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हाईवे चौड़ीकरण के लिए लापरवाही से कट रही है पहाड़िया, मौत को दावत देने जैसा है सफर

हाईवे चौड़ीकरण के लिए लापरवाही से कट रही है पहाड़िया, मौत को दावत देने जैसा है सफर

देहरादून। ऑल वेदर रोड योजना के तहत निर्माणाधीन गौरीकुंड हाईवे यात्रियों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। हाईवे चौड़ीकरण के लिए पहाड़ियों को नियमों की अनदेखी करते हुए लापरवाही से काटा जा रहा है, जिससे 76 किमी लंबे इस हाईवे पर सफर करना मौत को दावत देने जैसा है। पहाड़ियों को बेतरतीब तरीके से काटने के चलते अक्सर हाईवे पर बोल्डर और मलबा गिरता रहता है। शुक्रवार को पहाड़ खिसकने से सात मजदूरों की मौत भी इसी लापरवाही की बानगी है।

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ऑल वेदर रोड के तहत गौरीकुंड हाईवे पर एक हजार करोड़ से अधिक की धनराशि से कार्य होने हैं। लेकिन, निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों की लापरवाही के चलते इस सड़क पर सफर करना खतरनाक हो गया है। पहाड़ियों पर अटके बोल्डर कब गिर पड़ें, कहा नहीं जा सकता। वहीं पहाड़ियों की कटिंग गलत तरीके से किए जाने से स्लाइडिंग जोन बन गए हैं। कटिंग के बाद ट्रीटमेंट के बजाय दूसरे स्थान पर कार्य शुरू कर दिया जा रहा है।

76 किमी हाईवे पर 40 से अधिक स्लाइडिंग जोन

रुद्रप्रयाग से गौरीकुंड तक 76 किमी लंबे हाईवे पर 40 से अधिक स्लाइडिंग जोन बन गए हैं। रुद्रप्रयाग व तिलवाड़ा के बीच ही छह से अधिक स्थानों पर हाईवे काफी खतरनाक बना हुआ है। जबकि, अगस्त्यमुनि से चंद्रापुरी-भीरी व गुप्तकाशी तक भी हाईवे 15 से अधिक स्थानों पर खतरनाक बना हुआ है। यहां तक कि पुलिस अधीक्षक अजय सिंह भी मानते हैं कि निर्माण कार्य में काफी लापरवाही बरती जा रही है।

मजदूरों की संख्या पर असमंजस 

पहाड़ खिसकने से हुए हादसे की चपेट में कितने मजदूर आए, इसे लेकर काफी देर तक कुछ स्पष्ट नहीं हो पाया। बताया जा रहा है कि ठेकेदार के पास मजदूरों का पूरा ब्योरा तक नहीं था। निर्माण एजेंसी का साइट इंजार्च भी मौके पर नहीं था। घटना के काफी देर बाद कुल 11 मजदूरों के मलबे की चपेट में आने की बात प्रशासन ने कही।

निर्माण संस्था के पास नहीं सुरक्षा के इंतजाम

स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण एजेंसियों के पास एंबुलेंस की सुविधा तक नहीं है। जबकि, निर्माण कर करे मजदूरों के पहाड़ियों पर कार्य करने के लिए भी सुरक्षा के उपाय नहीं हैं।

1200 से अधिक मजदूर कर रहे निर्माण

गौरीकुंड हाईवे पर 1200 से अधिक मजदूर विभिन्न स्थानों पर कार्य कर रहे हैं। हादसे में मृतकों के आश्रितों को एक-एक लाख रुपये की तात्कालिक सहायता दी जाएगी। इसके लिए नेशनल हाईवे ने निर्माण एजेंसी 2को निर्देश दिए हैं।

सड़क कटान में सेफ्टी ऑडिट के निर्देश 

रुद्रप्रयाग के नजदीक बांसवाडा के पास चारधाम सड़क महापरियोजना (ऑल वेदर रोड) के लिए पहाड़ कटान के दौरान शुक्रवार को हुए हादसे के बाद शासन चेता है। इस सड़क के चौड़ीकरण व सुधारीकरण के लिए हिल साइड कटिंग और रिटेनिंग वाल निर्माण के समय सेफ्टी ऑडिट प्रक्रिया का अनिवार्य रूप से अनुपालन सुनिश्चित करने के लोनिवि के प्रमुख अभियंता को दिए गए हैं।

सेफ्टी ऑडिट के तहत एक भू वैज्ञानिक और कम से कम अधीक्षण अभियंता (सिविल) से निरीक्षण कराने के बाद ही कार्यवाही के लिए निर्देशित किया गया है। अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश की ओर से इस संबंध में लोनिवि के प्रमुख अभियंता को पत्र भेजा गया है। उन्होंने कहा है कि ऑल वेदर रोड का लगभग 90 फीसद हिस्सा पर्वतीय क्षेत्र में है। निर्माण प्रक्रिया के तहत अधिकांश जगह हिल साइड कटिंग का कार्य चल रहा है। पत्र में उल्लेख है कि यह सड़क हिमालयी पर्वत श्रृंखला की निचली पहाड़ियों से गुजरती है, जो वर्तमान में भी नाजुक स्थिति में है।

