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एनएच- 74 मुआवजा घोटाले में करोड़ों का मुआवजा लेने वाले 35 किसानों के खिलाफ दाखिल होगी चार्जशीट

एनएच- 74 मुआवजा घोटाले में करोड़ों का मुआवजा लेने वाले 35 किसानों के खिलाफ दाखिल होगी चार्जशीट

रुद्रपुर: एनएच- 74 मुआवजा घोटाले की जांच कर रही एसआइटी फाइनल तीसरी चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में जुट गई है। एसआइटी के मुताबिक चार्जशीट बैक डेट पर करोड़ों का मुआवजा लेने वाले 35 किसानों के खिलाफ दाखिल होगी, जबकि चार किसान सरकारी गवाह बन गए हैं।

एनएच मुआवजा घोटाले की जांच एसआइटी बीते 16 माह से अधिक समय से कर रही है। इस बीच एसआइटी ने 211 करोड़ रुपये घोटाले की पुष्टि कर पांच पीसीएस अधिकारी समेत 22 अधिकारी, कर्मचारी, किसान, बिल्डर्स को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। साथ ही चार पीसीएस अधिकारी समेत 20 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।

अब करोड़ों रुपये का मुआवजा लेने वाले 35 किसानों के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी है। एसआइटी अधिकारियों के मुताबिक एक सप्ताह के भीतर 35 किसान और दो अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी। दो किसानों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

दूसरी ओर बैक डेट पर मुआवजा लेने वाले कुछ किसानों ने मुआवजा लौटाने की पेशकश की थी। ऐसे में एसआइटी मुआवजा लौटाने वाले इन किसानों पर चार्जशीट दाखिल करने से पहले विधिक राय लेगी।

अफसरों के खेल में फंसे 72 भू-स्वामी

एनएच मुआवजा घोटाले में एसएलएओ और एनएचएआइ के अफसरों की मिलीभगत से बड़ा खेल हुआ। 72 से अधिक मामलों में भूमि अकृषक होने के बाद भी उन्हें 3ए और 3डी में कृषि दिखा दिया गया, बाद में सेङ्क्षटग कर बिना आर्बिट्रेशन आदेश के ही उन्हें अकृषि का मुआवजा दिया गया।

इसका खुलासा होने के बाद एसआइटी ने डीएम यूएसनगर को पत्र भेज 72 लोगों से मुआवजा वसूली को पत्र भेजा है। एनएच-74 निर्माण के दौरान जद में आए लोगों को अधिकारियों से मिलीभगत कर करोड़ों का अतिरिक्त मुआवजा ले लिया। जबकि एनएच की जद में आए 72 से अधिक ऐसे मामले भी थे, जहां पहले से ही उद्योग, दुकान, मकान समेत अन्य प्रतिष्ठान थे।

ऐसे में उन्हें भी अकृषक दर से मुआवजा मिलना था। जांच में इसका खुलासा होने के बाद अब एसआइटी ने 72 भूस्वामियों से मुआवजा वसूली की तैयारी की है। इसके लिए एसआइटी ने डीएम यूएसनगर को वसूली के लिए पत्राचार किया है।

जांच में फंसे तीन तत्कालीन पीडी

एनएच मुआवजा घोटाले की जांच में तीन तत्कालीन पीडी फंस गए हैं। इसके लिए एसआइटी तीन तत्कालीन पीडी और एक एपीडी के खिलाफ एनएच मुख्यालय को 600 से अधिक पन्नों की जांच रिपोर्ट भी सौंप चुकी है। एसआइटी सूत्रों के मुताबिक एनएच मुख्यालय अब सौंपे गए दस्तावेजों का अध्ययन कर विभागीय विजिलेंस से जांच करा सकता है। इसके बाद एनएच मुख्यालय एसआइटी को आगे की कार्रवाई के लिए निर्देश दे सकता है।

