Share
चीन को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल अपनी भाषा में समझाएंगे

चीन को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल अपनी भाषा में समझाएंगे

26 जुलाई के बीच तनाव कम होने की उम्मीद

चीन को अब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल अपनी भाषा में समझाएंगे। वो अन्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में हिस्सा लेंगे। जहां चीनी समकक्ष से उनकी मुलाकात होगी।
अजीत डोभाल की 26 जुलाई की यात्रा के बाद भारत और चीन के बीच तनाव कम होने की उम्मीद है। NSA डोवाल, ब्रिक्स-ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में हिस्सा लेंगे।

पाकिस्तान के आग्रह पर तीसरे देश की सेना कश्मीर में प्रवेश कर सकती है। ऐसा एक चीनी विचार समूह का मानना है। चीन के एक थिंक टैंक का तर्क है कि जिस तरह सिक्किम सेक्टर के डोकाला भारतीय सेना भूटान के कहने पर चीन को सड़क बनाने से रोक रही है, उसी तरह पाकिस्तान के कहने पर तीसरा देश कश्मीर में भी कार्रवाई कर सकता है। चाइना वेस्ट नार्मल यूनीवर्सिटी के सेंटर फॉर इंडियन स्टडीज के निदेशक लांग जिंगचून ने ग्लोबल टाइम्स में लिखे एक लेख में कहा है कि भारत को विवादास्पद क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। वह सिर्फ अपने क्षेत्रकी बात करे। अन्यथा इसी तर्क के आधार पर पाकिस्तानी सरकार के आग्रह पर एक तीसरी देश की सेना भारत और पाकिस्तान के बीच विवादित क्षेत्र में भी प्रवेश कर सकती है। ऐसा पहली बार है कि चीनी मीडिया में पाकिस्तान और कश्मीर को लेकर ऐसी बात कही गई है। लेख में कहा गया है कि भारतीय सेना ने डोकाला क्षेत्र में भूटान को मदद करने के नाम पर प्रवेश किया है। लेकिन सच्चाई है कि यहां भूटान को मदद के नाम पर घुसपैठ की गई है। लेख में कहा गया है कि भारत में हमेशा से दक्षिण एशियाई देशों में अंतरराष्ट्रीय समानता और एक दूसरे की सीमा में हस्तक्षेप नहीं करने की बात करता आया है।

भारतीय सेना चीन के आक्रामक रूख से बेपरवाह होकर भारत-चीन-भूटान के सीमा मिलन बिंदु के पास स्थित डोकलाम इलाके में लंबे समय तक बने रहने की तैयारी कर चुकी है। गौरतलब है कि चीन की तरफ से लगातार इस इलाके से भारतीय सैनिकों को वापस बुलाने की मांग की जा रही है। भारत में इस क्षेत्र को डोका ला नाम से बुलाता है, भूटान इसे डोकलाम कहता है, जबकि चीन इसे अपने डोंगलांग क्षेत्र का हिस्सा बताता है। विवादित इलाके में तैनात भारतीय सैनिक तंबू लगाकर रह रहे हैं, जो इस बात का संकेत है कि जब तक चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी वहां से अपने सैनिकों को वापस नहीं बुलाती, वे भी वहां से नहीं हटेंगे। सिक्किम में भारत-चीन सीमा के पास 10,000 फुट की उंचाई पर स्थित क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाएं मोर्चा संभाले हुई हैं। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक विादित स्थल पर मौजूद भारतीय सैनिकों को लगातार आपूतर्यिां की जा रही हैं, जो इस बात का संकेत है कि भारतीय सेना चीन के किसी भी तरह के दबाव में नहीं झुकेगी। हालांकि चीन पूरी आक्रामकता के साथ इस बात पर जोर दे रहा है कि वह ‘समझौते’ के लिए तैयार नहीं है और गेंद भारत के पाले में है।

Leave a Comment