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औली में हालिया बर्फबारी के बाद शीतकालीन खेलों के आयोजन की उम्मीदें

औली में हालिया बर्फबारी के बाद शीतकालीन खेलों के आयोजन की उम्मीदें

गोपेश्वर। विश्व प्रसिद्ध स्कीइंग स्थल औली में हालिया बर्फबारी के बाद फरवरी में प्रस्तावित शीतकालीन खेलों के आयोजन की उम्मीद बलवती होने लगी है। औली में जहां अभी भी बर्फ जमी है, वहीं स्नो मेकिंग मशीन से मैनुअल मोड में स्लोप पर बर्फ बिछाने का काम भी चल रहा है। यदि मौसम ने ऐसा ही साथ दिया तो यहां तय समय पर नेशनल स्कीइंग गेम्स कराना आसान हो जाएगा।

सीमांत चमोली जिले में समुद्रतल से 10500 फीट की ऊंचाई पर माउंट नंदा, देवी कामेट, माणा पर्वत, द्रोणागिरी, नीलकंठ व हाथी-घोड़ा पालकी पर्वत के बीच स्थित औली एक बर्फ से ढका पहाड़ी स्टेशन है। यह स्कीइंग के लिए सदाबहार और आदर्श स्थान भी है।

वैसे तो यहां दिसंबर से लेकर मार्च तक बर्फ जमी रहती है। जब कम बर्फ में यहां खेलों का आयोजन होता है तो स्नो मेकिंग मशीन से स्लोप पर बर्फ बिछाई जाती है। सुकून यह है कि इस साल समय से पहले ही नवंबर अंतिम सप्ताह में यहां लगभग छह बार बर्फबारी हो चुकी है।

इसके अलावा वर्ष 2012 से खराब पड़ी स्नो मेकिंग मशीन से मैनुअल मोड में काम कर स्लोप को कृत्रिम बर्फ से ढकने का कार्य भी चल रहा है। दरअसल मौसम परिवर्तन को देखते हुए इस बार फरवरी में यहां नेशनल गेम्स भी प्रस्तावित हैं। इसे लेकर स्कीइंग प्रेमियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

एसडीएम जोशीमठ योगेंद्र सिंह कहते हैं कि आने वाले दिनों में भी यहां बर्फबारी की संभावना बन रही है। इससे उम्मीद है फरवरी में यहां नेशनल स्कीइंग गेम्स के आयोजन में कोई दिक्कत नहीं होगी।

औली में है विश्व की बेहतरीन स्लोप

औली में अंतरराष्ट्रीय स्तर की 1300 मीटर लंबी व 400 मीटर चौड़ी स्कीइंग स्लोप है। यह स्लोप दक्षिणमुखी होने के कारण विश्व की बेहतरीन स्लोप में शुमार की जाती है। फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल स्कीइंग के मानकों पर भी यह स्लोप फिट बैठती है। यहां पर वर्ष 2011 में दक्षिण एशियाई खेलों (सैफ गेम्स) का आयोजन भी हो चुका है।

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