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डेंगू के लगातार सामने आ रहे मामलों से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

डेंगू के लगातार सामने आ रहे मामलों से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

देहरादून: तीर्थनगरी ऋषिकेश में डेंगू का डंक गहराता जा रहा है। खासकर चौदहबीघा क्षेत्र में एक के बाद एक मरीज सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार शुक्रवार को कराई गई जांच में चौदहबीघा के चार मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। इससे पहले यहां किराए पर रहने वाले पौड़ी निवासी व्यक्ति की डेंगू से मौत भी हो गई थी। जनपद टिहरी गढ़वाल के इस क्षेत्र में डेंगू के लगातार सामने आ रहे मामलों से स्वास्थ्य विभाग में भी हड़कंप है।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने क्षेत्र का दौरा कर लोगों को पानी जमा न होने देने और बुखार होने पर चिकित्सक से परामर्श लेने व जांच कराने की सलाह दी है। देहरादून के जिला वीबीडी अधिकारी सुभाष जोशी के मुताबिक टिहरी के अधिकारियों ने चौदहबीघा का दौरा कर बुखार से पीडि़त लोगों के रक्त के नमूने लिए थे। जिनकी दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की लैब में एलाइजा जांच कराई गई। इनमें दो महिलाओं और दो पुरुषों को डेंगू की पुष्टि हुई है। विभाग ने सभी मरीजों को अस्पताल में डॉक्टर को दिखाकर डेंगू का उपचार कराने के लिए कहा है। साथ ही आसपास  पानी जमा न रखने, पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने आदि को कहा गया है। वहीं, स्थानीय नगर निकाय की ओर से विभिन्न इलाकों में फॉगिंग कराई जा रही है।

अभी तक के मामले 

जनपद——–केस——–मौत

देहरादून——–8———0

हरिद्वार——-2———0

नैनीताल——-6———0

टिहरी गढ़वाल-7——–1

ऊधमसिंहनगर-2———0

कुल मामले-25———1

अन्य राज्यों से आए मरीज

राज्य—————–मरीज

उत्तर प्रदेश———2

महाराष्ट्र————-1

हिमाचल प्रदेश——1

कुल मामले———4

डेंगू के संदिग्ध मरीज की मौत

हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट में भर्ती डेंगू के संदिग्ध  मरीज की मौत हो गई है। हालांकि मरीज की एलाइजा रिपोर्ट अभी नहीं आई है। रैपिड टेस्ट में डेंगू की पुष्टि हुई है। जानकारी के अनुसार बिजनौर निवासी 29 वर्षीय युवक को गुरुवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जिसकी उपचार के दौरान मौत हो गई है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसके गुप्ता ने बताया कि मरीज की एलाइजा रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आ जाने के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट होगा।

दावा सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवाएं का और अस्पताल के लिए बजट नहीं

राज्य सरकार जहां स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ करने का दम भर रही है अस्पताल पाई-पाई तक को तरस रहे हैं। हद ये कि सितम्बर आ गया पर इस वित्तीय वर्ष का बजट अब तक नहीं आया है। दूरस्थ क्षेत्रों की बात छोडि़ए, राजधानी दून में ही यह हाल है। शहर के दूसरे प्रमुख अस्पताल कोरोनेशन अस्पताल की देनदारी एक करोड़ 36 लाख पहुंच गई है। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि मरीजों का मर्ज दूर करने वाले इस अस्पताल को तंगी का मर्ज लग गया है।

कोरोनेशन अस्पताल शहर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शुमार है। इसे नेत्र चिकित्सालय के साथ मर्ज कर जिला अस्पताल बनाने की कवायद की जा रही है। लेकिन स्थितियां अनुकूल नहीं दिख रही। अस्पताल का सालाना बजट करीब सवा तीन करोड़ रुपये का है। पर इस वित्तीय वर्ष में एक रुपया अब तक नहीं मिला। अस्पताल को लेकर विभाग किस कदर बेरुखी दिखा रहा है इसके लिए पिछले वित्तीय वर्ष का हाल जान लीजिए। पिछली दफा अस्पताल को पूरे साल महज 90 लाख का बजट दिया गया। ऐसे में व्यवस्थाएं भगवान भरोसे चल रही हैं। दवा, कैंटीन आदि का अस्पताल पर एक करोड़ 36 लाख रुपये बकाया है। यह स्थिति दिनोंदिन और विकराल होती जा रही है। उच्चाधिकारियों से इस बारे में बात कीजिए तो रटा रटाया सा जवाब मिलता है। वह यह कि शासन से ही बजट नहीं मिल रहा। अस्पताल के सीएमएस डॉ. एलसी पुनेठा का कहना है कि स्वास्थ्य महानिदेशालय को इस स्थिति से अवगत करा दिया गया है।

यूजर चार्ज से चल रहे छोटे-छोटे खर्च

अस्पताल अपने छोटे-छोटे खर्च यूजर चार्ज की बदौलत चला रहा है। ओपीडी, पैथोलॉजी आदि के माध्यम से हर दिन औसतन दस से बारह हजार रुपये की कमाई होती है। जिसमें आधा सरकारी खजाने में जमा होता है। बाकि रकम से संविदा कर्मचारियों का वेतन, बिजली, पानी व टेलीफोन का बिल और गाड़ि‍यों के ईंधन का खर्च चलता है।

कोर्ट केस भुगत रहा अस्पताल 

विभाग की इस उदासीनता का ही नतीजा है कि अस्पताल मुकदमा झेल रहा है। दवा की आपूर्ति करने वाली एक कंपनी ने यह मुकदमा किया है। कंपनी का करीब साढ़े 11 लाख रुपये बकाया था। पैसा न मिलने पर कंपनी कोर्ट चली गई।

एमएस ने दिखाई सख्ती, ओपीडी का लिया जायजा

दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चिकित्सकों और निजी लैब संचालकों की साठगांठ उजागर होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। शुक्रवार को चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा ने सभी विभागों की ओपीडी का निरीक्षण कर चिकित्सकों को अस्पताल की पैथोलॉजी में होने वाली जांचों को बाहर से न लिखने की हिदायत दी। उन्होंने ऐसा करते पाए जाने और शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। बता दें कि हाल में अस्पताल में एक चिकित्सक द्वारा मरीज को बाहर से जांच लिखने का मामला सामने आया था। जिस पर तीमारदार ने अस्पताल में हंगामा भी किया। जबकि बीपीएल मरीजों की तमाम जांच अस्पताल में निश्शुल्क की जाती है। जबकि अन्य मरीजों की जांच भी रियायती दर पर की जाती है। इस मामले में चिकित्सा अधीक्षक ने डॉक्टर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मेडिसन विभाग के प्रभारी को जांच के भी आदेश उन्होंने दिए हैं।

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