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जान जोखिम में डालकर कोल्हू नदी को पार कर रहे लोग, जलस्तर घटने की नहीं उम्मीद

जान जोखिम में डालकर कोल्हू नदी को पार कर रहे लोग, जलस्तर घटने की नहीं उम्मीद

कोटद्वार, पौड़ी गढ़वाल : बस्ते आलमारियों में कैद हैं और बच्चे उछल-कूद में मस्त। हालांकि, मां-बाप चाहते हैं कि उनके पाल्य स्कूल जाएं, लेकिन कोल्हू नदी का प्रचंड वेग उनकी मंशा पर पानी फेर रहा है। यहां करीब पंद्रह दिन से बच्चे स्कूल तक नहीं जा पा रहे हैं।

कोटद्वार-सनेह-कालागढ़ मोटर मार्ग पर सनेह से कालागढ़ के मध्य बढ़ापुर, कादरगंज, पाखरो, बगनाला, भूमिदान, खोबड़ा, तिलक्या, रामजीवाला, ढकिया, बावनसराय, कैंचीवाला सहित कई गांव पड़ते हैं। लेकिन, विडंबना देखिए कि तकरीबन 20 हजार की आबादी वाले इस क्षेत्र का सड़क संपर्क बरसात शुरू होते ही कोटद्वार से कट जाता है। वजह है कोल्हू नदी, जो इन दिनों भी इन गांवों की राह रोके हुए है। कोटद्वार-सनेह-कालागढ़ मार्ग पर सनेह के समीप से गुजरने वाली कोल्हू नदी बरसात में भीषण रूप ले लेती है। ऐसे में जरूरी काम से कोटद्वार आने वालों को जान जोखिम में डालकर उसे पार करना पड़ता है।

इस क्षेत्र से लगभग ढाई सौ बच्चे भी सनेह क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों में अध्ययन के लिए पहुंचते हैं। जो पिछले 15 दिन से आने गांवों में कैद होकर रह गए हैं और मौसम के मिजाज को देखते हुए फिलहाल जलस्तर घटने की भी उम्मीद नहीं है।

विदित हो कि क्षेत्र के ग्रामीण बीते कई वर्षो से कोल्हू नदी पर पुल बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज नक्कारखाने में तूती साबित हो रही है।

हादसे कई, प्रयास शून्य 

बरसात के दौरान हर साल कोई-न-कोई वाहन कोल्हू नदी की भेंट चढ़ जाता है। बीते वर्षो में ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं। करीब एक दशक पूर्व एक कार के नदी पार करते समय बहने से उसमें सवार पांच लोगों की डूबकर मौत हो गई थी। लेकिन, इन हादसों के बाद भी प्रशासन नहीं चेता।

ट्रैक्टर से पार कर रहे नदी 

स्कूली बच्चे भले ही घरो में कैद हों, लेकिन कोटद्वार बाजार पर निर्भर दुग्ध विक्रताओं सहित अन्य ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए कोटद्वार आना पड़ता है। ऐसे में कुछ ग्रामीणों ने नदी तट पर अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़े किए हुए हैं। ग्रामीण इन ट्रैक्टरों के जरिए ही नदी पार कर रहे हैं।

पुल के लिए शासन भेजा ऐस्टीमेट  

लोनिवी दुगड्डा के अधिशासी अभियंता निर्भय सिंह के अनुसार पुल निर्माण के संबंध में दो-तीन माह पूर्व एस्टीमेट शासन में भेजा गया है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद ही पुल निर्माण का कार्य शुरू हो पाएगा।

बच्चों को स्कूल पहुंचाने की नहीं है व्यवस्था 

उपखंड शिक्षा अधिकारी आशुतोष शुक्ला के मुताबिक बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने की व्यवस्था अभिभावकों को ही करनी पड़ती है। विभाग की ओर से बच्चों को स्कूल तक लाने के लिए फिलहाल किसी तरह की व्यवस्था का प्राविधान नहीं है।

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