मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनुराधा गर्ग को बर्खास्त कर दिया है

भ्रष्‍टाचार में उत्‍तराखंड में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनुराधा गर्ग को किया बर्खास्त
हाईकोर्ट की संस्तुति व राज्यपाल की मंजूरी के बाद शासन ने भ्रष्‍टाचार के गंभीर आरोप जांच में सही पाए जाने पर निलंबित अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को बर्खास्त कर दिया है।

नैनीताल, हाई कोर्ट की संस्तुति व राज्यपाल की मंजूरी के बाद कार्मिक विभाग ने ऊधमसिंह नगर जिले की काशीपुर की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनुराधा गर्ग को बर्खास्त कर दिया है। 2008 की न्यायिक सेवा की अफसर अनुराधा को 2015 में हाई कोर्ट ने निलंबित कर दिया था।

राज्य बनने के 19 साल के भीतर किसी न्यायिक अफसर को बर्खास्त किया गया है। इस कार्रवाई से राज्य की न्यायिक बिरादरी में खलबली मची है। भ्रष्टाचार की शिकायत पर 2015 में हाई कोर्ट के तत्कालीन रजिस्ट्रार विजिलेंस नरेंद्र दत्त द्वारा प्रारंभिक जांच की गई थी, जांच में प्रथम दृष्टïया आरोप सही पाए जाने पर अनुराधा को निलंबित किया गया था। हाई कोर्ट ने आरोपों की जांच वर्तमान में हरिद्वार के जिला एवं सत्र न्यायाधीश विवेक भारती को सौंपी थी। जांच में आरोपों की पुष्टि के बाद हाई कोर्ट की ओर से राज्यपाल को एसीजेएम की बर्खास्तगी की संस्तुति भेजी गई थी।

राज्यपाल की मंजूरी के बाद दो दिन पहले मंगलवार को कार्मिक विभाग की प्रमुख सचिव व अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की ओर से निलंबित एसीजेएम को बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया। हाई कोर्ट के उच्चपदस्थ सूत्रों ने बर्खास्तगी आदेश पहुंचने की पुष्टि की है।

15-20 लाख आय के स्रोत का नहीं लगा पता
2015 में काशीपुर की एसीजेएम द्वारा देहरादून में 15-20 लाख की जमीन का सौदा किया तो इसके लिए हाई कोर्ट से अनुमति मांगी। हाई कोर्ट ने अनाम स्रोतों की इस आय का स्रोत पूछा तो उनके द्वारा जमीन मां के नाम पर खरीदने की जानकारी दी गई थी। तत्कालीन रजिस्ट्रार विजिलेंस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच पड़ताल में इस आय के स्रोत का पता नही सका। यहां उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट की ओर से राज्य बनने के बाद अब तक अलग-अलग वजहों से चार न्यायिक अफसरों पर कार्रवाई की गई है।

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