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एनएच-74 मुआवजा घोटाले में आइएएस अफसरों से एसआइटी देहरादून में करेगी पूछताछ

एनएच-74 मुआवजा घोटाले में आइएएस अफसरों से एसआइटी देहरादून में करेगी पूछताछ

देहरादून: एनएच-74 मुआवजा घोटाले में एसआइटी की राडार पर आए आइएएस अफसरों से एसआइटी देहरादून में पूछताछ करेगी। इसकी एसआइटी वीडियो रिकॉर्डिंग भी करेगी।

एसआइटी जांच में आर्बिट्रेशन के भी कुछ ऐसे मामले सामने आए, जिसमें गड़बड़झाले की पुष्टि हुई थी। किसानों से पूछताछ के आधार पर एसआइटी ने जब सारे दस्तावेज खंगाले तो आर्बिट्रेशन में करीब 15 मामलों में अनियमितता सामने आई।

इस पर एसआइटी ने आइएएस डॉ.पंकज पांडेय और चंद्रेश यादव के खिलाफ जांच रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी थी। शासन से आइएएस अफसरों से पूछताछ को मिले आदेश के बाद एसआइटी ने दोनों आइएएस अफसरों को नोटिस भेजा था।

इस पर उन्होंने फैक्स के माध्यम से 18 अगस्त तक का समय मांगा था। इसके बाद एसआइटी ने दोनों आइएएस अफसरों को बयान देने के लिए दूसरा नोटिस भेज दिया था, लेकिन उनका जवाब नहीं आया। ऐसे में एसआइटी अब 18 अगस्त को देहरादून में जाकर आइएएस अफसरों से पूछताछ कर सकती है। पूछताछ की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी। पूछताछ  के बाद एसआइटी अपनी रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौंपेगी।

सितारगंज के किसान ने 15 लाख रुपये लौटाए

एनएच मुआवजा घोटाले में एसआइटी की कार्रवाई के बाद किसानों ने मुआवजा लौटाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को सितारगंज के किसान ने 15 लाख रुपये लौटाए।

एनएच-74 मुआवजा घोटाले में कृषि भूमि को अकृषि कर किसानों ने करोड़ों रुपये का मुआवजा लिया था। जांच हुई तो एसआइटी ने किसानों के साथ ही अधिकारी, कर्मचारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

एसआइटी कार्रवाई के बाद घबराए किसानों ने मुआवजा लौटाने की पेशकश की थी। इस पर एसबीआइ में खाता खोला गया। इसमें किसानों ने मुआवजा लौटाना शुरू कर दिया। शुक्रवार को भी सितारगंज के किसान इंद्रपाल ङ्क्षसह ने 15 लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा वापस किया। एसआइटी अधिकारियों के मुताबिक माना जा रहा है कि एक-दो दिन के भीतर कुछ और किसान भी मुआवजा लौटा सकते हैं।

आर्बिट्रेटर की बनाई सहमति पर सवाल क्यों

एनएच-74 मुआवजा घपले में एसआइटी जांच रिपोर्ट में घेरे में आए आइएएस अधिकारी डॉ पंकज पांडे ने भी शुक्रवार को आखिरी दिन अपना जवाब दाखिल कर दिया। डॉ पांडे ने अपने ऊपर लगे आरोपों के बिंदुवार जवाब तो दिए, लेकिन साथ ही आइएएस चंद्रेश यादव की तरह सवाल भी खड़े किए हैं।

बताया जा रहा है कि जिलाधिकारी और ऑर्बिट्रेटर के तौर पर दोनों पक्षों के बीच मुआवजे को लेकर सहमति बनाने की कोशिशों को जायज ठहराते हुए उन्होंने आर्बिट्रेटर के फैसलों पर अंगुली उठाने पर सवाल खड़े किए हैं। उधर, सरकार के सख्त रुख से हलकान दोनों आइएएस अधिकारियों ने कार्मिक अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी से मुलाकात की। इनमें एक अधिकारी ने प्रमुख सचिव गृह और उत्तराखंड आइएएस एसोसिएशन के महासचिव आनंदबद्र्धन से मुलाकात की।

ऊधमसिंह नगर जिले के चर्चित एनएच-74 मुआवला घपले में पीसीएस अधिकारियों पर शिकंजा कस चुका है, वहीं पहली बार इस मामले में दो आइएएस अधिकारियों पर भी एसआइटी जांच रिपोर्ट के बाद घेरा कस गया है। वहीं इस मामले में सरकार ने जीरो टॉलरेंस के अपने रवैये को और सख्त किया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के दोनों अधिकारियों को जांच का सामना करने की नसीहत के बाद आइएएस अधिकारियों में खलबली है। नतीजतन छुट्टियों पर चल रहे उक्त दोनों अधिकारी शुक्रवार को सचिवालय पहुंचे। उक्त दोनों अधिकारियों की छुट्टियों पर अंतिम फैसला मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह के विदेश दौरे से लौटने के बाद होना है।

उक्त दोनों अधिकारियों को मुख्य सचिव की ओर से दिए गए नोटिस का जवाब दाखिल करने का शुक्रवार को अंतिम दिन था। आइएएस चंद्रेश यादव जहां कल अपना जवाब भेज चुके थे, वहीं डॉ पंकज पांडे ने शुक्रवार को सरकार को अपना जवाब सौंप दिया। उक्त दोनों अधिकारियों ने अपर मुख्य सचिव कार्मिक राधा रतूड़ी से भी मुलाकात की। हालांकि, इस मुलाकात के बारे में खुले तौर पर स्वीकारोक्ति को लेकर संबंधित सभी अधिकारी चुप्पी साधे रहे।

सूत्रों के मुताबिक डॉ पंकज पांडेय ने अपने जवाब में ऑर्बिट्रेटर की दोनों पक्षों में सहमति बनाकर फैसला लेने के मामले में सवाल खड़े किए जाने पर आपत्ति की है। उन्होंने नोटिस में उठाए गए बिंदुओं का जवाब दिया है। संपर्क करने पर डॉ पंकज पांडे ने स्वीकार किया कि उन्होंने शुक्रवार को अपना जवाब दे दिया है, लेकिन उन्होंने अपने जवाब के बारे में बताने से इन्कार कर दिया।

आइएएस एसोसिएशन को दी जानकारी

डॉ पंकज पांडेय ने सचिवालय में प्रमुख सचिव गृह और आइएएस एसोसिएशन के महासचिव आनंदवर्द्धन से भी मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने प्रमुख सचिव गृह से एसआइटी जांच रिपोर्ट को लेकर भी चर्चा की। साथ ही आइएएस एसोसिएशन के महासचिव के नाते उनके सामने अपना पक्ष विस्तार से रखा। बताया जा रहा है कि दोनों आरोपित आइएएस अधिकारियों ने एसोसिएशन से भी सहयोग की अपेक्षा की है। सरकार के रुख को देखकर एसोसिएशन भी इस मामले में सधा रुख अपनाना बेहतर समझ रही है।

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