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आइटीबीपी के सब इंस्पेक्टर की हत्या में दोषी जवान को उम्रकैद की सजा

आइटीबीपी के सब इंस्पेक्टर की हत्या में दोषी जवान को उम्रकैद की सजा

देहरादून: मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (एलबीएसएनएए) में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) के सब इंस्पेक्टर की हत्या में दोषी जवान को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय चौधरी की अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई। जवान को बीते शनिवार को दोषी करार दिया गया था।

जिला शासकीय अधिवक्ता जेके जोशी ने अदालत को बताया कि घटना अकादमी के मुख्य गेट पर 10 जुलाई 2015 की शाम करीब छह बजे हुई थी। यहां सुरक्षा में तैनात आइटीबीपी 34वीं बटालियन के जवान चंद्रशेखर ने एलएमजी से ताबड़तोड़ फायङ्क्षरग कर एसआइ सुरेंद्र लाल पुत्र आत्माराम शर्मा निवासी कांगड़ा हिमाचल प्रदेश की हत्या कर दी थी।

चार गोलियां एसआइ के शरीर से आरपार हो गई थीं और उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी। बीच-बचाव में साथी जवान अख्तर हुसैन पर भी चंद्रशेखर ने तीन गोलियां दाग दी थीं। मगर अख्तर खुशकिस्मत रहे, उपचार के दौरान दो गोलियां तो डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर निकाल दीं, लेकिन एक गोली अभी भी उसके पेट में फंसी हुई है।

सहारनपुर के मूल निवासी अख्तर इन दिनों नैनीताल में तैनात हैं। वारदात को अंजाम देने के बाद घटनास्थल से 70 के करीब कारतूस और एलएमजी लेकर भागे चंद्रशेखर को 12 जुलाई 2015 को चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया गया और उसकी निशानदेही पर मसूरी के जंगल में फेंकी गई एलएमजी बरामद कर ली गई। जवान को आइटीबीपी से बर्खास्त कर दिया गया था।

बीते शनिवार को केस की सुनवाई पूरी होने पर अदालत ने चंद्रशेखर को हत्या और जानलेवा हमले का दोषी पाया। अदालत ने चंद्रशेखर निवासी ग्राम हर्रोट तहसील, जयसिंहपुर, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश को हत्या में उम्रकैद और दस हजार रुपये जुर्माना तथा जानलेवा हमले में दस साल सश्रम कैद और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

सजा देने पर मारी थी गोली

सरकारी वकील जेके जोशी ने बताया कि एसआइ सुरेंद्र लाल ने वारदात से एक दिन पहले ड्यूटी में लापरवाही बरतने के कारण कांस्टेबिल चंद्रशेखर को दो दिन की पिट्ठू सजा सुनाई थी। यह सजा उसे 10 और 11 जुलाई को भुगतनी थी। इसी से नाराज होकर चंद्रशेखर ने एसआइ पर गोलियां बरसा दीं।

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