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निगम प्रशासन ने की ‘जैसा इलाका, वैसा टैक्स’ की व्यवस्था लागू करने की तैयारी

निगम प्रशासन ने की ‘जैसा इलाका, वैसा टैक्स’ की व्यवस्था लागू करने की तैयारी

देहरादून: देहरादून नगर निगम क्षेत्र में हाउस टैक्स की दरों में वृद्धि को लेकर पिछले एक माह से चल रहा घमासान अब रुकने के आसार हैं। अभी तक यह प्रस्ताव था कि निगम सीधे 40 फीसद की बढ़ोत्तरी करेगा, लेकिन आपत्तियों की लंबी लिस्ट व भारी जन-विरोध देखते हुए निगम प्रशासन ने ‘जैसा इलाका, वैसा टैक्स’ की व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर ली है। जो लोग पॉश इलाकों में रहते हैं, वहां हाउस टैक्स की दरें ज्यादा होंगी और जहां कम सुविधा है, वहां टैक्स की दरों में कम वृद्धि होगी।

नगर आयुक्त विजय कुमार जोगदंडे ने कहा कि इसमें उन लोगों की शिकायतें खत्म हो जाएंगी, जिन्हें वार्ड की तय दर के हिसाब से टैक्स देना पड़ता था। नगर निगम अधिनियम के मुताबिक, निगम प्रशासन को हर दो साल में हाउस टैक्स का दोबारा से निर्धारण करना होता है।

चूंकि, नई दरें वर्ष 2014 में लागू की गई थी, लिहाजा निगम को वर्ष 2016 में नई दरें लागू करनी थी। लेकिन, महापौर ने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए दो साल के लिए पुरानी दरों को ही लागू कर दिया। अब चार साल बाद नई दरें लागू करने की कसरत चल रही है।

निगम ने वर्ष 2014 में जो दरें लागू की थीं, उसमें काफी त्रुटि थी और हर वार्ड की दरें अलग थीं। व्यवस्था में उन मोहल्ले वालों को दिक्कत हो रही थी, जिनके बगल में पॉश इलाका है। उन्हें पॉश इलाके के बराबर टैक्स देना पड़ा था। यानी, जहां सुविधाएं पूरी हैं वहां भी टैक्स वैसा ही जहां सुविधाएं नहीं। लोगों ने नगर निगम में आक्रोश भी जताया।

कुछ इलाकों का टैक्स संशोधन प्रस्ताव शासन को भेजा गया, लेकिन फैसला नहीं हो पाया। पुरानी टैक्स प्रणाली में एक दिक्कत ये भी थी कि इलाका एक जैसा है लेकिन सड़क के एक तरफ दूसरा वार्ड है तो दूसरी तरफ दूसरा। इस स्थिति में भी लोगों को अलग-अलग टैक्स देना पड़ रहा था। इन परेशानियों को दूर करने के लिए अब निगम ने मोहल्ले व इलाके के हिसाब से ही टैक्स प्रणाली लागू करने का फैसला किया है।

1.30 लाख भवनों पर नया टैक्स

वर्ष 2014 में जब नगर निगम ने नया टैक्स लागू किया था, उस समय 1.25 लाख भवनों का आंकलन किया गया था, लेकिन अब निगम को 1.30 लाख भवनों का अनुमान है। हालांकि, यह टैक्स साठ वार्डों पर ही लागू होगा।

नए इलाकों में टैक्स माफी 

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद निगम में शामिल नए इलाकों को अगले दस साल तक टैक्स माफी का प्रस्ताव निगम बोर्ड भी मंजूर कर चुका है। इन इलाकों पर टैक्स में वृद्धि का कोई असर नहीं पड़ेगा।

भवनों की होगी जीआइएस मैपिंग

शहरी क्षेत्र में हाउस टैक्स में भवनों के सटीक आंकलन के लिए निगम प्रशासन ने जीआइएस मैपिंग को मंजूरी दी गई। नगर आयुक्त ने बताया कि सैटेलाइट मैपिंग की वजह से मानव-शक्ति का कम प्रयोग होगा और टैक्स में वृद्धि होगी।

