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दस आतंकवादियों को मौत के घाट उतारने वाले शहीद के परिवार को भुला सिस्टम

दस आतंकवादियों को मौत के घाट उतारने वाले शहीद के परिवार को भुला सिस्टम

हल्‍द्वानी: दस आतंकवादियों को मौत के घाट उतारने वाले बिंदुखत्ता के बहादुर योद्धा लांस नायक मोहन नाथ गोस्वामी की शहादत को भी सिस्टम ने मानो भुला दिया है। मरणोपरांत वीरता का सर्वोच्च पदक अशोक चक्र मिलने के बावजूद अब तक बैंक ने पदक के साथ मिलने वाली मासिक धनराशि शहीद के परिवार को देनी शुरू नहीं की है। बैंक प्रबंधन सेना की ओर से आदेश न मिलना बताकर पल्ला झाड़ रहा है। अब जिला सैनिक कल्याण अधिकारी ने शहीद के परिवार को हक दिलाने के लिए आगे आए हैं। इधर, लालकुआं के बिंदुखत्ता में रहने वाले मोहन नाथ गोस्वामी वर्ष 2002 में नौ पैरा में भर्ती हुए थे। जांबाजी के दम पर उन्होंने जल्द ही सेना में एक विशेष पहचान बनाई। कई बार सेना के खतरनाक मिशन में शामिल होकर आतंकियों के दांत खट्टे किए। कमांडो का प्रशिक्षण ले चुके मोहन नाथ वर्ष 2015 में जम्मू-कश्मीर के विशेष बल पैरा कमांडो दस्ते में शामिल थे। 23 अगस्त 2015 को जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के सफाए के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया। इसमें तीन आतंकी मारे गए। इस ऑपरेशन के बाद मोहन ने एलओसी (लाइन ऑफ कंट्रोल) से सटे जंगल में साथियों की मदद से तीन और आतंकियों को मार गिराया। जबकि एक आतंकी जिंदा पकड़ लिया गया। यह उनका अंतिम सैन्य अभियान साबित हुआ था।

देश के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले महान योद्धा मोहन नाथ गोस्वामी को वर्ष 2016 में केंद्र सरकार ने मरणोपरांत अशोक चक्र दिया। तब गणतंत्र दिवस पर मोहन की पत्नी भावना और बेटी भूमिका को अशोक चक्र तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. प्रणब मुखर्जी ने सौंपा था। लेकिन शहीद परिवार को सरकार की तरफ से हर महीने दी जाने वाली 12 हजार रुपये की धनराशि नहीं मिल पाई। सिस्टम से हार चुकी शहीद की पत्नी की दास्तां जिला सैनिक कल्याण अधिकारी ने सुनी तो वह मदद के लिए आगे आए।

भावना (शहीद मोहन नाथ गोस्वामी की पत्नी) का कहना है कि सरकार की ओर से अशोक चक्र विजेता के आश्रित को प्रतिमाह मिलने वाली मासिक धनराशि अब तक मिलनी शुरू नहीं हुई है। इसके लिए मैं सेना से लेकर बैंक प्रबंधन तक कई बार पत्राचार कर चुकी हूं। जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर रौतेला ने मासिक धनराशि दिलाने का आश्वासन दिया है।

मेजर बीएस रौतेला (जिला सैनिक कल्याण अधिकारी, नैनीताल) का कहना है कि अशोक चक्र पदक विजेता को सरकार की ओर से 12000 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। मोहन नाथ की पत्नी भावना ने अब तक मासिक धनराशि न मिलने की जानकारी दी है। इस पर एसबीआइ बैंक प्रबंधन से संपर्क किया गया है। भावना को जल्द उनका हक दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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