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फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने किये भारत की आध्यात्मिक धरोहर के दर्शन

फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने किये भारत की आध्यात्मिक धरोहर के दर्शन

वाराणसी। भारत के दौरे पर आये फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने हिन्दुस्तान की कला और आध्यात्मिक धरोहर के दर्शन किये। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मेजबानी में मैक्रों ने देश की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में विख्यात आध्यात्मिक नगरी काशी स्थित गंगा नदी में नौका की सैर की। उनके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे।  नौका सैर के दौरान गंगा के अस्सी घाट पर पहुंचने पर पुष्पवर्षा करके मैक्रों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस दौरान शहनाई की धुन और ‘शुक्ल यजुवेन्द्र‘ मंत्रोच्चार वहां के माहौल को आध्यात्मिक रंग दे रहे थे। शंखनाद, डमरू की आवाज और ‘हर-हर महादेव‘ के उच्चारण के बीच फ्रांसीसी राष्ट्रपति को ‘पुष्पक विमान‘ के दर्शन कराये गये।

प्रधानमंत्री मोदी के साथ नाव की सैर के दौरान मैक्रों ने तुलसी घाट के सामने से गुजरते वक्त रामलीला का मंचन देखा और श्रीराम चरित मानस का पाठ सुना। प्रभु घाट और चेतसिंह घाट पर कलाकारों ने महात्मा बुद्ध द्वारा सारनाथ में पहला उपदेश दिये जाने की झांकी प्रस्तुत की। अखाड़ा श्री निरंजनी घाट पर ‘भस्म श्रृंगार‘ किये नागा साधु मौजूद थे। वहीं, मानसरोवर घाट पर संत कबीर के दोहों को आवाज दी जा रही थी। पाण्डेय घाट और चौसट्टी घाट पर बनारस घराने के कलाकारों ने कथक और शास्त्रीय संगीत का रस घोला। दशाश्वमेध घाट पर नौका सैर के समापन से पहले फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने लोक संगीत और नृत्य का आनन्द भी लिया।
दीन दयाल उपाध्याय ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर से लेकर गंगा के घाटों तक शिल्पकारों ने अपनी कला से मोदी और मैक्रों को लुभाया। फैसिलिटेशन सेंटर में मोदी और मैक्रों ने वस्त्र संग्रहालय में पूर्वी उत्तर प्रदेश के कलाकारों द्वारा लगायी गयी हथकरघा एवं हस्तशिल्प प्रदर्शनी को देखा। बाद में उन्होंने खुले सभाकक्ष में श्रीराम चरित मानस पर आधारित नाटिका ‘चित्रकूट‘ का आनन्द भी लिया। इस नाटिका में भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास के दौरान उनकी जिंदगी के बारे में बताया गया।
शहनाई की धुन के बीच दीन दयाल हस्तकला संकुल की सरजमीं पर कदम रखने वाले फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने सास्ंकृतिक रूप से समृद्ध वाराणसी नगर की धरोहर और यहां की कला को लेकर खासी दिलचस्पी दिखायी। इस दौरान उनके सामने विश्वविख्यात हस्तकला का जीवंत प्रदर्शन किया गया। प्रधानमंत्री मोदी मैक्रों को हस्तशिल्प की विभिन्न विधाओं के बारे में समझने में मदद की। इस दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति को बनारसी साड़ियां तैयार करने की विधि के बारे में भी बताया गया।
काशी के संकटमोचन मंदिर में मुख्य पुरोहित प्रोफेसर विशम्भर नाथ मिश्र के मार्गदर्शन में कलाकारों ने राम राज्याभिषेक का मंचन किया। तुलसी घाट पर मोदी और मैक्रों की 50 फुट लम्बी तस्वीर लगायी गयी और शहर में जगह-जगह पोस्टर लगाये गये। एफिल टावर और वाराणसी के घाटों की पृष्ठभूमि वाले इन पोस्टर में मोदी और मैक्रों की हाथ हिलाते हुए तस्वीर बनी थी।

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