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उत्तराखंड में अब 12 हजार कार्मिकों को बंद होगी मुफ्त बिजली

उत्तराखंड में अब 12 हजार कार्मिकों को बंद होगी मुफ्त बिजली

उत्तराखंड में अब 12 हजार कार्मिकों को बंद होगी मुफ्त बिजली, पढ़िए पूरी खबर
बिजली का बेतहाशा और बेरोकटोक इस्तेमाल करने वाले ऊर्जा के तीनों निगमों के सभी तकरीबन साढ़े बारह हजार कार्मिकों की सुविधा पर कैंची चलने जा रही है।
देहरादून,  माले मुफ्त दिले बेरहम यानी बिजली का बेतहाशा और बेरोकटोक इस्तेमाल करने वाले ऊर्जा के तीनों निगमों के सभी तकरीबन साढ़े बारह हजार कार्मिकों की सुविधा पर कैंची चलने जा रही है। ऊर्जा सचिव राधिका झा ने तीनों निगमों के कार्मिकों को मिलने वाली इस सुविधा को खत्म किए जाने के संबंध में ऊर्जा निगम की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव रखने के निर्देश दिए हैं। ऊर्जा निगमों के कार्मिकों पर मेहरबान रही सरकार को अब यह सख्त कदम उठाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका में ऊर्जा निगमों के कार्मिकों को मिलने वाली मुफ्त बिजली की सुविधा दिए जाने को चुनौती दी गई है। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब तलब किया है। सरकार इस मामले में हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करने की तैयारी में है।

दरअसल, एक ओर प्रदेश के 21 लाख से ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं को बिजली के उपयोग के लिए अच्छी-खासी कीमत चुकानी पड़ रही है। बिजली के टैरिफ में साल-दर-साल वृद्धि हो रही है। दूसरी ओर लाइन लॉस को रोकने में ऊर्जा विभाग को अब तक कामयाबी नहीं मिल पाई है। बिजली उपभोक्ता दो पाटों पर पिसने को मजबूर है। एक ओर बिजली टैरिफ में वृद्धि तो दूसरी ओर गाहे-बगाहे बिजली कटौती की समस्या बनी हुई है। कभी बिजली संकट या ब्रेकडाउन तो बिजली सुधारीकरण के नाम पर बिजली कटौती से उपभोक्ता जूझ रहे हैं।
इन हालातों में ऊर्जा के तीनों निगमों के कार्मिकों को मिलने वाली मुफ्त बिजली का खर्च आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। हाईकोर्ट ने भी इन सभी बिंदुओं पर सरकार से जवाब मांगा है। ऊर्जा निगम में करीब आठ हजार, जलविद्युत निगम में करीब 2500 और पिटकुल में करीब 1800 कार्मिक कार्यरत हैं। इन निगमों में कार्यालयों से लेकर फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों से लेकर आला अभियंताओं तक, सभी को मुफ्त बिजली का उपभोग करने की छूट है।
खास बात ये है कि उपभोग सीमा तय करने का साहस सरकार जुटा नहीं सकी है। हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार ने इस सुविधा को खत्म करने का मन बना लिया है। ऊर्जा सचिव राधिका झा ने बताया कि मुफ्त बिजली सुविधा खत्म करने के संबंध में ऊर्जा निगम बोर्ड में प्रस्ताव रखा जाएगा। इस संबंध में निगम के आला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।

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