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लोक गायिका प्रेरणा भंडारी ने वीडियो अलबम ‘दूर डांडियों गौं गुठियार-होलु मेरू मायादार’ का किया लोकार्पण

लोक गायिका प्रेरणा भंडारी ने वीडियो अलबम ‘दूर डांडियों गौं गुठियार-होलु मेरू मायादार’ का किया लोकार्पण

मसूरी, देहरादून : उत्तराखंड की उभरती युवा लोक गायिका प्रेरणा भंडारी के वीडियो अलबम ‘दूर डांडियों गौं गुठियार-होलु मेरू मायादार’ का लोकार्पण किया गया। यह सोलो अलबम प्रवासियों को समर्पित है। गीत में देश-विदेश में रह रहे उत्तराखंडियों से शहर की घुटनभरी जिंदगी से लौटकर अपने गांवों में बसने का आह्वान किया गया है।

लाइब्रेरी बाजार स्थित एक होटल के सभागार में आयोजित लोकार्पण समारोह में निवर्तमान पालिका सभासद अनुज गुप्ता ने वीडियो अलबम को लॉन्च किया। इस मौके पर अनुज गुप्ता ने कहा कि प्रदेश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। कहा कि आने वाले समय में उत्तराखंड की लोक संस्कृति को संवारने और विश्व पटल पर स्थापित करने में मसूरी प्रमुख केंद्र साबित होगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, भाषा और आंचलिक पहचान को आगे बढ़ाने के लिए सभी प्रदेशवासियों को लगातार प्रयासरत रहना चाहिए।

अलबम के निर्देशक प्रदीप भंडारी ने बताया कि अलबम में एक ही गाना है। बताया कि लोकगायक जितेंद्र पंवार ने गीत की रचना की है। वहीं संगीत संजय कुमोला ने तैयार किया है। गायिका प्रेरणा भंडारी ने गीत को स्वर देने के साथ ही मुख्य भूमिका भी निभाई है।

अन्य कलाकारों मे संगीता गुसाईं, अंशिका भंडारी, निशा नेगी और हिमानी रावत शामिल हैं। लोकार्पण समारोह में कमल भंडारी, प्रमिला नेगी, पुष्पा पडियार, कमलेश भंडारी, मुकेश लाल, चंद्रवीर गायत्री, गंभीर जयाड़ा, जितेंद्र पंवार, संजय कुमोला, कांता प्रसाद, ब्रजेश भट्ट, राकेश भदोला, नरेंद्र पडियार, शूरवीर भंडारी, सुनील सिलवार, बिजेंद्र पुंडीर आदि उपस्थित रहे।

पारंपरिक लोकनृत्यों का दिया जाएगा प्रशिक्षण

उत्तराखंड के पारंपरिक लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ओर से एक पहल की जा रही है। जिसमें गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत ग्राम सेवलांकला देहरादून में एक वर्षीय लोक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इसमें उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र इलाहाबाद की ओर से पूनम ममगाईं को गुरु के पद पर चयनित किया गया है।

कार्यशाला का शुभारंभ भाजपा धर्मपुर मंडल अध्यक्ष नीटू कांबोज, ने किया। वहीं पूनम ममगाईं ने बताया कि कक्षा का संचालन रोजाना दोपहर तीन बजे से शाम सात बजे तक होगा। जिसमें पारंपरिक लोक नृत्य झुमैलो, घसियारी, थडिया, चौफला आदि का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

18 वर्ष से 22 वर्ष तक के अभ्यर्थी प्रशिक्षण में भाग ले सकते हैं। इसके अलावा लोक संस्कृति के लिए समर्पित भाव से कार्य करने वाले प्रतिभावान कलाकारों को भी निश्शुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस अवसर पर समाजसेवी अनुराधा वालिया, पुष्कर सिंह, महेश शर्मा, बबली पंवार आदि मौजूद रहे।

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