लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने कहा कश्मीर के बच्चे ही हमारी उम्मीद हैं।

कश्मीर के बच्चे ही हमारी उम्मीद : रणबीर सिंह
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राज्य ब्यूरो, श्रीनगर: सेना की उत्तरी कमान के जीओसी इन सी लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने अभिभावकों और शिक्षकों का फर्ज है कि वह बच्चों का भविष्य बेहतर बनाएं। वह इस बात को यकीनी बनाएं कि बच्चों की पढ़ाई में किसी तरह की बाधा पैदा न हो। कश्मीर के बच्चे ही हमारी उम्मीद हैं। हमें इस बात का पूरा यकीन है कि आने वाले समय में वह और कड़ी मेहनत करेंगे। उनमें बड़ी संभावना है। वह इस समाज और देश के जिम्मेदार नागरिक बनकर कश्मीर समेत पूरे राष्ट्र को विकास व खुशहाली के ऊंचे मुकाम पर ले जाएंगे।

अनंतनाग में वुजर स्थित आर्मी गुडविल स्कूल में वीरवार को आयोजित कार्यक्रम में शहीद लांस नायक नजीर अहमद वानी को श्रद्धांजलि देने के बाद लेफ्टिनेंट जनरल ने कहा कि राज्य में सेना अपने सभी अभियान पूरी तरह पेशेवर तरीके से अंजाम दे रही है। सेना सामाजिक मूल्यों के प्रति सम्मान बनाए रखते के हुए अपना काम करती है। भारतीय सेना दुनिया के उन गिनी चुनी सेनाओं में एक है जो मानवीय और सामाजिक मूल्यों को लेकर अत्यंत संवेदनशील है। राज्य में आतंकी हिसा और सरहद पार से घुसपैठ के सवाल पर उन्होंने कहा कि स्थिति पूरी तरह से सुरक्षाबलों के नियंत्रण में है। हमारे जवान व अन्य सुरक्षा एजेंसियां किसी भी चुनौती से निपटने में समर्थ हैं। राज्य में आतंकी हिसा में कमी आई है। अधिकांश आतंकी कमांडर मारे जा चुके हैं और जो बचे हैं उनके खिलाफ अभियान जारी है। अमरनाथ यात्रा पर आतंकी खतरे के सवाल पर उन्होंने कहा कि हम यात्रा में किसी को भी खलल डालने का मौका नहीं देंगे। शहीद नजीर वानी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह हम सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं, उन्हें दो बार सेना मेडल से भी सम्मानित किया गया था। सेना में आने से पहले आतंकी थे शहीद नजीर

शहीद नजीर अहमद वानी सेना में लांस नायक थे। जिला कुलगाम के अशमुजी गांव के रहने वाले नजीर अहमद वानी सेना में भर्ती होने से पहले आतंकी ही थे, लेकिन उन्हें जल्द ही आतंकवाद और कश्मीर में आजादी के नारे की असलियत समझ आ गई। वह आतंकवाद से नाता तोड़ इख्वान का हिस्सा बन गए। इख्वान उन पूर्व आतंकियों का समूह था जो आतंकी हिसा छोड़ सेना, पुलिस व अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर आतंकियों के सफाए में जुटा था। नजीर ने बतौर इख्वान कमांडर कुलगाम और उसके साथ सटे इलाकों में कई नामी आतंकियों को मार गिराने मे अहम भूमिका निभाई थी। उनकी बहादुरी को देखकर ही उन्हें सेना में बतौर नियमित सैनिक शामिल किया गया था। वह 25 नवंबर 2018 को बटगुंड कुलगाम में आतंकरोधी अभियान के दौरान शहीद हो गए थे। इस अभियान में छह आतंकी मारे गए थे और उनमें से तीन को नजीर अहमद वानी ने ही ढेर किया था। वह अशोक चक्र प्राप्त करने वाले कश्मीर के पहले सैनिक हैं।

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