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उन्नाव दुष्कर्म पीडि़ता

उन्नाव दुष्कर्म पीडि़ता

रायबरेली में दुष्कर्म पीडि़ता की कार से टकराने वाले ट्रक को लेकर चौतरफा भ्रम की स्थितियां हैं। हादसे के बाद ट्रक मालिक ने ट्रक को फाइनेंस कंपनी द्वारा खींचे जाने के डर की वजह से नंबर प्लेट पर ग्र्रीस लगाने की बात कही थी। अब फाइनेंस करने वाली कंपनी ओरिक्स लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज इंडिया लिमिटेड की अपनी सफाई सामने आने लगी है। हालांकि इसमें भी हर कदम पर अलग-अलग बातें हैं।

कानपुर में चुन्नीगंज स्थित इस कंपनी के क्लेम मैनेजर शशि कुमार ने कंपनी पर सवाल उठते देख इलेक्ट्रानिक मीडिया में कहा कि कंपनी की ट्रक पर कोई किस्त बकाया नहीं है लेकिन इसी ट्रक पर जुलाई में खुद मैनेजर और कंपनी के दिल्ली हाईकोर्ट के वकील ने नोटिस जारी की थी। दैनिक जागरण ने जब क्लेम मैनेजर से बात की तो उन्होंने कहा कि चार जुलाई को ट्रक की चार किस्तें बाकी थीं। चार जुलाई को ही उन्होंने वाट्सएप के जरिए ट्रक मालिक ललौली फतेहपुर निवासी देवेंद्र किशोर पाल को नोटिस दी थी।

खुद मैनेजर का कहना है कि अगले दो दिन के अंदर देवेंद्र किशोर ने 1,61,000 रुपये की दो किस्तें जमा कर दी थीं। इसके बाद दो किस्तें और कुछ ओवरड्यू बचे रह गए थे जो बमुश्किल दो लाख रुपये के थे। शशि कुमार कहते हैं कि देवेंद्र किशोर कंपनी के पुराने और अच्छे ग्र्राहक हैं और उनके तीन ट्रक पर फाइनेंस है। इसमें से एक पर एनओसी दे दी गई है। एक अन्य ट्रक पर भी दो किस्तें बाकी हैं। अपनी सफाई में उनका ये भी कहना है कि हम लोग राह चलते वाहन नहीं पकड़ते जो कानूनी प्रक्रिया होती है उसे पूरी करते हैं। उन्होंने बताया कि कंपनी के वकील ने भी एक नोटिस देवेंद्र किशोर को भेजा था।

कंपनी के वकील प्रशांत राठौर की तरफ से देवेंद्र को 15 जुलाई को नोटिस भेजा गया। जहां क्लेम मैनेजर दो किस्तें बाकी रहने की बात कह रहे हैं वहीं प्रशांत राठौर का कहना है कि वह कंपनी के वकील हैं और जिस समय उन्होंने नोटिस जारी की थी, देवेंद्र पर एक किस्त बकाया थी। उनके अनुसार इससे पहले उन्होंने कभी किस्त को बकाया को लेकर देवेंद्र किशोर को नोटिस नहीं भेजी।

भ्रम के हालात यहीं खत्म नहीं होते। जहां क्लेम मैनेजर देवेंद्र किशोर को अपना बहुत अच्छा ग्र्राहक बताते हैं और प्रशांत राठौर ने भी उन्हें पहले कोई नोटिस नहीं भेजी वहीं नोटिस में साफ कहा गया है कि कंपनी ट्रक को अपने कब्जे में ले सकती है और उसे नीलाम कर अपना बकाया वसूल सकती है।  ट्रक को खरीदने के लिए 26,77,921 रुपये का फाइनेंस जनवरी 2018 में कराया गया था। 40 किस्तों में इस लोन को चुकाना था। देवेंद्र के पास इस समय छह ट्रक हैं।

वहीं ट्रक मालिक देवेंद्र किशोर पाल ने कहा कि फाइनेंस वाले ट्रक की हर माह 80 हजार 200 रुपये की मासिक किस्त देनी होती है। चार किस्त न जमा होने पर कंपनी ने पंद्रह जुलाई को नोटिस दी थी, इसके बाद दो किस्तों का पैसा जमा कर दिया। दो किस्ते इस समय भी बकाया हैं।

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