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उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण की गैरसैंण में स्मार्ट टाउनशिप निर्माण को लेकर हुई बोर्ड बैठक

उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण की गैरसैंण में स्मार्ट टाउनशिप निर्माण को लेकर हुई बोर्ड बैठक

देहरादून: उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण (उडा) की बोर्ड बैठक में चमोली जिले के गैरसैंण में स्मार्ट टाउनशिप निर्माण को त्वरित कार्रवाई का निर्णय लिया गया। इसके लिए अपर सचिव आवास सुनील श्रीपांथरी की अध्यक्ष में तत्काल प्रभाव से समिति का गठन भी कर दिया गया।

बैठक में आवास एवं शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने टाउनशिप के लिए गैरसैंण में पशुपालन विभाग की विदेशी पशु प्रजनन परिक्षेत्र की 465.5 एकड़ भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज करने को कहा।

अधिकारियों ने बताया कि पशु प्रजनन परिक्षेत्र को नए स्थान सारकोट (भराड़ीसैंण) में स्थापित करने का निर्णय लिया जा रहा है। इसके लिए संबंधित भूमि को विकसित करने के लिए 15.31 करोड़ व 14.67 करोड़ रुपये के दो ले-आउट प्लान भी तैयार किए गए हैं।

काबीना मंत्री कौशिक ने टाउनशिप को विकसित करने के लिए जल्द उच्च स्तरीय बैठक करने के भी निर्देश दिए। क्योंकि तब तक इस भूमि का हस्तांतरण संभव नहीं, जब तक पशु प्रजनन केंद्र के लिए अन्य स्थान पर विकसित भूमि उपलब्ध नहीं करा दी जाती।

प्रजनन परिक्षेत्र के लिए सारकोट में भूमि की व्यवस्था के बाद गैरसैंण की भूमि उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण को निश्शुल्क प्रदान की जाएगी।

एकीकृत व्यवस्थाओं से लैस होगी टाउनशिप

सचिव आवास नीतेश झा के मुताबिक, गैरसैण में प्रस्तावित टाउनशिप एकीकृत व्यवस्थाओं से लैस होगी। इसके तहत ग्रीन बिल्डिंग को बढ़ावा दिया जाएगा और ऊर्जा के वैकल्पिक इंतजाम भी किए जाएंगे। इस टाउनशिप में वह सभी इंतजाम किए जाएंगे, जो किसी स्मार्ट सिटी में होते हैं।

लक्ष्य 62 हजार आवास, तस्वीर पांच हजार पर साफ

उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण (उडा) की 10वीं बोर्ड बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना पर विशेष फोकस किया गया। आवास एवं शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने दुर्बल आय वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के आवासों की प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 तक सभी विकास प्राधिकरणों को 62 हजार आवास बनाने हैं, जबकि अभी तक 5134 आवासों का प्रस्ताव ही प्राप्त हो पाया है। यह प्रस्ताव भी सिर्फ मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए), हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण व उत्तराखंड आवास नीति के तहत ही प्राप्त हो पाए हैं।

काबीना मंत्री कौशिक ने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में कम से कम 38 हजार 598 आवासों के प्रस्ताव प्राप्त हो जाने चाहिए। अभी तक जो प्रस्ताव आए भी हैं, वह प्राधिकरणों की ओर से ईडब्ल्यूएस आवासों के हैं। प्राधिकरणों से योजना के तहत स्वयं भवन निर्माण व निजी निर्माणकर्ता की सहभागिता वाले प्रस्ताव आए ही नहीं हैं।

बोर्ड बैठक में इस बात पर भी चिंता जाहिर की गई कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सभी श्रेणी में राज्य सरकार को एक लाख आवासीय इकाइयों का सृजन करना है। इसके लिए सभी जिलाधिकारियों को लैंड बैंक उपलब्ध कराने के निर्देश भी जारी किए गए।

निर्देश दिए गए कि लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत लोगों के माध्यम से भूमि का प्रबंध किया जाए। हालांकि, भूमि क्रय करने से पहले उडा से अनुमति प्राप्त करने को भी कहा गया।

बैठक में सचिव आवास नीतेश झा, अपर सचिव सुनील श्रीपांथरी, उडा के संयुक्त मुख्य प्रशासक बंशीधर तिवारी, मुख्य नगर नियोजक एसके पंत, मुख्य अभियंता एनएस रावत, अधिशासी अभियंता बीएस नेगी, दीपिक नेगी आदि उपस्थित रहे।

ईडब्ल्यूएस आवास बनाने का लक्ष्य

एमडीडीए 15 हजार, साडा 10 हजार, हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण 10 हजार, हल्द्वानी-काठगोदाम जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण 10 हजार, रुद्रपुर 08 हजार, काशीपुर 03 हजार, किच्छा 02 हजार, बाजपुर 02 हजार, रामनगर 02 हजार।

सैटेलाइट की मदद से बनेंगे मास्टर प्लान के नक्शे

बोर्ड बैठक में तय किया गया कि जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों के मास्टर प्लान के नक्शे बनाने में सैटेलाइट की मदद ली जाएगी। इसके लिए उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) से मदद मांगी गई। केंद्र के निदेशक एमपीएस बिष्ट ने कहा कि वह इस काम में हरसंभव मदद प्रदान करेंगे।

बैठक में विकास प्राधिकरणों के मास्टर प्लान बनाने की प्रगति की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि इस काम के लिए अलग-अलग चरण में 31 फर्मों को इंपैनलमेंट किया गया है। वहीं, बैठक में वर्ष 2018-19 के लिए करीब 101 करोड़ रुपये की आय के सापेक्ष 52.95 करोड़ रुपये के व्यय का बजट भी पास किया गया। साथ ही कई अन्य प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई।

नैनीताल के जोन एक-दो से शिफ्ट होंगे परिवार

भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआइ) की वर्ष 1998 की रिपोर्ट पर अब जाकर मुहर लग पाएगी। जीएसआइ ने भूस्खलन के लिहाज से नैनीताल क्षेत्र की जोनिंग की थी और शहर को चार जोन में बांटकर पहले व दूसरे जोन को भूस्खलन के लिहाज से 80 फीसद तक संवेदनशील बताया था।

हालांकि, लंबे समय तक अधिकारी लापरवाह बने रहे और वर्ष 2013 में हाईकोर्ट के आदेश पर लोगों को विस्थापित करने की कवायद शुरू की गई। इस बीच कोर्ट ने नैनीताल क्षेत्र में पांच किलोमीटर की परिधि में निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी।

बोर्ड बैठक में जब यह मसला रखा गया तो बताया गया कि हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिल गया है। लिहाजा, खुर्पाताल में प्रस्तावित 960 आवासों के निर्माण की कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सकता है। क्योंकि जब पांच किलोमीटर की परिधि पर रोक लगाई गई तो यह परियोजना भी इसकी जद में आ गई थी। तब इस पर की जा रही कार्रवाई को रोक दिया गया था।

अब सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिल जाने के बाद तय किया गया कि निर्माण की पत्रावली नैनीताल झील विकास प्राधिकरण से मंगाकर उस पर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी जाए।

नैनीताल में भूस्खलन की संवेदनशीलता

जोन एक, 80 फीसद व अधिक

जोन दो, 50 से 80 फीसद

जोन तीन, 20 से 50 फीसद

जोन चार, 20 फीसद तक

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