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पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम नहीं रहे, दिल्ली एम्स में ली अंतिम सांस

पूर्व केंद्रीय मंत्री पंडित सुखराम शर्मा का दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में मंगलवार-बुधवार की मध्य रात्रि को निधन हो गया। वह 95 वर्ष के थे। सुखराम को ब्रेन स्ट्रोक के कारण पिछले शनिवार को एम्स में भर्ती किया गया था। एम्स से मिली जानकारी के मुताबिक, मंगलवार-बुधवार की मध्य रात्रि 1:40 बजे उन्होंने आखिरी सांस ली।

वहीं, पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, बृहस्पतिवार सुबह 11 बजे पंडित सुखराम शर्मा के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शनों के लिए हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर के ऐतिहासिक सेरी मंच पर रखा जाएगा। यहां पर स्थानीय नेता उनके अंतिम दर्शन कर सकेंगे, और फिर इसके बाद हनुमानघाट स्थित शमशानघाट पर उनका पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। पंडित सुखराम के निधन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा व राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने गहरा शोक जताते हुए इसे प्रदेश के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

सूत्रों के मुताबिक, ब्रेन स्ट्रोक के बाद दिल्ली के एम्स में भर्ती सुखराम को मंगलवार की रात को फिर से दिल का दौरा पड़ा था, जिसके चलते उनका निधन हो गया। बता दें कि इससे पहले 9 मई की रात को भी सुखराम को दिल का दौरा पड़ने के कारण लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था। उनके पोते आश्रय शर्मा ने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से अपने दादा सुखराम के निधन की जानकारी दी है। उन्होंने लिखा है- अलविदा दादा जी, अब नहीं बजेगी टेलीफोन की घंटी।

ब्रेन स्ट्रोक बाद हालत थी गंभीर

बता दें कि पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता सुखराम शर्मा को पिछले सप्ताह 4 मई को हिमाचल प्रदेश के मनाली में ब्रेन स्ट्रोक हुआ था। उनकी हालत को देखते हुए मंडी स्थि एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालात में सुधार नहीं होने पर सुखराम शर्मा को शनिवार को दिल्ली स्थिति एम्स में बेहतर इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। दिल्ली स्थित एम्स इलाज के लिए लाने के लिए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सात मई को सरकारी हेलीकाप्टर मुहैया करवाया था।

हिमाचल प्रदेश के दिग्गज नेताओं में शुमार रहे सुखराम शर्मा लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे। उनकी राजनीतिक हैसियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सुखराम शर्मा 1993 से 1996 केंद्रीय संचार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहे थे। हालांकि, उन पर संचार घोटाले का भी आरोप लगा था।

यहां पर बता दें कि हिमाचल प्रदेश के चर्चित मंडी लोकसभा सीट पर सांसद भी रहे थे। इसके अलावा, वह पांच बार विधानसभा तथा तीन बार लोकसभा चुनावों में जीत हासिल की थी।

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