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लोकसभा चुनाव के लिए दमदार प्रत्याशियों की तलाश में जुटी कांग्रेस

लोकसभा चुनाव के लिए दमदार प्रत्याशियों की तलाश में जुटी कांग्रेस

देहरादून। कभी कद्दावर नेताओं की भरमार वाली कांग्रेस अब प्रदेश में लोकसभा चुनाव के लिए दमदार प्रत्याशियों की तलाश में है। लोकसभा की पांच सीटों में कुछ गिने-चुने नाम छोड़ दिए जाएं तो पार्टी को एक-एक संसदीय क्षेत्र के 14-14 विधानसभा क्षेत्रों तक प्रभाव रखने वाले चेहरों की कमी से जूझना पड़ रहा है। इससे हाईकमान के माथे पर भी बल पड़े हैं।

प्रतिष्ठा का सबब बने अगले आम चुनाव में मजबूत प्रत्याशियों को लेकर नई दिल्ली में मंथन शुरू हो गया है। ऐसे में नई दिल्ली का रुख भांपकर वरिष्ठ नेता कुछ लोकसभा सीटों पर दावेदारी के लिए नाम आगे बढ़ाने में जुट गए हैं। अलग उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से ही कांग्रेस में लोकसभा चुनाव के लिए दमखम रखने वाले प्रत्याशियों के बीच काफी पहले से ही जोर-आजमाइश का दौर शुरू होता रहा है।

इस वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव में हालात कुछ बदले हुए हैं। वर्ष 2016 में पार्टी में हुई बगावत और टूट के बाद कई दिग्गज नेता भाजपा का दामन थाम चुके हैं। इन दिग्गज नेताओं के जाने की भरपाई पार्टी में अब तक नहीं हो पाई है।

पार्टी में इस रिक्ति को शिद्दत से महसूस भी किया जा रहा है। वर्ष 2014 में उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटों से हाथ धो चुकी कांग्रेस अगले लोकसभा चुनाव में हालात बदलने को हाथ-पांव मार रही है। कांग्रेस इस चुनाव को अपने अस्तित्व के लिए अहम मानकर चल रही है।

इस वजह से लोकसभा सीटों पर प्रत्याशियों की खोजबीन भी शुरू हो गई है। राज्य बनने के बाद यह पहला मौका भी है जब पांच में से एक भी संसदीय सीट पर मजबूत संभावित दावेदारों के चेहरे भी साफ नहीं हो पा रहे हैं।

नैनीताल संसदीय सीट पर पूर्व सांसद केसी सिंह बाबा खुद चुनाव लड़ने से इन्कार कर पूर्व सांसद महेंद्र पाल का नाम आगे बढ़ा चुके हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री व पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत को भी इस सीट पर दावेदार माना जा रहा है। इस सीट पर नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश समेत अन्य नामों की भी चर्चा है, लेकिन अभी सार्वजनिक रूप से उनकी दावेदारी सामने नहीं आई है।

अल्मोड़ा सुरक्षित सीट पर प्रबल दावेदार राज्यसभा सदस्य प्रदीप टम्टा हैं, लेकिन उनकी दावेदारी को लेकर पेच बताया जा रहा है। टम्टा का राज्यसभा का कार्यकाल 2021 तक है। चुनाव जीतने की स्थिति में उन्हें राज्यसभा से इस्तीफा देना होगा। इस्तीफा देने के बाद यह सीट कांग्रेस के खाते में नहीं जाना तय है।

सूत्रों के मुताबिक पार्टी इस स्थिति के लिए कारगर फार्मूला ढूंढ रही है। गढ़वाल सीट पर भी अभी तक कुछ पूर्व मंत्रियों पर ही पार्टी की नजरें ठहर रही हैं। अलबत्ता, टिहरी लोकसभा सीट पर दावेदारी को लेकर कांग्रेस में अभी से खींचतान दिखने लगी है। पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट ने इस सीट के लिए अपने दावेदारी जता दी है।

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय इस सीट पर अपनी स्वाभाविक दावेदारी मानते हैं। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष व इस संसदीय क्षेत्र की चकराता सीट से पांच बार के विधायक प्रीतम सिंह भी स्वाभाविक दावेदारों में शुमार हैं। हालांकि, उनकी ओर से अभी तक दावेदारी जताई नहीं गई है।

माना जा रहा है कि वह किसी और चेहरे पर ही दांव खेलना ज्यादा पंसद कर सकते हैं। हरिद्वार संसदीय सीट पर इस सीट से सांसद रह चुके पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की दावेदारी की चर्चा है। रावत की दावेदारी हरिद्वार और नैनीताल दोनों सीटों पर बताई जा रही है। हरीश रावत को छोड़कर पार्टी प्रदेशव्यापी नामचीन चेहरे के संकट से जूझ रही है।

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