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आसन नमभूमि में प्रवास पर आए परिंदे बढ़ते ट्रैफिक के शोर से असहज

आसन नमभूमि में प्रवास पर आए परिंदे बढ़ते ट्रैफिक के शोर से असहज

विकासनगर। देश के पहले कंजर्वेशन रिजर्व आसन नमभूमि में प्रवास पर आए परिंदे बढ़ते ट्रैफिक के शोर से असहज महसूस कर रहे हैं। डीएफओ की ओर से पुलिस प्रशासन को पत्र लिखने के बाद भी क्षेत्र से भारी वाहनों का गुजरना बंद नहीं हो रहा है। आसन बैराज का पुल सिंगल होने के कारण वन वे ट्रैफिक रहता है। जब तक एक तरफ के वाहन नहीं गुजरते हैं, तब तक दूसरी तरफ वाहनों को खड़ा रहना पड़ता है।

इस बीच आगे निकलने के चक्कर में वाहनों के प्रेशर हार्न का शोरगुल इतना अधिक रहता है कि प्रवासी परिंदे झील से दूर उड़कर दूसरी तरफ चले जाते हैं। वर्तमान में आसन वेटलैंड में देशी विदेशी 55 प्रजातियों ग्रेट क्रेस्टेड ग्रीब, बार हेडेड गीज, पर्पल स्वेप हेन, फेरीजिनस पोचार्ड, मार्क हेरियर, ब्राइनी काइट, मार्टिन, स्वैलो रिंग फ्लोवर, नार्दन पिनटेल्स, इरोशियन विजन, कोम्ब डक, नार्दन पिनटेल्स, इरोशियन विजन, कामन किंगफिशर, व्हाइड थ्रोटेड किंगफिशर, पाइड किंगफिशर, रेड नेक्ड आइबीज, इंडियन पांड हेरोन, पर्पल हेरोन, ब्लैक विंग्ड सिल्ट, कामन कूट, कामन पोचार्ड, टफ्टेड, रुडीशेलडक, हार्नबिल, रेड क्रसटेड, मलार्ड, गैडवाल, ग्रे हेरोन, लिटिल ग्रेब, स्पाट बिलडक, इंडियन कोरमोरेंट, ग्रेट कोरमोरेंट समेत कई प्रजातियों के करीब 5000 परिंदे प्रवास हैं।

जिसमें सबसे ज्यादा संख्या सुर्खाब की है। आसन नमभूमि में उत्तराखंड के मेहमान बने रंग बिरंगे परिंदो को देखने के लिए पक्षी प्रेमी भी जुट रहे हैं। नए साल पर आसन झील में प्रवासी परिंदे देखने व बोटिंग करने के लिए काफी संख्या में पर्यटक उमड़ रहे हैं। इसके अलावा उपखनिज से भरे वाहन भी इसी रास्ते से गुजरने से शोरगुल बढ़ रहा है। जिससे प्रवासी परिंदे असहज महसूस कर रहे हैं। आसन रेंजर जवाहर सिंह तोमर व वन बीट अधिकारी प्रदीप सक्सेना के अनुसार उच्चाधिकारियों द्वारा कई बार ट्रैफिक के शोरगुल से प्रवासी परिंदों को हो रही दिक्कत के संबंध में पुलिस प्रशासन को पत्र लिखे जा चुके हैं, फिर भी भारी वाहनों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। शोरगुल के कारण पक्षी या तो घास में छिप जाते हैं या फिर यमुना में चले जाते हैं।

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