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हाउस टैक्स जमा कराने के लिए नहीं खाने पड़ेंगे धक्के, निगम प्रशासन ने निकाला हल

हाउस टैक्स जमा कराने के लिए नहीं खाने पड़ेंगे धक्के, निगम प्रशासन ने निकाला हल

देहरादून। इस वित्तीय वर्ष से नगर निगम में हाउस टैक्स स्मार्ट कार्ड से भी जमा हो सकेगा। निगम प्रशासन ने इसके लिए अपने खातों से जुड़े विभिन्न बैंकों के अधिकारियों से वार्ता कर इसका हल निकाल लिया है।

नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने बताया कि बैंकों की ओर से निगम को जारी स्मार्ट कार्ड केवल नगर निगम से जुड़े भुगतान ही करेंगे। यह एक तरह से वॉलेट सिस्टम पर आधारित होंगे। इनके जरिए नगर निगम से जुड़ा कोई भी शुल्क जमा हो सकेगा।

सालाना तकरीबन 25 करोड़ रुपये हाउस टैक्स वसूल रहा निगम जन सुविधाओं को लेकर गंभीर हो गया है। हाउस टैक्स जमा कराने को अब आपको निगम कार्यालय के धक्के नहीं खाने पड़ेंगे, न लाइन में लगना पड़ेगा।

कैशलेस व्यवस्था के अंतर्गत नगर निगम मई के पहले हफ्ते से ही टैक्स जमा करने की प्रक्रिया ऑनलाइन करने का दावा कर रहा है। टैक्स सेवा ऑनलाइन करने के लिए निगम पांच साल से कसरत करता आ रहा है। तकरीबन डेढ़ लाख आवासीय एवं व्यावसायिक भवनों वाले शहर में निगम ने पहले चरण में सत्तर हजार भवन को टैक्स की ऑनलाइन सेवा से जोड़ने का फैसला लिया है।

दरअसल, निगम के कंप्यूटरीकृत डाटा में अभी 63 हजार आवासीय व साढ़े सात हजार व्यावसायिक भवन ही दर्ज हुए हैं। टैक्स की ऑनलाइन सुविधा को लेकर नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने निगम के पैनल में शामिल सभी बैंकों के अफसरों के साथ बैठक भी कर ली है। इसमें तय हुआ कि लोगों को उनके हिसाब से टैक्स जमा करने की सुविधा दी जाएगी। चाहे बैंक के काउंटर पर पहुंचकर टैक्स जमा करे, या ऑनलाइन सुविधा पर। इसके अलावा मोबाइल एप पर भी हाउस टैक्स जमा करने की सुविधा मिलेगी।

टैक्स में 20 फीसद छूट रहेगी जारी 

नए वित्तीय वर्ष का हाउस टैक्स में बीस फीसद की मिलने वाली छूट फिलहाल दी जाती रहेगी। शुरूआती करीब आठ महीने तक निगम की ओर से समय पर टैक्स जमा करने वाले लोगों को यह छूट दी जाती है। इसमें 20 फीसद सीधी छूट और उसके बाद बचे टैक्स पर पांच फीसद की अतिरिक्त छूट हर साल दी जाती है।

आउट-सोर्स भी होगा हाउस टैक्स

इस वित्तीय वर्ष से हाउस टैक्स प्रक्रिया आउट-सोर्स करने पर भी मंथन चल रहा था। दरअसल, जो लोग निगम के दफ्तर में आकर या ऑनलाइन टैक्स जमा नहीं करा सकेंगे, उनसे वसूली के लिए एजेंसी कर्मी भेजे जाने का प्लान बनाया गया था।  जब तक टैक्स प्रक्रिया ऑनलाइन नहीं हो जाती, इसे लागू करने में भी पेंच है।

अभी निगम के टैक्स अनुभाग में इतने कार्मिक नहीं हैं कि उनसे घर-घर जाकर टैक्स की वसूली कराई जा सके। इसके अलावा पूरी टैक्स वसूली नहीं आने से निगम को हर वित्तीय वर्ष में करोड़ों का नुकसान भी हो रहा। माना जा रहा है कि आउट-सोर्स होने से निगम की आय करीब 40 करोड़ पहुंच जाएगी, जो फिलहाल 20 करोड़ है। जनता को ये लाभ होगा कि एजेंसी कर्मचारी खुद घर आकर टैक्स का असेसमेंट करेंगे और हाथों-हाथ टैक्स भी ले लेंगे।

अब बिजली कनेक्शन बताएगा आपने हाउस टैक्स भरा या नहीं

सूबे में नगर निकायों के अधीन आवासीय शुल्क न देने वालों की पहचान बिजली कनेक्शन से की जाएगी। शासन ने सभी नगर निगम एवं पालिका-पंचायतों को आदेश भेज बिजली कनेक्शन की सूची से बकायेदार आवासीय स्वामी का पता लगाने को कहा है। जुर्माने के साथ इनसे आवासीय शुल्क का बकाया वसूला जाएगा।

