कैरेबियाई धरती पर जसप्रीत बुमराह का खौफ

21 से 25 अप्रैल 1976 किंग्सटन के सबीना पार्क मैदान पर वेस्टइंडीज-भारत के बीच खेला गया टेस्ट मैच। इस टेस्ट को बिशन सिंह बेदी की कप्तानी वाली टीम के सदस्य शायद ही कभी भूल सकेंगे। यह वो टेस्ट मैच था जब माइकल होल्डिंग, वैन डैनियल, बर्नाड जूलियन और वॉनबर्न होल्डर की तेज गेंदबाजों की चौकड़ी ने भारतीय बल्लेबाजों की जान आफत में डाल दी थी। इस मैच में तीन बल्लेबाज चोटिल हुए थे और पांच बल्लेबाज डर की वजह से दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने ही नहीं उतरे थे। अब 43 साल बाद उसी सबीना पार्क मैदान पर एक 25 वर्ष के युवा भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह के आगे कैरेबियाई बल्लेबाज नतमस्तक होने पर मजबूर हो गए। दूसरे टेस्ट में हैट्रिक लेने वाले बुमराह के प्रदर्शन से जरूर उस दौर के भारतीय बल्लेबाजों के दिलोदिमाग में बैठी कैरेबियाई तेज गेंदबाजों के खौफ की कहानी के दर्द को गर्व में तब्दील कर दिया होगा।

खौफ ने कराया आत्मसमर्पण : 1976 के उस टेस्ट की पहली पारी में कैरेबियाई तेज गेंदबाजों की चौकड़ी ने गुंडप्पा विश्वनाथ की अंगुली तोड़ी, ब्रजेश पटेल के मुंह पर गेंद मारी और अंशुमन गायकवाड़ को तो गेंद कान के पास लगी और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा था। नतीजा यह रहा कि दूसरी पारी में पांच विकेट 97 रन पर गंवाने के बाद बाकी के पांच बल्लेबाजों में से तीन चोटिल होने, जबकि दो खिलाड़ी डर की वजह से बल्लेबाजी करने नहीं आए और टीम इसी स्कोर पर ऑलआउट होकर 10 विकेट से मैच हार गई। उसी मैदान पर अब अजीबोगरीब एक्शन वाले बुमराह ने अपनी काबिलियत और गति से कैरेबियाई बल्लेबाजों को आइना दिखाया, तो विश्व का सबसे बड़ा बल्लेबाज (विराट कोहली) भी उन्हें ‘क्या कमाल का गेंदबाज है’ कहने से खुद को नहीं रोक पाया।

कैरेबियाई धरती पर बुमराह एक्सप्रेस : सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली जैसे बल्लेबाजों के दौर में पहली बार भारतीय क्रिकेट जसप्रीत बुमराह का दौर देख रहा है। वह दौर जिसमें बुमराह की रफ्तार और स्विंग दुनिया भर के बल्लेबाजों में उसके खौफ की कहानी बयां करती है। अहमदाबाद में जन्मे बुमराह पर 2013 में मुंबई इंडियंस की नजर पड़ी। यह बुमराह की खुशकिस्मती थी कि आइपीएल में सबसे बड़े दस्ते वाली टीम का वह हिस्सा बने। जहां सचिन तेंदुलकर, शेन बांड, लसिथ मलिंगा, जहीर खान जैसे दिग्गज थे। बुमराह के सफर को मलिंगा के साथ ने चमकाया। सटीक यॉर्कर उसमें से ही एक सबसे बड़ा हथियार थी। अममून चार-पांच कदम चलकर लगातार 140 से अधिक की गति से गेंद करना किसी के लिए भी मुमकिन नहीं होता, लेकिन बुमराह इसका सटीक उदाहरण बने।

पहले भरोसा जीता फिर दिल : बुमराह को 2016 में भारत की टी-20 टीम में जगह मिल गई। फिर वह वनडे टीम का भी हिस्सा बने। क्रिकेट के जानकार उन्हें टेस्ट क्रिकेट के लायक नहीं मानते थे, लेकिन बुमराह ने कप्तान और टीम का पहले भरोसा जीता और फिर अपने प्रदर्शन से सभी का दिल जीत लिया। बुमराह अच्छी तरह से जानते थे कि क्रिकेट के सबसे लंबे प्रारूप में उन्हें कुछ नया सीखना होगा और यह उन्होंने वेस्टइंडीज में आउट स्विंग सीखकर बता भी दिया। तभी तो डेढ़ वर्ष से भी कम के टेस्ट करियर में बुमराह ने दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और अब वेस्टइंडीज में पारी में पांच विकेट चटकाए और ऐसा करने वाले पहले एशियाई गेंदबाज बने। यानी बुमराह अब पहले एशियाई गेंदबाज बन गए हैं जिन्होंने अब तक जिस भी टीम के खिलाफ टेस्ट मैच खेले हैं सबके खिलाफ टेस्ट मैच की एक पारी में पांच विकेट लिए हैं।

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