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भत्तों में कटौती से कर्मचारी संगठनों में उबाल, मुख्यमंत्री ने भत्तों पर दोबारा विचार करने के लिए आला अधिकारियों को दिए निर्देश

भत्तों में कटौती से कर्मचारी संगठनों में उबाल, मुख्यमंत्री ने भत्तों पर दोबारा विचार करने के लिए आला अधिकारियों को दिए निर्देश

देहरादून। उत्तराखंड में कर्मचारियों के भत्तों में कटौती से कर्मचारी संगठनों में उबाल है। कर्मचारियों के रुख को देखते हुए इस मामले में सरकार पुनर्विचार कर रही है।

सातवें वेतन के भत्तों की व्यवस्था से नाखुश राज्य कर्मचारियों को जल्द ही कुछ राहत मिल सकती है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नए वेतनमान के भत्तों खासतौर पर खत्म किए गए भत्तों पर दोबारा विचार करने के निर्देश मुख्य सचिव समेत आला अधिकारियों को दिए हैं।

सरकार सातवें वेतनमान के भत्ते तय कर चुकी है। इन्हें एक फरवरी से दिए जाने का आदेश भी जारी किया जा चुका है। यह दीगर बात है कि कर्मचारी संगठन नए भत्तों की व्यवस्था से नाखुश हैं। कर्मचारियों व अधिकारियों के विभिन्न संगठन एक संयुक्त मोर्चा बनाकर सरकार को एक फरवरी तक अल्टीमेटम दे चुके हैं।

कर्मचारियों के रोष को भांपकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, कार्मिक व वित्त अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी व वित्त सचिव अमित नेगी को तलब किया।

गुरुवार देर शाम मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में उनके आवास पर उक्त आला अधिकारियों की बैठक में कर्मचारियों की मांगों और समस्याओं पर विचार किया गया। सरकारी प्रवक्ता के मुताबिक बैठक में तय किया गया कि भत्तों को लेकर कर्मचारियों की आपत्तियों को देखते हुए पुनर्विचार किया जाएगा। खत्म किए गए कुछ भत्तों पर भी पुनर्विचार करने का निर्णय लिया गया।

भत्ते कटौती पर कर्मचारी संगठनों के तेवर तल्ख

प्रदेश सरकार के राज्य कर्मचारियों के भत्तों में कटौती करने पर संगठन मुखर नजर आ रहे हैं। प्रदेश सरकार ने भले ही अब फैसले पर पुनर्विचार करने का आश्वासन दे दिया हो, लेकिन कर्मचारी संगठन फैसला शीघ्र वापस लेने की मांग पर अड़े हैं। संगठनों ने सरकार को भी खुली चेतावनी दी है कि यदि सरकार फैसला वापस नहीं लेती तो कर्मचारी बड़े आंदोलन की राह अपनाएंगे।

उत्तराखंड कार्मिक, शिक्षक, आउटसोर्स संयुक्त मोर्चा के मुख्य संयोजक ठाकुर प्रहलाद सिंह ने कहा कि भत्तों में कटौती का संयुक्त मोर्चा विरोध करता है। अभी सरकार ने पुनर्विचार करने की बात कही है। यदि सरकार शीघ्र फैसला वापस नहीं लेती तो हम आंदोलन की रूपरेखा तय करेंगे।

मोर्चा संयोजक नंद किशोर त्रिपाठी के अनुसार परिवार नियोजन समेत अन्य भत्ते समाप्त करना कर्मचारी हित ही नहीं, राष्ट्र हित के भी खिलाफ है। प्रदेश सरकार लगातार कर्मचारियों के खिलाफ फैसले ले रही है। ऐसा नहीं होना चाहिए। कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के बजाय हतोत्साहित किया जा रहा है।

उत्तराखंड कर्मचारी-अधिकारी समन्वय मंच के प्रवक्ता पूर्णानंद नौटियाल ने कहा कि अभी सरकार ने फैसले पर पुनर्विचार करने का आश्वासन दिया है। उम्मीद करते हैं कि सरकार फैसला वापस लेगी। यदि ऐसा नहीं होता तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण होगा।

राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष दिग्विजय सिंह के मुताबिक प्रदेश सरकार की ओर से शिक्षक, कर्मचारियों के भत्तों में कटौती का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार अपनी सुविधाओं में तो वृद्धि कर रही, लेकिन कर्मचारियों के भत्तों में कटौती कर शोषण कर रही है। वह सरकार से भत्तों की बहाली की मांग करते हैं।

कलेक्ट्रेट कर्मचारी भी मंच के समर्थन में 

उत्तराखंड कलेक्ट्रेट मिनिस्ट्रीयल कर्मचारी संघ ने भी अधिकारी-कर्मचारी समन्वय मंच को समर्थन दिया है। उनका कहना है कि कर्मचारी हित में यह निर्णय लिया गया है। मंच के हर आंदोलन में संघ शामिल होगा।

संघ के प्रांतीय महामंत्री राजेंद्र सिंह रावत ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि अल्मोड़ा में हुए अधिवेशन में संघ ने कर्मचारियों के हितों में कर्मचारी मंच समेत अन्य को समर्थन देने तथा आंदोलन में शामिल होने का निर्णय लिया था। अब कर्मचारी समन्वय मंच समेत अन्य संगठन एकजुट होकर कर्मचारियों की लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे में संघ के 10 सूत्रीय मांग पत्र को भी मंच ने अपने साथ शामिल किया है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के समस्त कलेक्ट्रेट कर्मचारी मंच के 31 जनवरी को सामूहिक अवकाश आंदोलन में शामिल होंगे। इसके अलावा चार फरवरी को परेड ग्राउंड में महारैली में शामिल होने के साथ अन्य कार्यक्रमों में प्रतिभाग किया जाएगा। इधर, संघ ने उत्तरांचल फेडरेशन ऑफ मिनिस्ट्रीयल सर्विसेज के 28 जनवरी को प्रस्तावित प्रांतीय अधिवेशन में शामिल होने का निर्णय लिया है।

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