केंद्र के लिए रिलीव होंगे आइपीएस सदानंद दाते

ऊधमसिंह नगर में एनएच-74 घोटाले की एसआइटी जांच का नेतृत्व कर रहे एसएसपी ऊधमसिंह नगर सदानंद शंकरराव दाते इसी सप्ताह केंद्र के लिए रिलीव हो सकते हैं। उन्होंने हाल ही में इस हाईप्रोफाइल मामले में दो आइएएस अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए रिपोर्ट शासन को भेजी थी, जिस पर सरकार ने दोनों अधिकारियों का जवाब-तलब किया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी दाते को जल्द केंद्र के लिए रिलीव किए जाने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि दो तीन दिन में फाइनल रिपोर्ट मिलने के बाद उन्हें केंद्र भेजा जाएगा।

एसएसपी ऊधमसिंह नगर सदानंद दाते 2007 बैच के आइपीएस अधिकारी हैं। वे हरिद्वार व देहरादून जिले में भी एसएसपी का दायित्व निर्वहन कर चुके हैं। बीते वर्ष उन्हें ऊधमसिंह नगर का एसएसपी बनाकर भेजा गया था। एनएच-74 मुआवजा घोटाले के लिए सरकार द्वारा गठित एसआइटी का नेतृत्व भी दाते ही कर रहे थे। उनकी जांच के बाद ही कई और सरकारी कर्मचारियों पर सरकार ने शिकंजा कसा था।

कुछ समय पहले ही उन्होंने जिलाधिकारी के रूप में ऊधमसिंह नगर में तैनात रहे आइएएस अधिकारी पंकज कुमार पांडेय और चंद्रेश यादव की आर्बिटे्रटर के रूप में उनकी भूमिका पर सवाल उठाए थे। इससे सियासी गलियारों में खासी हलचल मच गई थी।

सरकार ने मांगा था तीन माह का समय

दरअसल, केंद्र सरकारी सीबीआइ में प्रतिनियुक्ति के लिए सदानंद दाते को रिलीव करने के लिए तीन माह पूर्व प्रदेश सरकार को पत्र लिख चुकी थी, लेकिन तब एसआइटी जांच का हवाला देते हुए प्रदेश सरकार ने तीन माह का समय मांगा था।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में इस बात को स्वीकारा। उनका कहना है कि केंद्र ने जब पहले आइपीएस सदानंद दाते को रिलीव करने को कहा था, तब तीन माह का समय मांगा गया था। अब जांच तकरीबन पूरी हो चुकी है। इसलिए अंतिम जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कुछ दिनों में उन्हें रिलीव कर दिया जाएगा।

आइएएस अधिकारी की भूमिका की नहीं कर पाएंगे जांच 

एसएसपी सदानंद दाते ने इस मामले को बेहद करीब से देखा है। वे इस मामले की जांच लगभग पूरी कर चुके हैं। हालांकि, इस मामले में जिन दो आइएएस अधिकारियों पर उन्होंने सवाल उठाए थे, वे उनके जवाब नहीं देख सकेंगे।

दरअसल, सूत्रों की मानें तो मामले की 95 फीसद जांच पूरी हो चुकी है। अब जांच केवल राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) की भूमिका की रह गई थी। दाते इस मामले में भी आगे बढ़ रहे थे। इस बीच अब उन्हें केंद्र को रिलीव किया जा रहा है।

टाईमिंग पर उठ रहे सवाल

राष्ट्रीय राजमार्ग मुआवजा घोटाले से परत दर परत पर्दा उठाने वाले एसएसपी उधमसिंह नगर सदानंद दाते भले ही नियत प्रक्रिया के तहत केंद्र के लिए रिलीव हो रहे हैं लेकिन इस टाईमिंग पर  सवाल उठ रहे हैं। माना यह जा रहा है कि लंबे अरसे बाद कोई आइपीएस अधिकारी भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आइएएस अधिकारियों पर सवाल उठाने की हिम्मत दिखा पाया था।

इसके लिए उन पर काफी दबाव भी पड़ा, बावजूद इसके उन्होंने अपनी रिपोर्ट में इन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए। सवाल यह उठ रहे हैं कि अब सदानंद दाते के रिलीव होने के बाद जो नया अधिकारी आएगा, क्या वह बिना दबाव में आए जांच को आगे बढ़ा सकेगा।

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