ऑनलाइन टैक्स भुगतान प्रणाली भी जल्द लागू की जाएगी। जीआइएस मैपिंग से निगम को ऐसे भवनों का पता भी चलेगा जहां हाउस टैक्स नहीं मिल रहा, साथ ही उनकी सूचना भी मिल जाएगी जो लोग सेल्फ असेसमेंट में चोरी करते हैं। कईं लोग भवन के असेसमेंट में तथ्य छुपा लेते हैं।

जैसे ये लोग भवन के बहुमंजिल होने व ज्यादा निर्माण को सेल्फ असेसमेंट में नहीं दर्शाते, मगर जीआइएस मैपिंग में यह पकड़ में आ जाएगा। निगम ऐसे लोगों पर जुर्माना भी लगाएगा।

35 करोड़ रुपये लक्ष्य

वित्तीय वर्ष 2017-18 में निगम ने टैक्स के रूप में 18.38 करोड़ रुपये की वसूली की, जो अब तक की रिकार्ड वसूली बताई जा रही। बीते वर्ष 12.55 करोड़ रुपये की वसूली की गई थी। बीते वर्ष यह लक्ष्य 25 करोड़ रखा गया था। आगामी वित्तीय वर्ष में यह लक्ष्य 35 करोड़ रुपये रखा गया है।

पांच मीटर से कम सड़क पर छूट

टैक्स कमेटी ने पांच मीटर से कम चौड़ी सड़क पर टैक्स में बीस फीसद की छूट देने की सिफारिश की है। इसके साथ ही पांच मीटर से 20 मीटर चौड़ी सड़क पर टैक्स में छूट का प्रावधान खत्म करने की सिफारिश की गई है।

हाउस टैक्स में बढ़ोत्तरी के विरुद्ध नगर निगम में प्रदर्शन

नगर निगम में हाउस टैक्स में प्रस्तावित वृद्धि के विरुद्ध शुक्रवार को लोगों ने निगम परिसर में प्रदर्शन कर नारेबाजी की। नगर आयुक्त से मुलाकात कर आपत्तियां दर्ज कराईं और चेतावनी दी कि अगर टैक्स में मनमाफिक वृद्धि की गई तो सड़क पर आंदोलन किया जाएगा।

विभिन्न राजनीतिक दलों व सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों सहित शहरवासियों ने नगर निगम में पहुंच टैक्स वृद्धि की खिलाफत की। इसमें आमजन का सर्वाधिक विरोध खाली प्लाट पर लगाए जा रहे टैक्स और उसमें 40 फीसद की वृद्धि पर है। सामाजिक संगठनों ने टैक्स में वृद्धि का फैसला स्थगित करने की मांग की और कहा कि जब तक निगम पूरी तरह सुविधा नहीं दे देता, तब तक टैक्स में वृद्धि न की जाए।

यह भी कहा गया कि नए टैक्स पर फैसला आगामी चुनाव के बाद नए बोर्ड पर छोड़ देना चाहिए। इस दौरान अतिक्रमण विरोधी अभियान में भेदभाव के आरोप भी लगाए गए। लोगों ने आयुक्त से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन दिया।

इस दौरान जगमोहन मेंदीरत्ता, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से समर भंडारी, ईश्वर पाल, जनसेवा पार्टी के राष्ट्रीय अध्य्क्ष जगराम, उपाध्यक्ष वीरेंद्र सैनी, आप से उमा सिसोदिया और उक्रांद से शांति प्रसाद भट्ट समेत जनसंघर्ष मोर्चा से प्रदीप कुकरेती, हम से रणवीर चौधरी, शिव सेना से अमित व शशी आदि मौजूद रहे।

टैक्स वृद्धि के विरुद्ध 356 आपत्तियां

नगर निगम में प्रस्तावित टैक्स वृद्धि के विरुद्ध कुल 356 आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि शुक्रवार थी। आपत्तियों पर सुनवाई होगी और उसके बाद टैक्स की दरें तय होंगी। माना जा रहा कि सिंतबर के दूसरे हफ्ते से नई दरें लागू हो जाएंगी।

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