उन्होंने कहा है कि इस मार्ग पर पहाड़ की तरफ कटिंग किए जाने और कटिंग के उपरांत मलबा गिरने से दुर्घटनाएं हो रही हैं, जो गंभीर ही नहीं चिंताजनक हैं। लोनिवि के प्रमुख अभियंता को निर्देश दिए गए हैं कि दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के मद्देनजर सेफ्टी ऑडिट प्रक्रिया के तहत अनिवार्य रूप से एक भू वैज्ञानिक एवं कम से कम अधीक्षण अभियंता स्तर के सिविल अभियंता से निरीक्षण कराकर कार्यवाही की जाए।

सचिवालय में दिनभर रही हलचल चारधाम को जोड़ने वाली ऑल वेदर रोड के निर्माण कार्य के दौरान हुए हादसे के बाद शुक्रवार को सचिवालय में दिनभर हलचल रही। मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन से पल-पल का अपडेट लिया जाता रहा। साथ ही बचाव एवं राहत कार्यों को युद्धस्तर पर करने और घायलों को उचित उपचार मुहैया कराने के निर्देश दिए जाते रहे।

 डीएम के कई बार निर्देश देने के बावजूद निर्माण एजेंसी ने डेंजर जोन में निर्माण कार्य करते वक्त जरूरी सावधानी नहीं बरती। सुरक्षा मानकों पर भी सवाल उठे, लेकिन एजेंसी ने इस दिशा में कदम नहीं उठाया।

रुद्रप्रयाग से गौरीकुंड के बीच गत वर्ष दिसंबर से ऑलवेदर रोड के तहत के तहत निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण कार्यों का समय-समय पर डीएम मंगेश घिल्डियाल निरीक्षण करते रहे हैं, और उन्होंने हर बार कार्य में लापरवाही न बरतने, डेंजर जोन में पहाड़ी पर लटके पत्थरों को निकालने व सावधानीपूर्वक कार्य करने के निर्देश दिए, लेकिन निर्माण एजेंसी ने कोई कदम नहीं उठाया।नेशनल हाईवे के अधिशासी अभियंता जेके त्रिपाठी ने बताया कि निर्माण एजेंसी आरजीबी कंस्ट्रक्शन गाजियाबाद को इस संबंध में नोटिस दिए गए, लेकिन एजेंसी नहीं चेती।

जोखिम से भरी हुर्इ है श्रमिकों की जान  

खड़ी चट्टों और पहाड़ों को काटकर सुहावने सफर के लिए ऑलवेदर की रोड तैयार करने वाले श्रमिकों की जान जोखिम से भरी हुई है। ऑलवेदर का निर्माण करने वाली कंपनियों ने श्रमिकों की सुरक्षा के लिए मानक ताक पर रखे हुए हैं। निर्माण कार्य करने वाले श्रमिकों के पास सुरक्षा उपकरणों के नाम हेलमेट तक की व्यवस्था नहीं है। उत्तरकाशी जनपद में ऑलवेदर रोड का निर्माण मुख्य रूप चार स्थानों पर चल रहा है।

जिनमें गंगोत्री हाईवे पर धनपुर, नालूपानी तथा चुंगी बडेथी के पास निर्माण कार्य चल रहा है। जबकि यमुनोत्री हाईवे पर ब्रह्मखाल और सिलक्यारा के बीच निर्माण कार्य चल रहा है। इन स्थानों पर सड़क निर्माण में सैकड़ों की संख्या में श्रमिक काम कर रहे हैं। पर, श्रमिकों के पास सुरक्षा उपकरण शून्य हैं। स्थिति यह है कि श्रमिक पहाड़ी कटान व पुलों के निर्माण का कार्य भी बिना हेलमेट पहने हुए कर रहे है।

इसके अलावा श्रमिकों के पास जूते, दस्ताने, सेफ्टी जैकेट, मास्क आदि की भी कोई सुविधा नहीं है। जबकि उत्तरकाशी के निकट चुंगी बडेथी के पास सड़क निर्माण के दौरान पहाड़ी से पत्थर व मलबा गिरने से हाईवे पर चलने वाली 10 से अधिक कारों के शीशे भी फूट चुके हैं। नालूपानी के पास भी खतरे के साये में यातायात संचालित किया जाता है। वहीं निर्माण स्थल पर लगातार धूल के गुब्बार होने के बाद भी श्रमिकों के पास मास्क की भी सुविधा नहीं है। जो श्रमिकों के स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ है।

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