही हैं. इस पर भी सूखे और फसल की सही क़ीमत न मिल पाने से लोग खेती किसानी से दूर जा रहे हैं और निर्माण और ग्रामीण मैन्युफ़ैक्चरिंग में रोज़गार तलाश रहे हैं.

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