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ठगी करने वाले गिरोह का हुआ भंडाफोड़, पांच गिरफ्तार

ठगी करने वाले गिरोह का हुआ भंडाफोड़, पांच गिरफ्तार

देहरादून: एसओजी और वसंत विहार पुलिस ने इंश्योरेंस पॉलिसी में बोनस दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपित इंटरनेट और अन्य माध्यमों से लोगों का डाटा खरीदकर उन्हें फोन पर इंश्योरेंस कराने का लालच देते थे। ये सभी काम ऑनलाइन किए जाते थे। अभी तक पुलिस दो करोड़ रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शन का पता लगा चुकी है। आरोपितों के पास से कई बैंकों की चेक बुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन आदि बरामद हुएहैं।

एसपी सिटी प्रदीप रॉय ने बताया कि 18 जुलाई को विशाल शुक्ला पुत्र विजय कुमार निवासी इंदिरानगर ने वसंत विहार पुलिस से शिकायत की थी। जिसमें बताया कि एशियन स्कूल के निकट आर्य शॉपिंग कॉम्पलेक्स में उनकी माता के नाम पर एक दुकान थी। जिसे उन्होंने 2011 में बेच दिया था। इस संपति के फर्जी प्रपत्र तैयार कर अरुण सिंह पुत्र जसपाल सिंह ने अलग-अलग बैंकों में खाते खोलकर  धनराशि का लेनदेन किया।

जिसके बाद थाना प्रभारी वसंत विहार व एसओजी प्रभारी पीडी भट्ट के नेतृत्व में टीम बनाकर अरुण सिंह की तलाश शुरू की गई। टीम ने बैंकों से जानकारी ली तो पता चला कि अरुण सिंह द्वारा रियल सर्विस नाम की कंपनी खोली गई है। जिसके आधार पर विभिन्न बैंकों में खाते खोले। इन खातों में नियमित रूप से भारी लेनदेन किया गया। टीम ने अरुण की गिरफ्तारी के लिए देहरादून, मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद व दिल्ली में दबिश दी। शुक्रवार को रियल हाईट चौक राजनगर एक्सटेंशन, गाजियाबाद से अरुण सिंह पुत्र जयपाल सिंह निवासी ग्राम कमड, रुद्रप्रयाग, हाल निवासी रायपुर, देहरादून को गिरफ्तार कर लिया।

छताछ पर अरुण अपने कुछ और साथियों के नाम पर बताए। जिसके बाद टीम ने अरुण के साथ राजनगर एक्सटेंशन, गाजियाबाद में दबिश दी और वहां से अंकित कुमार निवासी हाइ एंड पैराडाइज सोसायटी राजनगर, सिद्धांत चौधरी निवासी सरस्वती कॉलोनी साहिबाबाद, हिमांशु मोगा निवासी ग्राम सुठैडी पोस्ट खतौली, मुजफ्फरनगर और रोहित निवासी उत्तरी विद्यालय ब्लॉक मंडावली, फासलपुर, पूर्वी दिल्ली को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे 13 मोबाइल, विभिन्न बैंकों की दस चेक बुक, चार एटीएम, एक कार व चालीस हजार से अधिक नकदी बरामद की गई।

पॉलिसी में बोनस का लालच देकर करते थे ठगी

एसओजी प्रभारी पीडी भट्ट और थाना प्रभारी वसंत विहार ने बताया कि अरुण कुमार पहले दिल्ली में जॉब करता था। उसकी मुलाकात अंकित से हुई, जो किसी कॉल सेंटर में काम करता था। अंकित के माध्यम से उनकी मुलाकात कॉल सेंटर संचालित करने वाले सिद्धांत चौधरी, दीपक तिवारी, रोहित, हिमांशु मोगा से हुई। सभी ने ऑनलाइन ठगी की योजना बनाई। अरुण को खाते खोलने की जिम्मेदारी दी गई। जबकि सिद्धांत और अरुण तिवारी लोगों के मोबाइल नंबर एकत्रित कर उनसे बातचीत करते थे। आरोपितों ने बताया कि वह लोगों को इश्योरेंस पॉलिसी में बोनस का लालच देते थे और अधिक धनराशि देने के लिए सर्विस चार्ज के रूप में कुछ राशि खातों में ट्रांसफर करने को कहते थे। जैसे ही धनराशि खाते में ट्रांसफर होती, वह उसे निकाल लेते थे।

खरीदते थे लोगों का डाटा 

शातिर या तो गूगल के माध्यम से या मोबाइल कंपनियों से मोबाइल नंबरों का डाटा खरीदते थे। इसके बाद फर्जी मोबाइल नंबरों से वह लिस्ट में मौजूद मोबाइल नंबरों से बातचीत करते थे। जो ग्राहक उनके चंगुल में फंस जाते थे, उसने वह रकम अपने खातों में ट्रांसफर करवाते थे। आरोपितों ने बताया कि मोबाइल नंबरों का डाटा चार से पांच हजार रुपये में उपलब्ध हो जाता था।

अरुण को मिलता था दस प्रतिशत

पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि अरुण को उन्होंने खाता खोलने का काम दिया था। अरुण ने बताया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उसने दून में विभिन्न बैंकों में नौ, जबकि दो खाते दिल्ली में खोले थे। यह खाते उसने रियल सर्विस नामक फर्जी कंपनी खोलकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खोले थे। ठगी की पूरी रकम उसी के खाते में आती थी। सिद्धांत और दीपक तिवारी जैसे ही किसी ग्राहक ने रकम खाते में डाली, वह इसकी जानकारी अंकित को देते थे। अंकित इसकी जानकारी अरुण को देता था। इसके बाद अरुण दस प्रतिशत धनराशि काटकर पैसा अंकित को दे देता था।

दो करोड़ का ट्रांजेक्शन पकड़ा 

पुलिस ने जब आरोपितों के खातों की जानकारी निकाली की तो शुरुआती दौर में ही उनके खातों में दो करोड़ की धनराशि का लेनदेन पाया गया है। अभी पुलिस और खातों की जानकारी जुटा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि देशभर में उनके द्वारा कई लोगों से ठगी की गई है।

बैंक ने की पूछताछ तो छोड़ दी रकम 

लाखों रुपये के लेन-देन के बाद अगर कोई बैंक इनसे पूछताछ करता तो यह खाते में ही अपनी रकम छोड़ देते थे। एसओजी प्रभारी ने बताया कि अभी तक दस लाख से अधिक ऐसी धनराशि का भी पता चला है।

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