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पेट्रोल भरवाते हैं, क्या उसकी सच्चाई जानते हैं?

पेट्रोल भरवाते हैं, क्या उसकी सच्चाई जानते हैं?

नई दिल्ली। महीने की शुरूआत और आखिर में लोगों को अपनी जेब की चिंता सताने लगती है क्योंकि पेट्रोल और डीजल की कीमतें तय की जाती है। पेट्रोल और डीजल पर महीने में दो बार समीक्षा होती है जिसमें तेल कंपनियां इस बात का फैसला लेती है कि कच्चे तेल की कीमत में क्या इजाफा या कमी आई है उसी हिसाब से हर महीने पेट्रोल या डीजल की कीमतों को घटाया या बढ़ाया जाता है।

लेकिन, सबसे बड़ी बात ये है कि लोगों को पेट्रोल और डीजल के मामले में दोतरफा मार पड़ती है। एक तरफ जहां कई पेट्रोल पंपों पर इलैक्ट्रोनिक चिप लगाकर उसकी चोरी की जाती है तो वहीं दूसरी तरफ लोगों को टैक्स के तौर पर सरकार को पेट्रोल की वास्तविक कीमत का करीब 153 फीसद टैक्स के तौर पर चुकाना पड़ता है।

पेट्रोल पर समझिए टैक्स का खेल

नीचे दिए गए तस्वीरों से चीजें बिल्कुल स्पष्ट हो जाएंगी कि कैसे तेल कंपनियां मार्केटिंग खर्च जोड़कर 29.54 रूपये प्रति लीटर पेट्रोल बेचती है। लेकिन यही पेट्रोल मुंबई में ड्यूटी और सेस लगने के बात लोगों को 77 रूपये 50 पैसे मिलता है।

वास्तविक कीमत से 153% ज्यादा चुकाते है उपभोक्ता

यहां पर, उपभोक्ताओं को टैक्स और ड्यूटी के रूपय में पेट्रोल की वास्तविक कीमत से 47.96 रूपये ज्यादा चुकाना पड़ता है। जिनमें केन्द्रीय उत्पाद शुल्क, स्टेट वैट, चुंगी, सेस और पेट्रोल पंक मालिकों का कमीशन शामिल है। यानि, उसकी वास्तविक कीमत का करीब 153 फीसद टैक्स के रूप में चुकाना पड़ता है। सरकार के साथ बेहद करीब से काम कर रहे एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री ने अपना नाम ना बताने की शर्त पर बताया कि सरकार अपनी आमदनी को बढ़ाने का प्रयास करने के लिए वह पेट्रोल पर सेस बढ़ा रही है।

ऐसे समय में जब ऋण की सीमा 4.13 लाख करोड़ पार कर चुकी है तो अतिरिक्त खर्च के लिए उधार को और नहीं बढ़ाया जा सकता है। वस्तुओं पर अतिरिक्त शुल्क और सेस (जीएसटी लागू होने के बाद दायरा सीमित हो जाएगा) ही एक मात्र विकल्प बचता है। हालांकि, अन्य लोगों का मत है कि मौजूदा स्थिति में पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी का महंगाई पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि अधिकर तो गाड़ियां सामानों की आवाजाही में शामिल हैं उनमें पेट्रोल का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

वैसे पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी का कुछ ट्रांसपोर्टर इस मायने में स्वागतयोग्य कदम बता रहे हैं क्योंकि वे मानते हैं कि इससे निजी गाड़ियां कम करने में मदद मिलेगी और शहर की सड़कों पर जाम कम होगा।

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