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मेरठ के सर्राफ पिता-पुत्र और वरिष्ठ नागरिक से हुई लूट में फरार आठ बदमाशों को पकड़ने की चुनौती बरकरार

मेरठ के सर्राफ पिता-पुत्र और वरिष्ठ नागरिक से हुई लूट में फरार आठ बदमाशों को पकड़ने की चुनौती बरकरार

देहरादून। घंटाघर में मेरठ के सर्राफ पिता-पुत्र और चाटवाली गली में वरिष्ठ नागरिक से हुई लूट का पुलिस ने आनन-फानन में खुलासा तो कर दिया है, लेकिन इन दोनों वारदातों में फरार आठ बदमाशों को पकड़ने की चुनौती अभी बरकरार है। फिलहाल पुलिस का फोकस इन दिनों फाइनेंस कंपनी में हुई लूट के पर्दाफाश पर है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या फरार अपराधियों की गिरफ्तारी को दून पुलिस फिर कोई वारदात होने का इंतजार कर रही है।

बता दें कि मेरठ के सर्राफ पिता-पुत्र से 13 नवंबर को हुई 15 लाख के सोने-चांदी के आभूषणों की लूट के आरोपित ईरानी गैंग के छह सदस्यों में से केवल एक की ही गिरफ्तारी हुई है। इस वारदात में शामिल पांच अन्य बदमाश भूमिगत हैं, जिनके बारे में पुलिस के पास कोई लीड नहीं है। वारदात में गिरफ्तार सदस्य जाफर के पास से पुलिस को दस हीराजडि़त अंगूठियां तो मिल गई, लेकिन अभी आठ से दस लाख रुपये का माल बरामद नहीं हो सका है। वहीं, चाटवाली गली में बीएसएनएल के सेवानिवृत्त कर्मचारी नरेंद्र आहूजा से छह दिसंबर को हुई 1.15 लाख रुपये की लूट में आरोपित मुरादाबाद के शेख गैंग के चार में से एक सदस्य को गिरफ्तार किया जा सका है। उसके पास से महज आठ हजार रुपये की नगदी बरामद हुई है। शेष रकम की बरामदगी बाकी होने के साथ फरार तीन बदमाशों को पकडऩे की भी चुनौती बरकरार है।

सर्राफ पिता-पुत्र से लूट के वांछित

जहीर अली (गैंग लीडर) निवासी रेलवे कॉलोनी, ईरानी बस्ती, थाना संभाजीनगर, परली महाराष्ट्र, अमजद अली, मोहसिन अली, इकबाल निवासी ईरानी मोहल्ला, बदरूद्दीन कॉलोनी छिदरी रोड बीदर कर्नाटक व तालिब उर्फ सन्नाटा निवासी ईरानी गली शिवजी नगर थाना संभाजी नगर परली महाराष्ट्र।

चाटवाली गली लूटकांड के वांछित

  • महबूब उर्फ गटुवा (गैंग लीडर) निवासी कांठ की पुलिया, चौकी तहसील थाना नागफनी, मुरादाबाद
  • राजा पुत्र निवासी सबजरखां वाली गली, मोहल्ला दर्जियान, थाना नागफनी, मुरादाबाद
  • शोएब निवासी खिन्नी बाली जियारत के पास, मोहल्ला सराय खालसा, थाना सिविल लाइन, मुरादाबाद

बोले अधिकारी

  • अजय रौतेला (डीआइजी) का कहना है कि दोनों वारदातों के फरार बदमाशों की धरपकड़ को टीमें लगी हैं। इसके साथ आरोपितों के खिलाफ जल्द ही कुर्की की भी कार्रवाई आरंभ कर दी जाएगी।

