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ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 में प्रस्तावित संशोधन ड्राफ्ट को बताया उपभोक्ता व कर्मचारी विरोधी, करेंगे कार्यबहिष्कार

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 में प्रस्तावित संशोधन ड्राफ्ट को बताया उपभोक्ता व कर्मचारी विरोधी, करेंगे कार्यबहिष्कार

देहरादून। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने केंद्र सरकार की ओर से इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 में प्रस्तावित संशोधन ड्राफ्ट को उपभोक्ता व कर्मचारी विरोधी बताया। फेडरेशन ने केंद्रीय विद्युत मंत्री को पत्र प्रेषित चेतावनी दी कि अगर बिल का संसद में पारित करने की एकतरफा कोशिश की गई तो वे आठ और नौ जनवरी को कार्यबहिष्कार आंदोलन का बिगुल फूंकेंगे।

पत्रकारों से वार्ता करते हुए फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन के जरिए केंद्र सरकार बिजली वितरण व आपूर्ति को अलग-अलग कर बिजली आपूर्ति के निजीकरण का मार्ग प्रशस्त करने जा रही है। बिल में ऐसे प्रावधान किए जा रहे हैं कि जिससे निजी कंपनियों को मुनाफा कमाने का मौका मिलेगा और आम लोगों के लिए बिजली महंगी होगी। साथ ही प्रस्तावित संशोधनों में विद्युत मामलों में राज्यों के अधिकार क्षेत्र में कटौती कर केंद्र सरकार का वर्चस्व बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि  इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 में उपभोक्ता से चरणबद्ध तर्क संगत तरीके से बिजली की लागत वसूले जाने का प्रावधान हैं, जबकि प्रस्तावित संशोधन में लिखा गया है कि उपभोक्ता से बिना किसी नुकसान के बिजली की पूरी लागत वसूली जाएगी।

बताया कि अभी टैरिफ तय करने में राज्य के नियामक आयोग केंद्र सरकार की टैरिफ पॉलिसी से मार्गदर्शन लेकर टैरिफ  तय करता है, लेकिन संशोधन के बाद राज्य के नियामक आयोग केंद्र की टैरिफ पॉलिसी को मानने के लिए बाध्य होंगे।

साथ ही प्रस्तावित संशोधन में तीन वर्ष में सब्सिडी पूरी तरह समाप्त करने की बात कही गई है। जिससे आम उपभोक्ता और किसानों पर बिजली दरों का बोझ बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि संशोधित बिल के अनुसार बिजली वितरण और विद्युत आपूर्ति के लाइसेंस अलग-अलग करने तथा एक ही क्षेत्र में कई विद्युत आपूर्ति कंपनियों बनाने का प्राविधान है।

इसके अनुसार सरकारी कंपनी को सबको बिजली देने की अनिवार्यता होगी। जबकि निजी कंपनियों पर ऐसा कोई बंधन नहीं होगा। इससे यह होगा कि निजी आपूर्ति कंपनियां मुनाफे वाले बड़े वाणिच्यिक और औद्योगिक घरानों को बिजली आपूर्ति करेंगी जबकि सरकारी क्षेत्र की बिजली आपूर्ति कंपनी निजी नलकूप, गरीबी रेखा से नीचे के उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति करने को विवश होगी।

उन्होंने कहा कि संशोधित बिल के विरोध में फेडरेशन आठ और नौ जनवरी को कार्य बहिष्कार करेगा अगर इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे देश में चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा।

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