त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बयान दिया,सभी के हक-हकूक सुरक्षित हैं

उत्तराखंड चारधाम श्राइन बोर्ड के गठन को लेकर उठ रहे विरोध के सुरों के बीच मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि जब भी हम कोई सुधार करते करते हैं या कोई नई प्रक्रिया अपनाते हैं तो शुरू में उसका विरोध होता ही है। मुख्यमंत्री आवास में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने कहा कि केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्यों का भी शुरुआत में विरोध हुआ था। लोकतंत्र में विरोध स्वाभाविक है, मगर आशंकित लोग विश्वास करें कि सबके हक-हकूक सुरक्षित रहेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में चारधाम सहित अन्य धार्मिक स्थलों में देश -विदेश से ङ्क्षहदू श्रद्धालु आना चाहते हैं। फिर हमें अच्छे आतिथ्य के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि देश के कई बड़े धार्मिक स्थलों में श्राइन बोर्ड है। श्रद्धालुओं को उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों में आने का अवसर मिले और उन्हें अच्छी सुविधाएं उपलब्ध हों, इसके लिए कैबिनेट ने चारधाम श्राइन बोर्ड के गठन को मंजूरी दी है।

उन्होंने कहा कि 2030 तक यहां एक करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु आएंगे। इस वर्ष भी अभी तक श्रद्धालुओं की संख्या में 36 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। इसी के दृष्टिगत आगे के लिए धार्मिक स्थलों पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जानी हैं। उन्होंने कहा कि तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारियों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। इसे लेकर किसी को आशंकित होने की जरूरत नहीं है। भावी पीढ़ी की सुविधाओं को भी संरक्षित रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में आने वाले श्रद्धालुओं के साथ ही हमें सबकी चिंता है। इसीलिए श्राइन बोर्ड का अध्यक्ष मुख्यमंत्री और मुख्य कार्यकारी अधिकारी की जिम्मेदारी भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को सौंपी जाएगी। उन्होंने कहा कि बदरीनाथ का भी मास्टर प्लान के तहत विकास किया जायेगा।

तीन दिसंबर तक मांगे सुझाव

म ख्यमंत्री ने तीर्थ पुरोहितों के साथ ही हक-हकूकधारियों की ओर से श्राइन बोर्ड को लेकर व्यक्त की जा रही आशंकाओं के मद्देनजर तीन दिसंबर तक सुझाव मांगे हैं। चारधाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष आचार्य शिवप्रसाद ममगांई ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। आचार्य ममगांई ने कहा कि गुरुवार को उन्होंने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की थी, लेकिन मुख्यमंत्री ने साफ किया किया है कि चारधाम में हक-हकूकधारियों के हितों पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी।

यदि किसी को कोई आशंका है तो वह तीन दिसंबर तक सुझाव उनके माध्यम से दे सकते हैं। इन पर विचार कर इन्हें बोर्ड में शामिल किया जाएगा। सुझावों का क्रम आगे भी निरंतर बना रहेगा। अच्छे सुझावों को सरकार अमल में लाएगी। उन्होंने कहा कि बोर्ड के अस्तित्व में आने पर व्यवस्थाएं सशक्त हो जाएंगी। हक-हकूकधारियों के सभी हित सुरक्षित रखे जाएंगे।

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