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दून मेडिकल कॉलेज के ओपीडी ब्लॉक के निर्माण में बिना काम किए ही करीब 9.93 करोड़ रुपये का हुआ भुगतान

दून मेडिकल कॉलेज के ओपीडी ब्लॉक के निर्माण में बिना काम किए ही करीब 9.93 करोड़ रुपये का हुआ भुगतान

देहरादून। दून मेडिकल कॉलेज के ओपीडी ब्लॉक के निर्माण में गंभीर वित्तीय अनियमितता सामने आई है। प्रथमदृष्टया यह पाया गया है कि अधिकारियों ने बिना काम के ही करीब 9.93 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। इस मामले में कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम के प्रबंध निदेशक राजन मित्तल ने प्रारंभिक पड़ताल के बाद पांच कार्मिकों को गोलमाल का जवाबदेह पाते हुए इसकी जांच शुरू करा दी है।

राजकीय निर्माण निगम की रुड़की इकाई ओपीडी ब्लॉक का निर्माण करा रही है। करीब 45.53 करोड़ रुपये के इस काम में यह पाया गया है कि 9.93 करोड़ रुपये का जो काम धरातल पर हुआ ही नहीं है, उसे माप पुस्तिका में दर्शाकर भुगतान कर दिया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए निगम के प्रबंध निदेशक राजन मित्तल ने निगम के बरेली अंचल के महाप्रबंधक को जांच अधिकारी नामित किया है। साथ ही देहरादून अंचल के महाप्रबंधक को निर्देश दिए गए हैं कि वह संबंधित कार्मिकों को 15 दिन के भीतर चार्जशीट दें।

वहीं, जांच अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि वह नियोक्ता अधिकारी के माध्यम से संबंधित कार्मिकों को चार्जशीट तामील कराएं और उनसे उत्तर प्राप्त कर विस्तृत जांच रिपोर्ट दो माह के भीतर उपलब्ध कराएं।

जांच की जद में ये अधिकारी

– एसके उपाध्याय (इकाई प्रभारी)

– आशुतोष कुमार दुबे (इकाई प्रभारी)

– अनुराग चौधरी (सहायक स्थानिक अभियंता)

– राकेश कुमार राय (उप अभियंता)

– बिजेंद्र कुमार (लेखाकार)

चार्जशीट ठंडे बस्ते में, अब बना रहे जांच टीम

उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम के प्रबंध निदेशक के आदेश के इतर देहरादून अंचल के महाप्रबंधक अरविंद तिवारी का कहना है कि फिलहाल चार्जशीट नहीं दी जा रही और उससे पहले जांच टीम गठित कर विधिवत प्रकरण की जांच कराई जाएगी। 15 दिन के भीतर चार्जशीट देने के आदेश एमडी ने 30 नवंबर 2018 को दिए थे। इससे जिम्मेदार अधिकारियों पर ओपीडी ब्लॉक निर्माण में पाए गए घपले पर पर्दा डालने के आरोप भी लग रहे हैं।

ओटी ब्लॉक में बगैर काम के 4.5 करोड़ का भुगतान 

दून मेडिकल कॉलेज के तहत ही ओटी ब्लॉक का भी निर्माण किया जा रहा है। हालांकि इसमें अभी तक कुछ भी काम नहीं किया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम के रिकॉर्ड में कई ठेकेदारों के नाम पर करीब 4.5 करोड़ रुपये का भुगतान भी दिखाया गया है। इसमें जिस आरिफ कंस्ट्रक्शन के नाम पर 2.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है, उसके संचालक अरिफ कादरी का कहना है कि उन्होंने ओटी ब्लॉक में कुछ भी काम नहीं किया है। जबकि उनके नाम पर मिट्टी आदि के भरान व सड़क निर्माण का भुगतान कर दिया गया है।

सीएम से शिकायत करने पर छीना काम

मेडिकल कॉलेज की ओपीडी ब्लॉक का निर्माण कर रहे ठेकेदार आरिफ कादरी से करीब 15 दिन पहले यह काम छीन लिया गया है। पत्रकारों से रूबरू आरिफ ने बताया कि उन्होंने निगम की वित्तीय अनियमितताओं पर 26 जून 2018 को मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। वह अब तक ओपीडी में करीब नौ करोड़ रुपये का काम कर चुके थे, जबकि उन्हें सिर्फ सात करोड़ रुपये का भुगतान ही किया गया है।

उन्हें माप पुस्तिका भी नहीं दिखाई जा रही है, जबकि इसको लेकर उन्होंने आरटीआइ में भी आवेदन किया था। यहां तक कि जिस ओटी ब्लॉक में उन्होंने कुछ भी काम नहीं किया, उसका भुगतान तब उनके खाते में किया गया। यह भुगतान भी तब किया जब वह दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती थे।

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