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बाबा केदार के दर्शन के दौरान रिंगाल की टोकरी में मिलेगा चौलाई के लड्डू का प्रसाद

बाबा केदार के दर्शन के दौरान रिंगाल की टोकरी में मिलेगा चौलाई के लड्डू का प्रसाद

रुद्रप्रयाग : इस यात्रा सीजन से केदारनाथ धाम में चौलाई के लड्डू ही प्रसाद के रूप में चढ़ेंगे। हेली सेवा से दर्शन करने वाले यात्रियों को यह प्रसाद रिंगाल की टोकरी में उपलब्ध कराया जाएगा। केदारनाथ स्थानीय प्रसाद योजना की तैयारी बैठक में यह निर्णय लिया गया।

जिला मुख्यालय के सभागार में हुई बैठक में जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि चौलाई के लड्डू बनाने और उनका विक्रय करने के लिए केदारनाथ प्रसाद संघ का गठन किया गया है। जिले में कार्यरत सभी गैर सरकारी संस्थाएं अथवा कोई अन्य संस्थान, जो स्थानीय उत्पादों को लेकर कार्य कर रहे हैं या करना चाहते हैं, केदारनाथ प्रसाद संघ से सीधे संपर्क कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि कहा कि पूर्व में बाबा केदार को इलायची का प्रसाद चढ़ाया जाता था, लेकिन इस वर्ष से स्थानीय उत्पाद से निर्मित लड्डू ही प्रसाद के रूप में चढ़ाए जाएंगे। इससे जो भी लाभ अर्जित होगा, उसका लाभांश इस कार्य से जुड़े हुए प्रत्येक कार्यकर्ता में बांटा जाएगा।

जिलाधिकारी ने बताया कि इस क्षेत्र में कार्य कर रहे स्वयं सहायता समूहों को आजीविका की ओर से लड्डू बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही लड्डू बनाने वाली संस्थाओं को एफएसएसएआइ (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया) से लाइसेंस लेना होगा, ताकि लड्डू की गुणवत्ता बनी रहे। बैठक में प्रभारी सीडीओ एनएस रावत, पीडी एमएस नेगी, डीडीओ एएस गुंज्याल समेत एनजीओ व आजीविका के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

मंदिर समिति व संघ के बीच होगा एमओयू

जिलाधिकारी ने बताया कि श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति और केदारनाथ प्रसाद संघ का जल्द एमओयू कराया जाएगा। ताकि अन्य किसी भी प्रकार के उत्पाद को मंदिर में न चढ़ाया जा सके।

अन्य स्थानीय उत्पाद भी होंगे केदारनाथ में उपलब्ध

जिलाधिकारी ने बताया कि केदारनाथ में चौलाई के लड्डू के साथ स्वयं सहायता समूहों की ओर से तैयार चौलाई का चूरमा, धूप, भस्म, जूट अथवा कपड़े के बैग, ङ्क्षरगाल की टोकरी आदि सामाग्री भी उपलब्ध रहेगी। इस पूरे कार्य का दायित्व एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना को दिया गया है। प्रसाद के लिए एक स्टोर सोनप्रयाग और दूसरा केदारनाथ में खोला जाएगा। इससे व्यापारियों को प्रसाद लेने में असुविधा नहीं रहेगी।

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