Share
उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच परिसंपत्ति बंटवारे की दिशा में सकारात्मक पहल की उम्मीद

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच परिसंपत्ति बंटवारे की दिशा में सकारात्मक पहल की उम्मीद

देहरादून: उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच परिसंपत्ति बंटवारे की दिशा में 18 साल बाद अब समाधान की दिशा में कदम बढ़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव जिस प्रकार पहली बार पूरे लाव लश्कर के साथ तमाम लंबित बिंदुओं पर चर्चा करने पहुंचे, उससे अब इसमें सकारात्मक पहल की उम्मीद जगने लगी है। हालांकि, ऊर्जा विभाग के अंतर्गत जल विद्युत परियोजनाओं में हिस्सेदारी और सिंचाई विभाग के तहत नहरों के स्वामित्व को लेकर अभी भी दोनों प्रदेश एक सुर में नजर नहीं आ रहे हैं। हालांकि, जमरानी बांध पर दस माह बाद अब उत्तरप्रदेश ने समझौता करने पर हामी भर ली है।

राज्य गठन के बाद पुनर्गठन नियमावली के तहत दोनों राज्यों के बीच परिसंपत्तियों का बंटवारा हुआ। उत्तर प्रदेश ने कुछ परिसंपत्तियों का बंटवारा तो किया लेकिन अपने हितों को देखते हुए शेष पर पेंच लगा दिया। इसके बाद से ही दोनों प्रदेशों के बीच विभिन्न महकमों की परिसंपत्तियों को लेकर पेंच फंसा हुआ है। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकारें बनने के बाद परिसंपत्तियों को लेकर चल रहे विवाद के दूर होने की उम्मीद जगी है। इसे लेकर दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के बीच हुई बैठक में लिए गए निर्णय के क्रम में सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव अधिकारियों के बड़े दल के साथ उत्तराखंड पहुंचे और विभागवार लंबित विषयों पर चर्चा की।

ऊर्जा विभाग- उर्जा विभाग की परिसंपत्तियों के बंटवारे को लेकर बैठक में नौ बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। इनमें निगम स्तर व कर्मचारियों की देयता, बीजकों का भुगतान, ऋण की देयता, विद्युत गृहों के संचालन, टिहरी व कालागढ़ जल विद्युत परियोजनाओं की अंशपूंजी के हस्तांतरण पर भी चर्चा हुई। इनमें कुछ मामलों में सहमति बनी और कुछ पर नए सिरे से मंथन करने का निर्णय लिया गया।

सिंचाई विभाग- सिंचाई विभाग पर हुई चर्चा में 11 बिंदुओं पर चर्चा हुई। इनमें उत्तराखंड में चल रही परियोजनाओं एवं आवासीय तथा अनावासीय भवनों को छोड़कर सारी संपत्ति भूमि व भवन उत्तराखंड को देने, नहरों का संयुक्त संचालन, ऊधमसिंह नगर के जलाशय, शारदा नहर जलाशय के मत्स्य ठेके में हिस्सेदारी व जमीन हस्तांतरण को लेकर चर्चा की गई। इनमें भी कुछ मामलों में सहमति और कुछ में नए सिरे से मंथन करने का निर्णय लिया गया।

परिवहन निगम- परिवहन निगम की परिसंपत्तियों और देयता पर भी विस्तृत चर्चा हुई लेकिन इन पर आम सहमति नहीं बन पाई। इस पर भी नए सिरे से चर्चा की जाएगी।

पर्यटन विभाग- हरिद्वार स्थित अलकनंदा होटल को उत्तराखंड को देने पर सहमति बनी। यह भी निर्णय लिया गया कि इसी परिसर में उत्तर प्रदेश अपना नया भवन बनाएगा। एनओसी मिलने के तीन साल तक अलकनंदा का संचालन उत्तर प्रदेश के पास ही रहेगा।

बैठक में इसके अलावा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, वित्त विभाग, आवास विभाग, पशुपालन विभाग, वन विभाग, औद्योगिक विकास विभाग और उत्तराखंड तराई एवं बीज विकास निगम की देनदारियों के संबंध में भी चर्चा हुई।

Leave a Comment