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आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 20 हजार से अधिक कुपोषित बच्चों को हष्ट-पुष्ट बनाने की दिशा में सरकार गंभीर

आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 20 हजार से अधिक कुपोषित बच्चों को हष्ट-पुष्ट बनाने की दिशा में सरकार गंभीर

देहरादून । देवभूमि के आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 20 हजार से अधिक कुपोषित बच्चों को हष्ट-पुष्ट बनाने की दिशा में सरकार गंभीर नजर आ रही है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मनरेगा के कार्यों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों से अपील की कि वे अपने सामाजिक दायित्व के तहत दो-दो कुपोषित बच्चों को गोद लें। साथ ही यह भी निर्देश दिए कि कुपोषित बच्चों के परिवारों की भोजन की आदत, आर्थिकी और सामाजिक पृष्ठभूमि का भी विस्तृत अध्ययन किया जाए। उन्होंने कुपोषित बच्चों की माताओं को राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार मिशन से जोड़ने के निर्देश भी दिए।

 उत्तराखंड में में संचालित 20066 आंगनबाड़ी केंद्रों में 20 हजार से अधिक कुपोषित बच्चे पंजीकृत हैं। इसके अलावा मलिन बस्तियों के बच्चों को भी इसमें शामिल कर लिया जाए तो यह आंकड़ा कहीं अधिक बैठेगा। हालांकि, बच्चों को कुपोषण से निजात दिलाने के मद्देनजर राष्ट्रीय पोषण मिशन समेत कई योजनाएं संचालित हो रही हैं। फिर भी कुपोषण के दंश से अभी तक निजात नहीं मिल पाई है।

अब सरकार ने इसे लेकर गंभीरता से कदम उठाने की ठानी है। इस कड़ी में कुपोषित बच्चों के परिवारों की आर्थिकी दुरुस्त करने के मद्देनजर उन्हें मनरेगा से जोड़ने पर फोकस किया जा रहा है। भुगतान न होने की जांच के निर्देश मनरेगा की समीक्षा बैठक के दौरान यह बात भी सामने आई कि कई जगह ग्राम प्रधानों और अन्य जनप्रतिनिधियों की शिकायतें हैं कि मनरेगा में समय पर भुगतान नहीं होता। मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से लेते हुए प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास को प्रकरणों की जांच के निर्देश दिए।

उन्होंने मनरेगा के कार्यों के सोशल ऑडिट को अधिक पारदर्शी व सुदृढ़ बनाने, मनरेगा में भूमि उत्पादकता में सुधार, मत्स्य पालन, बंजर भूमि विकास, पशुबाड़ा निर्माण, उद्यानीकरण, रेशम, वनीकरण के जरिये आजीविका में सुधार पर खास फोकस करने के लिए भी कहा। सिक्योर सॉफ्टवेयर की लॉन्चिंग बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने मनरेगा के तहत तैयार होने वाले आगणनों में एकरूपता और त्रुटिहीनता के मद्देनजर सिक्योर सॉफ्टवेर की लॉन्चिंग की। यह सॉफ्टवेयर देहरादून जिले से प्रारंभ किया गया है। बताया गया कि 15 जनवरी तक इसे सभी जिलों में लागू कर दिया जाएगा।

पिरुल एकत्रीकरण को केंद्र को भेजेंगे प्रस्ताव राज्य में फायर सीजन के दौरान जंगल की आग का सबब बनने वाली चीड़ की पत्तियों यानी पिरुल के एकत्रीकरण कार्य को मनरेगा में शामिल करने के मद्देनजर केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने यह जानकारी दी।

उन्होंने यह भी बताया कि मनरेगा के तहत राज्य में सगंध खेती और ऐरामा क्लस्टर भी विकसित किए जाएंगे। शिवांश खाद को करेंगे प्रोत्साहित मुख्यमंत्री ने मनरेगा के तहत वर्मी कंपोस्ट के साथ ही राज्य में शिवांश खाद को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। इसके तहत राज्य के 15 ऑर्गनिक ब्लाकों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस खाद का निर्माण व उपयोग शुरू किया जाएगा।

यह भी दिए निर्देश 

-हरिद्वार के करतापुर गांव में देशी गाय के संरक्षण-संव‌र्द्धन के साथ दिल्ली तक हो दूध की मार्केटिंग

-प्रत्येक जिले में अल्मोड़ा जिले के कोसी मॉडल को अपनाते हुए दो से तीन नदियों को करें पुनर्जीवित

-राज्य में गोशालाओं व पशुगृहों को सुविधाजनक और आरामदायक बनाया जाए

-वन पंचायतों में संगध खेती व जड़ी-बूटी उत्पादन को बने कार्ययोजना

-पिथौरागढ़, उत्तरकाशी व रुद्रप्रयाग में ट्राउट मछली पालन पर हो खास फोकस

-मनरेगा में उद्यान विभाग के अंर्तगत विकसित किए जाएं अखरोट क्लस्टर

-राज्य में ग्रामीण हाट के लिए भूमि की व्यवस्था और नए हाट बनाए जाएं

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