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एमबीबीएस में दाखिले के नाम पर फर्जीवाड़े में महिला कांस्टेबल सहित दो आरोपी गिरफ्तार

एमबीबीएस में दाखिले के नाम पर फर्जीवाड़े में महिला कांस्टेबल सहित दो आरोपी गिरफ्तार

देहरादून: एमबीबीएस में दाखिले के नाम पर फर्जीवाड़े का मामला प्रकाश में आया है। आरोप है कि एक मेडिकल कॉलेज में खुद को ऐडमीशन कोऑर्डिनेटर बताने वाले  व्यक्ति ने पीड़िता की बेटी के दाखिले के नाम पर साढ़े छह लाख रुपये हड़प लिए। वहीं जालसाजी के दो मामलों में पुलिस ने महिला कांस्टेबल सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

कोतवाली पटेलनगर इंस्पेक्टर सूर्यभूषण नेगी ने बताया कि मंजू पुरोहित पत्नी राकेश चंद्र पुरोहित निवासी स्टाफ क्वार्टर, कोरोनेशन अस्पताल, डालनवाला शिकायत दर्ज कराई।

बताया कि पीड़िता के पति कोरोनेशन अस्पताल में फार्मासिस्ट हैं। उनकी बेटी प्रियंका ने वर्ष 2012 में मेडिकल प्रवेश परीक्षा दी थी, लेकिन किन्हीं कारणों से उसका दाखिला नहीं हो पाया। इसी बीच उनकी मुलाकात खुद को एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज में ऐडमीशन कोऑर्डिनेटर बताने वाले विष्णु कुमार नौटियाल से हुई। उसने बताया कि बिना डोनेशन के ऐडमीशन होना संभव नहीं है।

इसके बाद आरोपित ने दाखिले के नाम पर सात लाख रुपये की मांग की। पीड़िता के मुताबिक, उस दौरान राहुल शर्मा नाम का व्यक्ति भी उसके साथ था। उन्होंने कर्जा लेकर साढ़े छह लाख रुपये आरोपित विष्णु कुमार नौटियाल व राहुल शर्मा को दे दिए। बताया कि इसके बाद भी जब वर्ष 2015 में उनकी बेटी का दाखिला नहीं हो पाया तो उन्होंने आरोपितों से पैसे लौटाने को कहा। जिस पर आरोपितों ने बताया कि वह दिल्ली में बैठे अधिकारियों से सेटिंग करा कर दाखिला करा देंगे।

इसके बाद आरोपित विष्णु कुमार नौटियाल ने वर्ष 2016 में ऐडमिशन के नाम पर उनकी पुत्री को दिल्ली बुलाया। जहां पर राहुल शर्मा ने कहा कि उनकी बेटी की जगह किसी और से परीक्षा दिलवाएंगे। मगर इसके लिए उन्होंने मना कर दिया। पीड़िता का आरोप है कि इसके बाद से आरोपित पैसे नहीं लौटा रहे हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।

आरोपों से किया इन्कार

उधर, मामले में आरोपित मेडिकल कॉलेज के ऐडमीशन कोऑर्डिनेटर विष्णु कुमार नौटियाल ने उन पर लगाए गए आरोपों से इन्कार किया है। उनका कहना है कि दाखिले के नाम पर उन्होंने किसी से कोई पैसा नहीं लिया है। वह पुलिस के सामने अपना पक्ष रखेंगे।

जालसाजी में महिला कांस्टेबिल गिरफ्तार, जेल भेजा

बच्ची के इलाज के नाम पर जीवन रक्षक निधि सहित मुख्यमंत्री राहत कोष से अलग-अलग तिथियों में फर्जी तरीके से छह लाख रुपये से अधिक हड़पने वाली महिला कांस्टेबिल को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपित महिला कांस्टेबिल सुनीता के खिलाफ वर्ष 2017 में सीओ बजट पुलिस मुख्यालय बीएल टम्टा ने कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कराया था।

कोतवाली नगर में तैनात महिला कांस्टेबिल सुनीता ने जुलाई 2015 में अपनी पुत्री के उपचार के लिए आर्थिक सहायता के तौर पर डेढ़ लाख रुपये की मांग एसएसपी कार्यालय से की थी। पत्र में सुनीता ने बताया था कि उसकी बच्ची के दिल में छेद है, जिसका इलाज अपोलो अस्पताल में किया जाना है।

