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उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल के जख्मों पर अब लगेगा मरहम

उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल के जख्मों पर अब लगेगा मरहम

उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल के जख्मों पर अब लगेगा मरहम, पढ़िए पूरी खबर

देहरादून, उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में आपदा से बुग्याल (पहाड़ों में हरे घास के मैदान) जख्मी हो रहे हैं। उत्तरकाशी जिले में समुद्र तल से 3048 मीटर की ऊंचाई पर स्थित द्यारा बुग्याल भी इससे अछूता नहीं है। वहां पिछले कुछ वर्षों से भूस्खलन हो रहा है। जमीन दरकने से घास के इस मैदान की हरियाली पर भी असर पड़ा है। वन महकमे द्वारा कराए गए सर्वे में यह बात सामने आई है। इसे देखते हुए अब विशेषज्ञों की देखरेख में द्यारा के उपचार की कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। महकमे के मुखिया प्रमुख मुख्य वन संरक्षक जय राज ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि बरसात थमने के बाद इस बुग्याल में उपचारात्मक कार्य शुरू किए जाएंगे।

करीब 28 वर्ग किलोमीटर में फैला द्यारा बुग्याल जहां औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियों का भंडार है, वहीं सैलानियों के आकर्षण का केंद्र भी है। यहां से हिमालय का मनोरम नजारा हर किसी को अपने मोहपाश में बांध लेता है। कुदरत का यह अनमोल खजाना कुदरत की मार से जूझ रहा है। वहां पिछले कुछ सालों से भूस्खलन के साथ ही कई जगह भू-धंसाव भी हो रहा है। इसके चलते राज्य के इस अहम बुग्याल के लिए खतरा निरंतर बढ़ता जा रहा है।

वन विभाग की ओर से हाल में कराए गए सर्वे में ये बात भी सामने आई कि जमीन दरकने और भू-धंसाव के कारण इसके घास के मैदान की हरियाली पर असर पड़ा है। प्रमुख मुख्य वन संरक्षक जय राज के अनुसार द्यारा बुग्याल को लेकर विभाग सजग है। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद इसके उपचार के लिए कार्ययोजना तैयार कर ली गई है।

प्रमुख मुख्य वन संरक्षक ने कहा कि इस बुग्याल का संरक्षण विशेषज्ञों की मौजूदगी में वैज्ञानिक ढंग से किया जाएगा। इसमें स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। इस कड़ी में ग्रामीणों की बुग्याल संरक्षण समितियोंं की मदद ली जाएगी। कोशिश ये है कि इस साल के आखिर तक द्यारा के संरक्षण से संबंधित कार्य संपन्न करा लिए जाएं।

अन्य बुग्यालों का भी होगा सर्वे 

उच्च हिमालयी क्षेत्र में ट्री-लाइन व स्नो लाइन के मध्य पाए जाने वाले मखमली हरी घास के मैदानों को बुग्याल कहा जाता है। न सिर्फ द्यारा, बल्कि औली, हरकी दून, फूलों की घाटी, वेदनी समेत 36 बुग्याल भी भूक्षरण की गिरफ्त में हैं। अब इनका सर्वे कराया जाएगा कि इन्हें कितना नुकसान पहुंचा है।

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