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50 फीसद से अधिक शुरुआत से ही डंप पड़े लाइन लॉस कम करने को लगाए बिजली मीटर

50 फीसद से अधिक शुरुआत से ही डंप पड़े लाइन लॉस कम करने को लगाए बिजली मीटर

देहरादून। लाइन लॉस का हवाला देकर उसका बोझ उपभोक्ताओं की जेब पर डालने पर तुला ऊर्जा निगम अपनी व्यवस्थाओं में सुधार करने को तैयार नहीं है। स्थिति यह है कि लाइन लॉस कम करने को लगाए गए 4.22 करोड़ रुपये के बिजली मीटर व मॉडम में से 50 फीसद से अधिक शुरुआत से ही डंप पड़े हैं। इस मामले में कैग (सीएजी) के सवाल उठाने के बाद अब शासन भी हरकत में आ गया है। इस संबंध में ऊर्जा सचिव ने ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया है।

आरएपीडीआरपी योजना के तहत ऊर्जा निगम ने बिजली की लाइनों में होने वाली ऊर्जा क्षति को कम करने और मीटर रीडिंग को बेहतर बनाने के लिए प्रदेश के 31 शहरों में 4.22 करोड़ रुपये की लागत से 4910 मीटर और मॉडम लगाए थे।

हालांकि, इसमें से करीब 2610 मीटर व मॉडम लगाए जाने के दौरान से ही खराब हालत में पड़े हैं। वर्तमान में केवल 2300 मीटर और मॉडम ही काम कर रहे हैं। इससे ऊर्जा निगम को सही लाइन लॉस का डाटा भी नहीं मिल पा रहा है।

यही कारण है कि ऊर्जा निगम कई दफा नुकसान का हवाला देकर उसकी भरपाई बिजली टैरिफ में बढ़ोत्तरी के माध्यम से करना चाहता है। यह बात और है कि उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग निगम के इस तर्क को हमेशा खारिज करता रहा है।

बावजूद इसके ऊर्जा निगम न तो लाइन लॉस को 15 फीसद से कम पर ला पा रहा है और न ही अपनी कार्यप्रणाली में ही सुधार कर पा रहा है। यदि इस मामले में कैग आपत्ति दर्ज नहीं करता तो शायद ही इस गड़बड़झाले पर अधिकारियों का ध्यान जाता।

हालांकि, अब ऊर्जा सचिव राधिका झा का कहना है कि ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक बीसीके मिश्रा को नोटिस भेजकर जवाब मांगा हैं। इस मामले की जांच की जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

यह है आरएपीडीआरपी योजना     

इस योजना को विद्युत मंत्रालय भारत सरकार ने शुरू किया था। इसे स्थापित करने का प्रमुख उद्देश्य सब-ट्रांसमिशन एवं वितरण नेटवर्क को मजबूत एवं अपग्रेड करने के साथ ही बेसलाइन डाटा की स्थापना व विद्युत वितरण के समय होने वाले लाइन लॉस को 15 प्रतिशत से कम करना है। यदि योजना के अनुरूप ऊर्जा निगम काम कर पाता तो इससे निश्चित तौर पर उपभोक्ताओं को राहत मिल पाती।

 

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