एसएसपी कार्यालय के प्रस्ताव के बाद पुलिस मुख्यालय ने उपचार के लिए एक लाख 25 हजार रुपये जीवन रक्षक निधि से स्वीकृत कर दिए। इसके बाद सुनीता ने फिर जुलाई 2016 में अपोलो अस्पताल का अनुमानित व्यय भार पत्र संलग्न करते हुए 4 लाख 90 हजार रुपये की मांग की। जिसके बाद डीआइजी रेंज के प्रस्ताव पर पुलिस मुख्यालय ने उक्त धनराशि भी स्वीकृत कर दी।

इसके अलावा मुख्यमंत्री की ओर से कांस्टेबिल को बच्ची के उपचार के लिए 75 हजार रुपये स्वीकृत किए गए। करीब छह लाख 15 हजार रुपये स्वीकृत होने के बाद मुख्यालय की ओर से कांस्टेबिल सुनीता से इलाज से संबंधित बिल, वाउचर उपलब्ध कराने को कहा गया। लेकिन बार-बार निर्देश के बाद भी वह दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पाई।

इसके बाद मुख्यालय के सीओ बजट की ओर से कांस्टेबिल सुनीता के खिलाफ कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कराया गया। जिसकी जांच वर्तमान में सीओ डालनवाला को दी गई। जांच के दौरान भी कांस्टेबल को बार-बार बच्ची के इलाज से संबंधित कागजात, बिल, बाउचर जमा करने के लिए कहा गया।

इस दौरान अपोलो अस्पताल की ओर से दिए गए अनुमानित व्यय भार की प्रति की जांच की गई तो वह भी फर्जी निकली। जांच पूरी होने के बाद कोतवाली पुलिस ने आरोपित महिला कांस्टेबिल को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

बैंक मैनेजर बन ठगी करने वाला गिरफ्तार

फर्जी बैंक अधिकारी बनकर फोन पर लोगों से बैंक खाते की डिटेल पूछ ठगी करने के आरोपित को एसटीएफ ने झारखंड के देवघर से गिरफ्तार किया है। आरोपित के चार अन्य साथी फरार हैं। एसएसपी एसटीएफ रिदिम अग्रवाल के अनुसार, आरोपित अपने साथियों के साथ अभी तक कई लोगों से पांच लाख 89 हजार रुपये ठग चुका है।

एसएसपी एसटीएफ ने बताया कि पकड़ा गया आरोपित अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर आम लोगों को फोन करते थे। उनसे बैंक खाते की जानकारी लेकर ऑनलाइन रकम को अपने एकाउंट में ट्रांसफर कर लेते थे। पुलिस को इस तरह की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। मई 2017 से नवंबर तक ऐसे कई मामले दर्ज किए गए।

इसके बाद जांच के लिए एक टीम को नक्सल प्रभावित क्षेत्र देवघर, जमतारा, गिरिडीह व धनबाद भेजी गई। टीम ने इन स्थानों पर जब गोपनीय रूप से आरोपितों का पता सत्यापन किया तो पता चला कि जिन मोबाइल नंबरों से यह लोगों को फोन करते थे, वह नंबर फर्जी आइडी से लिए गए थे। जिन खातों में पैसा ट्रांसफर हुआ, उनकी जांच में पता चला कि ये खाते इन्हीं इलाकों की विभिन्न बैंकों में खोले गए थे।

बैंकों से आरोपितों के पते निकालकर छापे मारे तो आरोपित वहां से गायब मिले। जबकि एक खाताधारक जिसके खाते में 35 हजार रुपये ट्रांसफर हुए, के बारे में ही स्पष्ट जानकारी मिल पाई। इस पर एसटीएफ ने स्थानीय पुलिस की मदद से दिवाकर कुमार पुत्र शंभू महतो निवासी मोहना कनाली थाना मोहनपुर, जनपद देवघर, झारखंड को गिरफ्तार कर लिया।

आरोपित से जब पूछताछ की गई तो उसने बताया कि वह गैंग बनाकर काम करते हैं। पुलिस के मुताबिक उसके चार साथी और भी हैं, जिनमें दो महिलाएं भी हैं। आरोपित की गिरफ्तारी के बाद चारों फरार हो गए।

एसएसपी एसटीएफ रिदिम अग्रवाल ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ उत्तराखंड के साथ ही दिल्ली, हरियाणा सहित कई जगह मुकदमे दर्ज है। फिलहाल आरोपित को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

उन्होंने बताया कि आरोपित से पूछताछ कर अन्य आरोपितों को भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस टीम में निरीक्षक भारत सिंह, उप निरीक्षक अमन चड्ढा, हे.का सुनील भट्ट, का. नितिन रमोला, पवन कुमार शामिल रहे।

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