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मसूरी व नैनीताल में शुरू की गई मुफ्त वाई फाई सेवा का नहीं है कहीं अता पता

मसूरी व नैनीताल में शुरू की गई मुफ्त वाई फाई सेवा का नहीं है कहीं अता पता

देहरादून: उत्तराखंड में दो वर्ष पहले पर्यटन नगरी मसूरी व नैनीताल में शुरू की गई मुफ्त वाई फाई सेवा का कहीं अता पता नहीं है। स्थिति यह है कि संबंधित विभाग को 1.86 करोड़ रुपये का भुगतान तक हो चुका है, मगर कहां क्या काम हुआ, इसकी जानकारी विभाग को भी नहीं है। इसे देखते हुए अब निदेशक आइटीडीए (इन्फारमेशन टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट अथॉरिटी) अमित सिन्हा ने इस मामले के विस्तृत परीक्षण के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही कार्यवाही की जाएगी।

प्रदेश में वर्ष 2016 में तत्कालीन राज्य सरकार ने सभी जिलों में मुफ्त वाईफाई सुविधा देने की योजना बनाई थी। यह मसला कैबिनेट में लाया गया। हालांकि, बजट का हवाला देते हुए शुरू में पर्यटकों को लुभाने के लिए केवल मसूरी व नैनीताल में इस योजना को शुरू करने का निर्णय लिया गया। इस योजना के लिए चार करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी गई। बताया गया कि वाईफाई सुविधा के तहत 100 मेगाबाइट प्रति सेकेंड की स्पीड दी जाएगी।

इससे बड़ी से बड़ी फाइल भी मिनटों में डाउनलोड हो जाएगी। पर्यटकों को यह सुविधा मुफ्त देने का भी निर्णय लिया गया। इसके टेंडर भी किए गए। इसके बाद जिस कंपनी को यह कार्य मिला, उस कंपनी को 1.86 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। इसके लिए बाकायदा टेलीफोन की तार के निष्क्रिय पड़े खंभों पर बॉक्स भी लगाए गए। दावा किया गया कि यह सेवा सुचारू चल रही है। वर्ष 2017 में विधानसभा चुनाव आते-आते सबका ध्यान इससे हट गया।

दो वर्ष बाद आइटीडीए निदेशालय की नजर इस ओर पड़ी। जब इस संबंध में पत्रावली मंगाई गई तो पता चला कि इसके लिए तो 1.86 करोड़ का भुगतान भी हो चुका है। प्राधिकरण को इसकी बहुत अधिक जानकारी नहीं थी तो पहले इस मामले का परीक्षण कराया जा रहा है।

निदेशक आइटीडीए अमित सिन्हा ने कहा कि अभी यह देखा जा रहा है कि कंपनी ने यदि सामान दिया है तो किस को रिसीव कराया गया है। इस योजना का कंप्लीशन सर्टिफिकेट दिया गया है या नहीं। भुगतान किस आधार पर किया गया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सभी दस्तावेज एकत्र करने के बाद ही आगे कदम उठाया जाएगा।

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