निदेशक शहरी विकास की ओर से जारी आदेश में नगर निकायों की सीमा में रहने वाले सभी परिवारों से भवन कर लेने और लक्ष्य पूरा करने के लिए चिह्निकरण करने के आदेश दिए गए। इसके लिए निगम क्षेत्र में ऊर्जा निगम के सब-डिवीजन कार्यालय से समन्वय कर उन सभी लोगों का ब्योरा जुटाया जाएगा, जहां बिजली कनेक्शन हैं।

इस सूची से मिलान किया जाएगा कि किस व्यक्ति ने हाउस टैक्स दिया है और किसने नहीं। इसमें आवासीय और व्यावसायिक भवन शामिल होंगे। निदेशक की ओर से ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक को भी पत्र भेज निकायों का सहयोग करने को कहा गया है।

यूजर चार्ज भी हाउस टैक्स के साथ

नगर निगम यह कोशिश भी कर रहा है कि इस वित्तीय वर्ष से डोर-टू-डोर कूड़ा उठान के लिए लिया जा रहा मासिक यूजर चार्ज भी वन-टाइम के आधार पर साल में एक बार हाउस टैक्स के साथ ही ले लिया जाए। चूंकि, जल्द ही डोर-टू-डोर सेवा भी आउट-सोर्स होने जा रही। ऐसे में यह माना जा रहा कि नई कंपनी बेहतर सुविधा देगी। इसलिए लोग आसानी से यूजर चार्ज वर्षभर का जमा करा देंगे। हाउस टैक्स के साथ यूजर चार्ज लेने से इसमें हो रहा बड़ा घपला भी बंद हो जाएगा।

डोर-टू-डोर कूड़ा उठान का होगा सर्वे

प्रदेश के समस्त नगर निकायों में डोर-टू-डोर कूड़ा उठान की वास्तविक स्थिति जानने के लिए शासन ने सर्वे कराने का फैसला लिया है। इसी के तहत दून नगर निगम के अधिकारियों ने सफाई व्यवस्था से जुड़े कार्मिकों की बैठक ली। सभी इंस्पेक्टरों व सुपरवाइजरों को 24 अप्रैल तक सर्वे पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। यह सर्वे सात श्रेणी में किया जाएगा।

प्रदेश में डोर-टू-डोर कूड़े के उठान की स्थिति बेहद खराब है। देहरादून, हरिद्वार एवं ऊधमसिंहनगर जिले में ही डोर-टू-डोर कूड़ा उठान का काम हो रहा है लेकिन इसे भी पूरी तरह से संतोषजनक नहीं कहा जा सकता। दून नगर निगम में रोजाना लगभग 250 मीट्रिक टन कूड़ा नगर निगम उठाता है।

बावजूद इसके कई मीट्रिक टन कूड़ा या तो उठ ही नहीं पा रहा है या निगम उन घरों सड़कों पर बिखरा रहता है, या नगर निगम सभी घरों तक नहीं पहुंच रहा। दून शहर में रोजाना करीब 350 मीट्रिक टन कूड़ा सड़क पर आता है, लेकिन उठान केवल 250 टन का ही है।

स्वच्छ भारत प्रतियोगिता में भी दून नगर निगम के रैकिंग बेहद खराब रही। हर बार ही निगम को इस मामले में बेहद कम अंक मिले। बहरहाल, अब शासन ने समूचे प्रदेश के निकायों में डोर टू डोर कूड़ा उठान की स्थिति जानने के लिए सर्वे कराने का निर्णय लिया है।

नगर निगम दून के सभागार में आयोजित बैठक में नगर आयुक्त विनय शंकर पांडये ने सभी सफाई इंस्पेक्टरों एवं सुपरवाइजरों की बैठक ली। सभी को 24 अप्रैल तक कूड़ा उठान पर रिपोर्ट देने को कहा गया। यह सर्वे सात कैटेगरी में होगा। इसमें घरों की संख्या चाहे वह मलिन बस्ती ही क्यों न हो, प्रत्येक परिवार में सदस्यों की संख्या, कमर्शियल प्रॉपर्टी, होटल, सरकारी विभाग, अन्य कैटेगरी शामिल होगी।

इसके अलावा नगर निगम ने सर्वे शीट में भवन कर जानने के लिए एक वर्ग अपने स्तर से जोड़ा है। नगर आयुक्त ने बताया कि इस सर्वे के माध्यम से पता चल सकेगा कि कितने लोग अभी भी निगम को कूड़ा नहीं दे रहे हैं।

गंदगी पर नगर आयुक्त से मिले

शिवाजी नगर वार्ड की समस्याओं को लेकर क्षेत्रीय पार्षद की अगुवाई में लोगों ने नगर आयुक्त विनय शंकर पांडेय से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की। इस दौरान क्षेत्रीय पार्षद विशाल कुमार ने नगर आयुक्त को बताया कि कई दिनों से क्षेत्र में सफाई व्यवस्था ठीक से नहीं कराई जा रही है। साथ ही डोर टू डोर कूड़ा उठान का कार्य भी ठीक प्रकार से नहीं किया जा रहा है।

कहा कि क्षेत्र में एलईडी लाइटें लगाने का काम भी नहीं हो रहा। इन समस्याओं को लेकर पूर्व में भी निगम अफसरों को शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कार्रवाई नहीं की जा रही। नगर आयुक्त ने शिकायतों पर जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया।

 

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