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स्वाइन फ्लू का कहर लगातार बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप, हर दिन हो रही मरीजों में पुष्टि

स्वाइन फ्लू का कहर लगातार बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप, हर दिन हो रही मरीजों में पुष्टि

देहरादून। स्वाइन फ्लू का कहर थम नहीं रहा है। ऐसा कोई दिन नहीं बीत रहा जब इस बीमारी का कोई नया मामला सामने नहीं आ रहा है। प्रदेश में पांच और नए मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। इनमें चार मरीज देहरादून और एक मरीज उत्तरकाशी का रहने वाला है।

इस तरह राज्य में अब तक स्वाइन फ्लू का वायरस 41 लोगों को अपनी चपेट में ले चुका है। इनमें से 12 लोगों की मौत भी स्वाइन लू से हुई है। अकेले श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में स्वाइन फ्लू से नौ मरीजों की मौत हुई है। जबकि मैक्स अस्पताल में दो और सिनर्जी अस्पताल में एक मरीज की मौत हुई है। जानकारी के अनुसार स्वाइन फ्लू से पीड़ित 14 मरीजों का उपचार देहरादून के अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है।

स्वाइन फ्लू का कहर लगातार बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। विभागीय अधिकारियों को सूझ नहीं रहा है कि आखिर जानलेवा साबित हो रहे एच-1एन-1 इंफ्लूएंजा वायरस की रोकथाम व नियंत्रण के लिए किस तरह के प्रभावी कदम उठाए जाए। इतना जरूर कि स्वास्थ्य महकमा एडवाइजरी पर एडवाइजरी जारी कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री जरूर कर रहा है।

स्वाइन फ्लू में बहुत कारगर नहीं वैक्सीन

स्वाइन फ्लू का वायरस एच-1 एन-1 निरंतर अपना स्वरूप बदलता रहता है। इस कारण लंबे समय तक प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करने वाली कारगर वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. टीसी पंत का कहना है कि एच-1 एन-1 टीकाकरण को मास वैक्सीनेशन के रूप में किया जाना कतई कारगर उपाय नहीं है।

स्वास्थ्य महानिदेशालय में आयोजित प्रेस वार्ता में डॉ. पंत ने बताया कि बाजार में उपलब्ध वैक्सीन अधिकतम एक वर्ष के लिए ही कारगर रहती है। यह केवल 70 प्रतिशत रोगियों में ही एक वर्ष के लिए प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न कर सकती है। वह भी यदि सर्कुलेटिंग स्ट्रेन उस वैक्सीन से पूर्णत: मैच करता है तो।

उन्होंने कहा कि इंफ्लुएंजा वायरस के असर को खत्म करने के लिए जो भी वैक्सीन आती है, उन्हें समय-समय पर अपडेट करने की जरूरत होती है। क्योंकि वायरस स्ट्रेन हर साल या दो से तीन साल में बदल जाता है। वैक्सीन लगाने के बाद भी इसका असर होने में कुछ समय लगता है।

इस दौरान वायरस से इंफेक्ट होने का खतरा बना ही रहता है। अगर मरीज को कोई सेकेंड्री इंफेक्शन है तो इसका असर कम हो सकता है। इसके अलावा डायबिटीज, हार्ट व कैंसर, गुर्दा रोग या एचआइवी पॉजिटिव व्यक्ति में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से वैक्सीन के सीमित नतीजे मिलते हैं।

स्वास्थ्य महानिदेशक ने कहा कि प्रदेश के अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के मरीजों के उपचार के लिए दवाइयों सहित सभी कारगर व्यवस्थाएं मौजूद हैं। प्रत्येक जिला एवं बेस चिकित्सालय में आइसोलेशन वार्ड स्थापित कर दिए गए हैं, जिनमें 176 बिस्तर उपलब्ध हैं।

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