डेटा डंप ने भी दून पुलिस को किया निराश

फाइनेंस कंपनी में दिनदहाड़े हुई लूट की वारदात को अंजाम देने वाले बदमाशों तक पहुंचने को अपनाए जा रहे सारे हथकंडे फिलहाल विफल ही साबित हो रहे हैं। एक सप्ताह तक घटनास्थल के इर्द-गिर्द सक्रिय हजारों मोबाइल फोन का डाटा खंगालने के बाद भी पुलिस के हाथ गैंग का कोई सुराग नहीं लगा है। वहीं, मुखबिर तंत्र पहले ही फेल हो चुका है। बता दें, कि बीते 30 नवंबर को राजपुर रोड पर मीडो कॉम्पलेक्स में स्थित आइआइएफएल गोल्ड लोन कंपनी में चार हथियारबंद बदमाशों ने वहां के कर्मचारियों और ग्राहकों को दो घंटे तक बंधक बनाकर रखा था।

इस दौरान एक सोने की चेन और 50 हजार रुपये कैश भी लूट ले गए थे। बदमाशों ने कंपनी के स्ट्रांग रूम में रखे लॉकर को भी तोड़ने का प्रयास किया था, लेकिन नाकाम रहे थे। बताया जा रहा है कि इस लॉकर में दस करोड़ से अधिक का सोना और कैश रखा हुआ था। हाल के वर्षो में यह अब तक की सबसे दुस्साहसिक वारदात रही, जिसने पूरे पुलिस तंत्र को खुली चुनौती दे डाली है। प्रारंभिक जांच में पुलिस लुटेरों के किसी शातिर गैंग का हाथ होने के साथ अंदरखाने की मिलीभगत को लेकर बारीकी से पड़ताल की, लेकिन न तो गैंग के बारे में कोई क्लू ढूंढा जा सका और न ही अंदरखाने की मिलीभगत की ही बात पुष्ट हो पाई। वहीं, मीडो कॉम्पलेक्स के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों से कोई सुराग नहीं मिला।

इन सब तकनीकी पहलुओं के विफल होने के बाद पुलिस ने डेटा डंप के जरिए उन मोबाइल को खंगालने की कोशिश की तो वारदात की अवधि में मीडो के आसपास सक्रिय थे। सूत्रों की मानें तो पुलिस ने संबंधित क्षेत्र में सभी मोबाइल कंपनियों से इसका ब्योरा मांगा था। जिसमें हजारों की संख्या में मोबाइल नंबर पुलिस को उपलब्ध कराए गए थे। पुलिस इसमें से 70 फीसद मोबाइल धारकों का सत्यापन भी कर चुकी है, लेकिन अब तक कोई ऐसा मोबाइल नंबर नहीं मिला, जिस पर शक पुख्ता हो सके।

तो मोबाइल का नहीं हुआ प्रयोग 

डेटा डंप में किसी भी संदिग्ध मोबाइल नंबर के न मिलने से एक बात की आशंका बढ़ गई है कि वारदात की योजना बेहद शातिराना तरीके से बनाई थी। बदमाशों को डर था कि यदि मोबाइल का प्रयोग किया तो पुलिस आज नहीं तो कल उन पहुंच ही जाएगी।

सीसीटीवी कैमरों ने भी किया निराश

पुलिस वारदात के बाद कॉम्पलेक्स से लेकर शहर के बाहर जाने वाले रास्तों पर लगे ढाई सौ से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चेक कर चुकी है। लेकिन किसी भी फुटेज में बदमाशों के बारे में कोई लीड नहीं मिली। क्या होता है डेटा डंप डेटा डंप में पुलिस इलाके में लगे सभी मोबाइल कंपनियों के बीटीएस से वहां सक्रिय सभी मोबाइल का डाटा लेती है। फिर उनमें से संदिग्ध नंबरों की पहचान की जाती है। दिसंबर 2016 में नाभा जेल ब्रेक के बाद भागे खालिस्तानी आतंकियों की धरपकड़ के लिए पंजाब और दून पुलिस ने इस तकनीकी का सहारा लिया था।

बोले अधिकारी

  • निवेदिता कुकरेती (एसएसपी) का कहना है कि बदमाशों की पहचान के लिए हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं। कुछ महत्वपूर्ण जानकारी मिली है, जिस पर टीमों को टास्क सौंपा गया है।

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