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बाघ के शिकार के मामले में 2 लोगों को तीन वर्ष और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा

बाघ के शिकार के मामले में 2 लोगों को तीन वर्ष और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा

ऋषिकेश: राजाजी टाइगर रिजर्व की गोहरी रेंज में साढे चार वर्ष पूर्व बाघ के शिकार के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पौड़ी ने 2 लोगों को तीन-तीन वर्ष की सजा और 10-10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।

राजाजी पार्क की गोहरी रेंज के अंतर्गत विंधवासनी कक्ष संख्या छह में 7 फरवरी 2013 को एक बाघ का शव बरामद किया गया था। समीप ही एक जंगली सूअर का शव मिला था। उसका कुछ मास खाया हुआ था। संबंधित मामले में वन रक्षक सतेश्वर प्रसाद जखमोला और अनूप सिंह भिडोला ने अज्ञात लोगों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कराया था। इस मामले की विवेचना वन्य जीव प्रतिपालक राजाजी पार्क विक्रम सिंह द्वारा की गई थी। पार्क निदेशक सनातन सोनकर प्रतिमाह इस मामले की रिपोर्ट ले रही थे। जांच के दौरान इस बात की पुष्टि हुई कि बाघ की मौत जहर से हुई है और वहां सूअर के शव में भी जहर पाया गया है।

जांच में अब्दुल गनी पुत्र नूर आलम और सद्दाम उर्फ आलम पुत्र गुलाम रसूल दोनों निवासी कक्ष संख्या 6 विंधवासनी गोहरी रेंज के नाम सामने आए। जिसके बाद विभाग की टीम ने इन दोनों को गिरफ्तार किया था और इनकी निशानदेही पर जहर की एक बोतल बरामद की गई। फॉरेंसिक जांच में इस बात की पुष्टि हुई थी कि बाघ और सूअर के शरीर में मिले जहर और बोतल में मिले जहर एक ही है।

संबंधित मामले की सुनवाई मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी पौड़ी सुधीर कुमार सिंह के न्यायालय में चल रही थी। विभाग के अधिवक्ता राजेश त्रिवेदी ने बताया कि गुरुवार को न्यायालय द्वारा दोनों आरोपितों को दोषी पाते हुए तीन तीन साल की सजा और 10-10 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। दोनों ही दोषी रिश्ते में भाई हैं।

मवेशी खाने का प्रतिशोध लिया था

बाघ के शिकार के आरोप में गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों ने विवेचना अधिकारी को बताया कि यह बात उनके मवेशी निरंतर मार रहा था। जिस कारण उन्होंने इसे मारने की योजना बनाई। जिसके लिए किसी जानवर द्वारा मारे गए जंगली सूअर को चुना गया। बाघ के भ्रमण क्षेत्र में उसके शव को डाला गया। सूअर के शव में जहर मिलाने के बाद दोनों लोग वहां से चले आए। योजना के मुताबिक बाघ ने इस सूअर का मांस खाया और उसके जहर से बाघ की मौत हो गई।

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