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40 लाख रुपये के घोटाले में फरार तोल लिपिक को पुलिस ने किया गिरफ्तार

40 लाख रुपये के घोटाले में फरार तोल लिपिक को पुलिस ने किया गिरफ्तार

देहरादून : डोईवाला शुगर मिल में पेराई सत्र 2016-17 में हुए 40 लाख रुपये के घोटाले में फरार चल रहे तोल लिपिक को पुलिस ने नेपाली फार्म, रायवाला से गिरफ्तार कर लिया। तोल केंद्रों पर गन्ना तोल के दौरान सैकड़ों किसानों को लाखों का चूना लगाने के षड्यंत्र का लिपिक ही मुख्य किरदार था। फरारी के दौरान पुलिस ने लिपिक पर ढाई हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया था।

एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने बताया कि डोईवाला शुगर मिल में गन्ना तोल में लाखों के गोलमाल का मामला पिछले साल मार्च में तब प्रकाश में आया था, जब सैकड़ों किसानों द्वारा प्रस्तुत की गई पर्चियों पर भुगतान नहीं हुआ।

प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद 28 मार्च 2017 को मिल के गन्ना प्रबंधक मनोज कुमार ने डोईवाला कोतवाली में तोल लिपिक हरवीर सिंह, पुत्र प्रेम सिंह निवासी मोहसनपुर पोस्टआफिस नारायणपुर, जिला अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश), प्रवीण कुमार पुत्र गुलाब सिंह निवासी गन्देवड़ा थाना गढ़ी पुख्ता, जिला शामली और रमेश कुमार सिंह पुत्र अमर पाल सिंह निवासी रामपुर बवहरिया थाना आसुपुर, जिला प्रतापगढ़ के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया।

इस बीच पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए शासन से एसपी ग्रामीण की अगुवाई में एसआइटी का गठन कर दिया गया। एसआइटी की जांच में पाया गया कि मिल प्रबंधन ने तोल केंद्रों की आठ बुकें शीघ्र प्रजाति की गुम होनी बताई गई थीं।

बताया गया कि इन गुम हुई बुकों का प्रयोग गन्ना तोल लिपिक हरवीर सिंह ने अपने गन्ना क्रय केंद्र धनौरी, जस्सोवाला और टाटवाला में किया। हालांकि, विवेचना में कुल 15 बुकों के शुगर मिल डोईवाला के रिकॉर्ड रूम से गायब होने की बात प्रकाश में आई।

इन गायब बुकों का प्रयोग हरवीर सिंह व प्रवीण कुमार द्वारा किया गया। मुकदमा दर्ज होने के बाद ही अभियुक्त हरवीर सिंह फरार हो गया। काफी तलाश करने पर भी कुछ पता नहीं चल पाया। बुधवार को हरवीर को नेपाली फार्म तिराहा रायवाला के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। उसे कोर्ट में पेश कर दिया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

नोएडा में हरवीर ने बेची मूंगफली

चालीस लाख रुपये के घोटाले का आरोपी हरवीर फरारी के दौरान नोएडा, दिल्ली और एनसीआर में ठिकाना बदल कर रह रहा। इस दौरान उसने मूंगफली बेची। उसके शातिर दिमाग का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गायब रहने के दौरान वह अपने पास मोबाइल नहीं रखता था। उसकी ठेली पर जो लोग मूंगफली खरीदने आते थे, उनसे मोबाइल मांगकर अपने नाते-रिश्तेदारों को फोन कर मामले में चल रही जांच और पुलिस की सक्रियता की जानकारी लेता रहता था।

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