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उत्तराखंड में दो साल के भीतर डेढ़ करोड़ के नकली नोटों की बरामदगी ने बढ़ाई पुलिस की चिंता

उत्तराखंड में दो साल के भीतर डेढ़ करोड़ के नकली नोटों की बरामदगी ने बढ़ाई पुलिस की चिंता

देहरादून। अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे उत्तराखंड में दो साल के भीतर डेढ़ करोड़ के नकली नोटों की बरामदगी ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। बैंक और पुलिस द्वारा बरामदगी के मामलों में एक साल के भीतर 90 फीसद इजाफा हुआ है। इसके पीछे कहीं आतंकी कनेक्शन न हो, पुलिस और खुफिया एजेंसी जांच में जुट गई हैं। खासकर पाक और बांग्लादेश से नकली नोटों का कारोबार भारत में पहुंचने के कनेक्शन भी तलाशे जा रहे हैं। पुलिस बरामदगी के दौरान पकड़े गए आरोपितों के अलावा धंधे में संलिप्त रहे पुराने नटवरलाल की कुंडली खंगाल रही है। ताकि इसके पीछे का मकसद सामने आ सके।

केंद्र सरकार के नोटबंदी के निर्णय को नकली नोटों के कारोबार पर भी बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा था। लेकिन, नकली नोट के नटवरलाल बाज नहीं आए। चीन, नेपाल सीमा के अलावा अंतरराज्यीय सीमा हिमाचल प्रदेश और उप्र से लेकर उत्तराखंड तक भी नकली नोट का कारोबार फैलता जा रहा है। प्रदेश के 13 जिलों में 2017 में जहां 10 लाख के नकली नोट बरामद हुए थे, वहीं 2018 में यह संख्या एक करोड़ पार कर गई। इसमें बैंकों ने 25 लाख और पुलिस ने सवा करोड़ के जाली नोट बरामद किए। इस दौरान पुलिस ने 44 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

चिंता की बात यह है कि देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर के अलावा उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़ में नकली नोट मिलना सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है। यहां तक नकली नोट कैसे पहुंचे, इसे लेकर खुफिया एजेंसी भी चिंतित दिख रही है। खासकर देशभर में आए दिन बांग्लादेश और पाक बॉर्डर से नकली नोटों की तस्करी से यहां भी आतंकी कनेक्शन खंगाले जा रहे हैं। पुलिस इसके पीछे हरिद्वार, दून, ऊधमसिंहनगर में पकड़े गए आतंकवादी और माओवादियों के कनेक्शन तलाश रही है। सूत्रों का कहना है कि इसके लिए खुफिया एजेंसी ने पूर्व में गिरफ्तार हुए आतंकी और उनके संपर्क में रहे लोगों को रडार पर ले रखा है। ताकि नकली नोटों के नटवरलाल बेनकाब हो सकें।

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