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शानदार अभिनय के लिए दून निवासी राधा भारद्वाज को मिला बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड

शानदार अभिनय के लिए दून निवासी राधा भारद्वाज को मिला बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड

देहरादून। दून के कांवली रोड निवासी राधा भारद्वाज ने अभिनय के क्षेत्र में उपलब्धि हासिल की है। उन्हें छत्रपति शिवाजी इंटनेशनल फिल्म फेस्टिवल में निर्माता विह्सलिंग वुड व स्वाति सरकार के निर्देशन में बनी शॉर्ट फिल्म अफसोस में शानदार अभिनय के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड मिला।

फिल्म अफसोस में एक ऐसी औरत की कहानी है, जो अपने कॅरियर और निजी जिंदगी के बीच बैलेंस बनाने में असमर्थ है। अंतत: वह अपनी की गई गलतियों के परिणामों तले दब जाती है।

सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए विथा, सर्वश्रेष्ठ निर्देशन के लिए बहुली को अवार्ड दिया गया। फिल्म फेस्टिवल में दुनिया भर से करीब 500 फिल्मों के नामांकन हुए थे।

राधा भारद्वाज सात साल से थिएटर से जुड़ी हुई हैं। वह कई बड़े थिएटर शो और टीवी विज्ञापनों के लिए काम कर चुकी हैं। उन्होंने दून से ही इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। वह अभिनय के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहती हैं।

नए क्लेवर में होगा जुबिन का ‘ता-छुमा-ता..’ गीत 

अभी तक हर उत्तराखंडी को झूमने पर मजबूर करने वाला लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी का ‘ता-छुमा-ता छुमा..’ गीत अब उत्तराखंड से बाहर भी छाने वाला है। क्योंकि बॉलीवुड गायक जुबिन नौटियाल इस गीत को सूफी-इलेक्ट्रो के नए कलेवर में सबके सामने लाने जा रहे हैं।

गढ़वाली गीत को सूफी के आधुनिक स्वरूप में पेश करने के इस खास प्रयोग की हर तरफ चर्चाएं भी हैं। वहीं, बॉलीवुड में प्रसिद्धि हासिल कर चुके जुबिन के इस गढ़वाली लोकगीत का प्रशंसकों को बेसब्री से इंतजार है।

जुबिन नौटियाल का यह गीत बेहद खास है। खुद जुबिन भी इस गीत को लेकर खासे उत्साहित नजर आ रहे हैं। गढ़वाली लोक गीत को सूफी संगीत में पेश करने को नए प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है। जुबिन का कहना है कि अभी तक वह प्यार भरे गीत ही गाते रहे हैं, इस बार उन्होंने गढ़वाली गीत चुना। उन्होंने गढ़वाली गीत को नया रूप इसलिए भी दिया है, ताकि इसे उत्तराखंड ही नहीं, राज्य के बाहर भी लोग सुनें और गढ़वाली को जानें।

सोशल मीडिया पर भी चर्चा

जुबिन के इस गीत का 16 सेकेंड का टीजर रिलीज हो चुका है और सोशल मीडिया पर यह खूब वायरल हो रहा है। लोग इसे व्हाट्सएप व फेसबुक पर शेयर कर रहे हैं। इसमें जुबिन के गढ़वाली बोल सूफी के आधुनिक स्वरूप में बेहद खास लग रहे हैं।

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