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लक्ष्य से कम हाउस टैक्स वसूली होने से महापौर सुनील उनियाल गामा ने जताई नाराजगी

लक्ष्य से कम हाउस टैक्स वसूली होने से महापौर सुनील उनियाल गामा ने जताई नाराजगी

देहरादून। नगर निगम में हाउस टैक्स की कम वसूली को लेकर महापौर सुनील उनियाल गामा खासे नाराज दिखे। कर अनुभाग के औचक निरीक्षण में महापौर ने अधिकारियों से अब तक जमा हुए टैक्स की जानकारी ली तो पता चला कि अब तक केवल साढ़े सत्रह करोड़ रुपये की वसूली हुई है। जिस पर महापौर ने नाराजगी जताई व कहा कि वित्तीय वर्ष खत्म होने वाला है और ऐसी स्थिति अच्छी नहीं। दरअसल, नगर निगम का टैक्स का लक्ष्य 30 करोड़ रुपये है।

महापौर ने वार्डों में अधिक से अधिक कैंप लगाकर टैक्स वसूली के निर्देश दिए। उन्होंने बकायेदारों को नोटिस भेज टैक्स वसूली करने की कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश भी दिए। टैक्स न चुकाने वालों पर जुर्माने के संग टैक्स वसूली के निर्देश दिए गए।

महापौर ने दाखिल खारिज के साथ ही नामांतरण के मामलों की जानकारी भी ली। पूछताछ में पता चला कि एक दर्जन मामले सुनवाई न होने की वजह से लटके हुए हैं और लोग धक्के खा रहे। महापौर ने अपर आयुक्त को इन मामलों का निस्तारण करने के निर्देश दिए। लोक निर्माण अनुभाग और ऊर्जा अनुभाग समेत निर्माण अनुभाग का ब्योरा भी तलब किया गया है। ताकि, इनमें अब तक आई शिकायतों व निस्तारण की जानकारी मिल पाए।

महापौर ने कहा कि जनता के कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। कोई कर्मचारी कार्यों में लापरवाही बरतता पाया गया तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

इस दौरान मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. कैलाश चंद्र जोशी, वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. आरके सिंह, कर अधीक्षक विनय प्रताप, प्रभारी अधिशासी अभियंता रचना पयाल, भूमि कर अधीक्षक धर्मेश पैन्यूली आदि मौजूद रहे।

पुराने सफाई कर्मियों को पांच मार्च तक हटाने का अल्टीमेटम

शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा उठान का काम देख रहे सभी 280 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। दरअसल, कूड़ा उठान के लिए चयनित चेन्नई एमएसडब्लू ने सात वार्ड में काम शुरू करने के बाद अब शहर के सभी 60 वार्डों में काम शुरू करने की तैयारी कर ली है।

ऐसे में नगर निगम द्वारा अब तक यह जिम्मा संभाल रही चंडीगढ़ की भार्गव कंपनी के आउट-सोर्स के सभी कर्मचारियों को हटाना शुरू कर दिया है। इससे कर्मचारियों में हड़कंप मचा है। सात वार्ड के कर्मचारियों की पहले ही छुट्टी कर दी गई है।

वर्ष 2011 में पहली बार दून में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट परियोजना के तहत डोर टू डोर कूड़ा उठान का काम शुरू किया गया था। तब निगम ने दून वैली वेस्ट मैनेजमेंट के माध्यम से शहर में काम शुरू किया था लेकिन 2014 में कंपनी के ब्लैकलिस्ट होने के बाद नगर निगम ने इन सभी कर्मचारियों को आउट-सोर्सिंग के माध्यम से निगम में रख लिया।

इन कर्मचारियों को चंडीगढ़ की मैसर्स भार्गव कंपनी के माध्यम से भुगतान किया जाता रहा। हालांकि, अब निगम द्वारा एक बार फिर डोर टू डोर कूड़ा उठान का काम रैमकी कंपनी के माध्यम से शुरू कर दिया गया है। इस सूरत में इन कर्मचारियों को हटाना जरूरी हो गया है।

रैमकी कंपनी अपने आप नए स्टाफ की भर्ती कर रही है। कंपनी ने पुराने अधिकांश कर्मचारियों को लेने से इन्कार कर दिया है जिसके बाद से इन कर्मचारियों के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है। चरणबद्ध ढंग से सभी कर्मियों को हटाया जा रहा है। निगम ने मैसर्स भार्गव फैसिलिटेटर को पत्र जारी कर कर्मचारियों को पांच मार्च तक हटाने का अल्टीमेटम दिया है। मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. कैलाश जोशी के अनुसार चेन्नई एमएस डब्लू कंपनी से हुए अनुबंध के अनुसार ही कर्मचारियों को हटाया जा रहा है।

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