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अब शहर में सुचारू होगा डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने का काम

अब शहर में सुचारू होगा डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने का काम

देहरादून: शहर में पीपीपी मोड में कूड़ा उठान की नगर निगम की कसरत दस माह बाद परवान चढ़ गई। गुरुवार को नगर निगम और रैमकी कंपनी के बीच करार पर हस्ताक्षर हो गए। कसरत दस माह पूर्व शुरू हुई थी लेकिन दरों को लेकर नगर निगम और कंपनी में ठनी हुई थी। अब मामला सुलझा लिया गया है तो शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा उठान का काम भी सुचारू होने जा रहा। सबकुछ तयशुदा और व्यवस्थित तरीके से चला तो अक्टूबर के पहले हफ्ते से डोर-टू-डोर कूड़ा उठान की व्यवस्था पटरी पर आ जाएगी। वर्तमान व्यवस्था में निगम खुद यह जिम्मा संभाल रहा और स्थिति यह है कि वार्डों में हफ्ता बीतने पर भी कूड़ा उठान गाडियां नहीं जा रहीं।

वर्ष 2011 तक शहर में जहां देखो वहीं कूड़ा फेंक दिया जाता था पर 11 अगस्त को जेएनएनयूआरम के तहत डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का काम शुरू किया गया। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के तहत यह काम डीवीडब्लूएम को मिला। शुरुआत में कंपनी को 15 वार्ड दिए, बाद में पूरे साठ वार्ड दे दिए गए। कंपनी द्वारा तीन चरण में 45 वार्डों से कूड़ा कलेक्शन के लिए 42 टाटाऐस वाहन खरीदे गए, मगर चौथे चरण में कोई वाहन खरीदा ही नहीं गया, जबकि वार्ड पूरे 60 कंपनी के पास आ गए। निगम सूत्रों की मानें तो डीवीडब्लूएम ने 45 वार्ड की जिम्मेदारी तक तो ठीक व्यवस्था निभाई मगर इसके बाद कंपनी बेपटरी होती चली गई।

तमाम विरोध होने पर मार्च 2014 में नगर निगम द्वारा कंपनी से करार तोड़ लिया गया और डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का जिम्मा अपने कंधों पर ले लिया। हालात ये हो गए कि जहां कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था जैसे-तैसे चल रही थी, वहां भी ठप पड़ती चली गई। इन दिनों गाडिय़ां हफ्तेभर तक  गली व मोहल्लों में नहीं पहुंच रही। कूड़ा उठान की बागडोर निगम के पास आई, तब से शहर में चारों तरफ गंदगी पसरी हुई है और कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। निगम कर्मी अफसरों को गच्चा देकर काम के दावे कर रहे हैं मगर हकीकत गंदगी के ढेर बयां कर रहे हैं। वीवीआइपी इलाका यमुना कालोनी हो या नेशविला रोड-पटेलनगर। हर तरफ गंदगी ही गंदगी पसरी हुई है। इसी वजह से अब यह जिम्मा शीशमबाड़ा में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का संचालन कर रही रैमकी कंपनी से जुड़ी एमएसडब्लू कंपनी को दिया गया है।

नगर आयुक्त विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि कंपनी के साथ शर्तों को लेकर जो तकनीकी दिक्कतें थीं, वे दूर कर करार पर हस्ताक्षर हो गए हैं। मौजूदा व्यवस्था में जिन वाहनों व उपकरणों से कूड़ा उठान हो रहा है वह नई कंपनी को ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। कंपनी के पास काम शुरू करने के लिए दो माह का समय है लेकिन प्रयास है कि अक्टूबर के पहले हफ्ते से कूड़ा उठान पीपीपी मोड में शुरू कर दिया जाए। करार के दौरान अपर नगर आयुक्त नीरज जोशी व वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. आरके सिंह व रैमकी के प्रोजेक्ट मैनेजर मोहित द्विवेदी आदि मौजूद रहे।

फिलहाल पुराना यूजर चार्ज रहेगा 

नगर आयुक्त ने बताया कि अभी यूजर चार्ज में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की जा रही है। फिलहाल, घरों से डोर-टू-डोर उठान का चार्ज प्रतिमाह 50 रुपये ही रहेगा।

समय भी बिगाड़ रहा व्यवस्था 

कूड़ा उठान बेपटरी की एक वजह समय से काम न करना भी है। कर्मचारी सुबह के बजाए दोपहर में कूड़ा उठाने निकलते हैं व जब तक वे कूड़ा उठाते हैं तब तक दोपहर का कूड़ा डंप होना शुरू हो जाता है। पुराने कूड़े के उठते-उठते ही नया कूड़ा शहर में पड़ चुका होता है। शहर कभी साफ नजर ही नहीं आता।

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