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राइफल्स के सैनिकों, पूर्व सैनिकों व शहीदों के बच्चों को अब राजधानी देहरादून में मिलेगी हॉस्टल की सुविधा

राइफल्स के सैनिकों, पूर्व सैनिकों व शहीदों के बच्चों को अब राजधानी देहरादून में मिलेगी हॉस्टल की सुविधा

देहरादून: गढ़वाल राइफल्स के सैनिकों, पूर्व सैनिकों व शहीदों के बच्चों को अब राजधानी देहरादून में हॉस्टल की सुविधा मिलेगी। सहस्त्रधारा रोड स्थित डांडा लखौंड में 4.18 एकड भूमि पर गढ़वाल राइफल्स वॉर मेमोरियल ब्वायज एंड गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण किया गया है। जिसका शुभारंभ आज मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया। थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत व उप सेना प्रमुख ले जनरल शरत चंद भी कार्यक्रम में मौजूद रहें।

सितंबर 2011 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी ने यहां पर हॉस्टल का शिलान्यास किया था। लेकिन आर्थिक संसाधन जुटाने में ही लंबा वक्त गुजर गया। आखिरकार छात्रावास का निर्माण अब पूरा हो गया है। इस काम में राज्य सरकार के स्तर से न केवल निश्शुल्क भूमि उपलब्ध कराई गई बल्कि ढाई करोड रुपये की आर्थिक मदद भी सरकार ने दी।

हॉस्टल में 125 छात्र व 125 छात्राओं के रहने की व्यवस्था होगी। बता दें कि गढ़वाल रेजीमेंटल सेंटर लैंसडौन में वर्ष 1980 से ही सेवारत, सेवानिवृत्त जवानों व शहीद सैनिकों के बच्चों के लिए हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध है। लेकिन समय के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र का परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है। लैंसडौन में उस मुताबिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

लिहाजा एजुकेशनल हब की पहचान रखने वाले देहरादून में सैनिकों के बच्चों के लिए नया हॉस्टल बनाया गया है। ताकि वह उचित वातावरण में बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सके। कॅरियर के लिहाज से भी यहां उनका अच्छा मार्गदर्शन हो सकेगा। यहां स्कूल जाने आने के लिये बस की व्यवस्था,छात्रावास के अंदर ही चिकित्सीय सुविधा, पुस्तकालय, कम्प्यूटर लैब, ट्यूशन की सुविधा, प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग, करियर काउंसिलिंग आदि की व्यवस्था है।

हास्टल का अनुमानित शुल्क 88,800 से 95,400 रुपये सलाना तय किया गया है। यह सुविधा कक्षा पांच से बारह के छात्र छात्राओं के लिये होगी। छात्रों की शिक्षा के लिये आर्मी पब्लिक स्कूल क्लेमेनटाउन व केवि एफआरआइ के साथ समझौते को अंतिम रूप दिया जा रहा है।साथ ही अन्य प्रतिष्ठित स्कूलों से भी संपर्क किया गया है।

अपना संबोधन देते भावुक हुए उप सेना प्रमुख ले जनरल शरत चंद

उन्होंने कहा कि सात साल पहले सेंट्रल कमांडेंट रहते मैंने यह सपना देखा था। ढाई माह बाद रिटायर हो रहा हूं। इस हास्टल के द्वारा देवभूमि से मेरा हमेशा रिश्ता बना रहेगा। उन्होंने बताया कि हास्टल निर्माण के अलावा तीन करोड़ से ऊपर का कारपस फंड भी बनाया है। हास्टल निर्माण में न केवल सेवारत, बल्कि सेवानिवृत्त सैनिकों ने भी दिल खोलकर सहयोग दिया। गढवाल की सभी 26 बटालियन ने 3-3 लाख की मदद दी। इसके अलावा 10 लाख गढ़वाल रेजिमेंटल सेंटर ने दिये हैं। रिटायर्ड मेजर श्रीकांत ने 15 लाख और छह वेटरन ने एक-एक लाख रुपये दिए। उन्होंने बताया कि गढ़वाल रेजिमेंट के सभी सेवारत अफसर कारपस फंड में दस दस हजार रुपये देंगे।

विषम भौगोलिक पारिस्थिति वाले क्षेत्रों में भी  खोले जाएंगे ऐसे हास्टल

जनरल बिपिन रावत ने कहा कि चैत्र नवरात्र का आज पहला दिन है। नवरात्र के पहले दिन हास्टल का लोकार्पण एक शुभ प्रतीक के रूप में देखा जाना चाहिये। दूरस्थ क्षेत्र के छात्र यहां से मार्गदर्शन पाकर न केवल सेना बल्कि अन्य क्षेत्र में भी मुकाम हासिल करेंगे। उन्होंने कहा कि हिमाचल, अरुणाचल, नागालैंड, मणिपुर समेत विषम भौगोलिक पारिस्थिति वाले क्षेत्रों में भी ऐसे हास्टल खोले जाएंगे। सेना प्रमुख ने उप सेना प्रमुख को इस कार्य के लिये विशेष बधाई दी।

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