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डॉक्टरों की लापरवाही से हुई गर्भवती और गर्भस्थ शिशु की मौत

डॉक्टरों की लापरवाही से हुई गर्भवती और गर्भस्थ शिशु की मौत

रुद्रप्रयाग: पंद्रह दिन पहले जिला अस्पताल में गर्भवती की मौत का कारण उसे उचित उपचार न मिलना सामने आया है। यही नहीं, अस्पताल स्टाफ के मध्य समन्वय की कमी भी इसकी वजह बनी। प्रकरण की मजिस्ट्रेटी जांच में यह तथ्य प्रकाश में आए। जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल के निर्देश पर अस्पताल की सीनियर गाइनोकोलॉजिस्ट डॉ. अर्चना वर्मा के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर ली गई है। साथ ही अन्य डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है।

दरअसल, कांडा सिमतोली निवासी आशा देवी तीन जुलाई को प्रसव के लिए जिला चिकित्सालय पहुंची थी। आरोप था कि अस्पताल स्टाफ ने उसका ठीक से इलाज नहीं किया और बाद में उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। जच्चा-बच्चा की रास्ते में ही मौत हो गई थी। अगले दिन मृतका के ससुर देवेश्वर प्रसाद थपलियाल ने डीएम से घटना की शिकायत की थी।

डीएम के निर्देश पर एसडीएम सदर देवानंद ने प्रकरण की जांच कर गुरुवार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। डीएम ने दोषी डाक्टर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए थे।

जांच रिपोर्ट का सार 

– सीनियर गाइनोकोलोजिस्ट डा. अर्चना वर्मा ने गर्भवती की लगभग पांच घंटे तक देखभाल नहीं की।

– महिला चिकित्साधिकारी डा. प्रांजली थापा ने सीनियर गाइनोकोलोजिस्ट से राय लिए बगैर ही गर्भवती को हायर सेंटर रेफर कर दिया।

– डा. प्रांजलि थापा ने पौने ग्यारह बजे के बाद सीनियर गाइनोकोलोजिस्ट को कोई फोन ही नहीं किया गया

– अस्पताल में डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के बीच आपसी समन्वय का अभाव रहा

– गर्भवती को न तो समय पर रेफर किया गया और न ही उसका सिजेरियन ऑपरेशन किया गया

– चिकित्सालय के जिस वाहन से गर्भवती को रेफर किया गया उसमें उपचार से संबंधित जरूरी उपकरण नहीं थे

– डाक्टरों ने गर्भवती के परिजनों से प्रसव के संबंध में नियमानुसार लिखित रूप से सहमति नहीं ली गई

– इन्हीं लापरवाही की वजह से गर्भवती और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत हुई

मुकदमा दर्ज 

जिलाधिकारी के निर्देश पर पुलिस ने जांच में दोषी करार सीनियर गाइनोकोलोजिस्ट डा. अर्चना वर्मा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304 ए (लापरवाही से किसी मौत होना) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।

अन्य स्टाफ पर भी कार्रवाई

मुख्य चिकित्साधिकारी एस के झा ने बताया कि महिला चिकित्साधिकारी डा. प्रांजलि थापा और पैरामेडिकल स्टाफ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

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